सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पद से हटाए गए, कल कोर्ट ने किया था बहाल

नई दिल्ली। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पद से हटाए गए, पीएम मोदी की अध्यक्षता में सेलेक्ट कमेटी का फैसला। जस्टिस सिकरी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी बैठक में थे।  इस संबंध में बुधवार की रात बैठक हुई थी। लेकिन उस वक्त फैसला नहीं हो पाया था। गुरुवार को एक बार फिर पैनल कमेटी की बैठक हुई जिसमें उन्हें हटाने का फैसला किया गया। आलोक वर्मा को फायर सर्विसेज का डीजी बनाया गया है। आलोक वर्मा की जगह अंतरिम निदेशक रहे एम नागेश्वर राव को दोबारा अंतरिम निदेशक बनाया गया है। सेलेक्शन कमेटी ने 2-1 से आलोक वर्मा को उन्हें पद से हटाने का फैसला किया।

सेलेक्शन कमेटी के फैसले पर कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने कहा कि ये बदले की कार्रवाई है। बताया जा रहा है कि सेलेक्शन कमेटी में शामिल लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ से विरोध नहीं जताया गया।

करीब 77 दिनों के बाद सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा जब दफ्तर पहुंचे तो वो एक्शन में दिखे थे। सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव द्वारा किए गए ट्रांसफर ऑर्डर्स को उन्होंने पलट दिया था । लेकिन उनके पद पर बने रहने के मुद्दे पर पैनल कमेटी की मीटिंग बुधवार को हुई थी हालांकि उस वक्त कोई फैसला नहीं हुआ। गुरुवार को एक बार फिर 7 लोक कल्याण मार्ग में सलेक्शन कमेटी की मीटिंग हुई। बता दें कि पैनल में पीएम के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस ए के सीकरी शामिल थे। इस बीच उन्होंने कुछ और अधिकारियों के तबादले किए थे।

फायर सेफ्टी विभाग भेजे गए वर्मा
रिपोर्ट के मुताबिक आलोक वर्मा को फायर सेफ्टी विभाग का DG बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया है कि पैनल की बुधवार को हुई बैठक बेनतीजा रही थी। यह खबर ऐसे समय में आई है जब कुछ देर पहले ही सीबीआई सूत्रों ने जानकारी दी थी कि आलोक वर्मा ने गुरुवार को 5 बड़े अफसरों का ट्रांसफर कर दिया था। आपको बता दें कि सीबीआई के भीतर का विवाद करीब 3 महीने से चल रहा है। सरकार ने करीब दो महीने पहले वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था।

खड़गे ने कहा था, वर्मा को पक्ष रखने का मिले मौका
उच्चस्तरीय समिति की बैठक से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्होंने मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की जांच रिपोर्ट सहित कई दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, ‘मैंने मामले में सीवीसी की जांच रिपोर्ट सहित कुछ दस्तावेज देने के लिए कहा है।’ उन्होंने कहा था कि आलोक वर्मा को भी समिति के सामने उपस्थित होने का मौका मिलना चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए।

सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा औैर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगााए थे जिसके बाद उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था। वर्मा ने बुधवार को दोबारा पदभार संभालते हुए एम नागेश्वर राव द्वारा किए गए ज्यादातर तबादले रद कर दिए थे। राव वर्मा की अनुपस्थिति में अंतरिम सीबीआई प्रमुख नियुक्त किए गए थे।

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