सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की अहम् शक्तियां केंद्र को सौंपी, केजरीवाल बोले- दुर्भाग्यपूर्ण’ फैसला

नयी दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में उपराज्यपाल बनाम मुख्यमंत्री के अधिकारों के मसले पर गुरुवार को व्यवस्था दी कि राजधानी की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) और जांच आयोग गठन का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा, लेकिन सेवा संबंधी अधिकारों का मसला उसने वृहद पीठ को सौंप दिया। न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की खंडपीठ ने दिल्ली के उपराज्यपाल बनाम मुख्यमंत्री के अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें कुछ मसलों पर दोनों न्यायाधीशों की एक राय थी, लेकिन अधिकारियों के तबादलों और नियुक्तियों (सर्विसेज) को लेकर असहमति के फैसले के कारण इसे तीन-सदस्यीय वृहद पीठ को सौंप दिया गया।

Image result for supreme court केजरीवाल
शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्र के अधीन है और एसीबी का अधिकार भी केंद्र के पास रहेगा। केंद्र को जांच आयोग गठित करने का अधिकार भी होगा।  एसीबी, राजस्व, जांच आयोग और लोक अभियोजक की नियुक्ति के मुद्दे पर पीठ की राय एक थी, लेकिन दोनों न्यायाधीश इस मसले पर बंटे दिखे कि संविधान की सूची-दो की इंट्री 41 के तहत राज्य लोक सेवाओं में नियुक्ति और तबादले का अधिकार किसके पास होगा? न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा कि संयुक्त सचिव और इसके ऊपर के अधिकारियों की नियुक्ति एवं तबादले का अधिकार उपराज्यपाल के पास है, जबकि अन्य अधिकारियों को लेकर दिल्ली सरकार के पास अधिकार है, लेकिन न्यायमूर्ति भूषण ने इस मुद्दे पर असहमति जताते हुए कहा कि यह अधिकार दिल्ली सरकार के पास नहीं है।

बिजली बोर्ड और लोकअभियोजक नियुक्ति का अधिकार दिल्ली सरकार के पास है।  गौरतलब है कि गत वर्ष एक नवम्बर को पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। गत वर्ष चार जुलाई को संविधान पीठ द्वारा दिल्ली बनाम उपराज्यपाल विवाद में सिर्फ संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या की गयी थी। संविधान पीठ ने कहा था कि कानून व्यवस्था, पुलिस और जमीन को छोड़कर उपराज्यपाल स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते।

‘दिल्ली में अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण’
नयी दिल्ली।  दिल्ली में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के अधिकारों को लेकर उच्चतम न्यायालय के गुरुवार को दिए निर्णय से सकते में आयी आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और राजधानी की जनता के प्रति अन्याय करार दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारों को लेकर शीर्ष अदालत के फैसले को बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और राजधानवासियों के साथ अन्याय करार दिया है। उन्होंने फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनी हुई सरकार को अधिकारियों के तबादले का कोई अधिकार नहीं है ऐसे में सरकार कैसे चलेगी?

Image result for supreme court केजरीवाल
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का अधिकार उपराज्यपाल के पास रहने पर सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “40 साल से एसीबी दिल्ली सरकार के पास थी अब नहीं है, अगर कोई भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से करेगा तो उस पर कार्रवाई कैसे होगी?” केजरीवाल ने फैसले के बाद आनन-फानन में बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जिस पार्टी के पास विधानसभा में 70 में से 67 सीटें हों वह अधिकारियों का तबादला नहीं कर सकती, किन्तु ऐसी पार्टी जिसके पास मात्र तीन सीटें हैं वह यह काम कर सकती है। यह कैसा लोकतंत्र और आदेश है? उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग करते हुए कहा कि इस फैसले की समीक्षा के लिए कानूनी राय ली जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “एक-एक फाइल को पास कराने के लिए यदि हमें उपराज्यपाल के पास जाना होगा, तो सरकार काम कैसे करेगी?”

What do you think?

0 points
Upvote Downvote

दिल्ली में नहीं थम रहा आग लगने का सिलसिला, तीसरे दिन आर्चीज फैक्ट्री जलकर राख

MISSION UP : शिवपाल और राजा भैया पर डोरे डाल रही कांग्रेस, क्या है प्रियंका का प्लान ?