सीबीआई में जंग : आलोक वर्मा ने नये पद पर ज्वाइन करने से किया इनकार, छोड़ी नौकरी…

नई दिल्ली । उच्चाधिकार चयन समिति द्वारा सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने और तबादला किए जाने के अगले ही दिन शुक्रवार को आलोक वर्मा ने सरकार को इस्तीफा भेज दिया है। गुरुवार को वर्मा का तबादला करते हुए उन्हें सिविल डिफेंस, होमगार्ड्स एवं फायर सर्विसेज विभाग का महानिदेशक बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि चयन समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य़ न्यायाधीश व नेता प्रतिपक्ष (मल्लिकार्जुन खड़गे) इसके सदस्य होते हैं। मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि के रूप में जस्टिस एके सिकरी बैठक में शामिल थे। गुरुवार को समिति ने कहा था कि वर्मा के खिलाफ प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार के मामले हैं, इसलिए उन्हें उनके पद पर बनाए रखना न्यायोचित नहीं है। इसमें सिकरी और प्रधानमंत्री ने वर्मा के खिलाफ अपना फैसला सुनाया था।

सूत्रों के मुताबिक

वर्मा अग्निशमन सेवा के महानिदेशक का पद स्वीकार नहीं करना चाह रहे थे। वर्मा ने अपने नए पद पर योगदान करने से मना कर दिया। हालांकि वर्मा आगामी 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले थे। उल्लेखनीय है कि वर्मा 1979 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। सीवीसी की ओर से उनके खिलाफ दी गई रिपोर्ट की बाबत वर्मा ने कहा है कि ये सारे आरोप झूठे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यह एक ही व्यक्ति राकेश अस्थाना की ओर से लगाए गए आरोप हैं। राकेश अस्थाना सीबीआई के विशेष निदेशक हैं। इन दोनों के बीच हुई तकरार के बाद केंद्र सरकार ने दोनों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। बाद में वर्मा इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए। कोर्ट ने उन्हें उनके पद पर मंगलवार को बहाल कर दिया था लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ सीवीसी की रिपोर्ट पर चयन समिति निर्णय लेगी। समिति ने वर्मा को प्रथम दृष्ट्या आरोपित मानते हुए गुरुवार को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया।

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