जिस बंदूकधारी ने न्यूजीलैंड की मस्जिद में मचाया नरसंहार, वो अमेरिकी राष्ट्रपति को मानता है अपना भगवान !

न्यूजीलैंड में क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में शुक्रवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की जिसमें कम से कम 27 लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य घायल हो गये। गोलीबारी से ठीक पहले नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में प्रवेश कर रहे बंगलादेशी क्रिकेट टीम के सदस्य इस हमले में बाल-बाल बच गये।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जैसिंदा आर्डर्न ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आज के दिन को सबसे काले दिनों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “यह साफ है कि यह न्यूजीलैंड के सबसे काले दिनों में से एक है। आज जो यहां हुआ, वह जघन्य हिंसक घटना है। मेरी संवेदनाएं और मुझे विश्वास है कि पूरे न्यूजीलैंडवासियों की संवेदनाएं हताहतों और उनके परिजनों के साथ हैं।”
इस बीच क्राइस्टचर्च की मेयर लियाने डैलजील ने कहा कि वह गोलीबारी की घटना से इतनी दुखी हैं कि शब्दों में बयां नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, “मैंने कभी भी क्राइस्टचर्च में ऐसी किसी घटना की उम्मीद नहीं की थी। मैंने कभी भी न्यूजीलैंड में ऐसी घटना की कल्पना नहीं की।”
स्थानीय मीडिया ने बताया कि बंदूकधारियों में से एक ने मध्य क्राइस्टचर्च के हेगले पार्क स्थित मस्जिद अल नूर में अचानक गोलीबारी शुरू कर दी जहां बंगलादेशी क्रिकेट टीम के सदस्य पहुंचने ही वाले थे। हमले में क्रिकेट टीम के किसी भी सदस्य को चोट नहीं पहुंची है। सभी सदस्य सुरक्षित हैं। हमले के कारण न्यूजीलैंड और बंगलादेश के बीच शनिवार को शुरू होने वाला तीसरे टेस्ट मैच रद्द हो गया है।

हमले के बाद बंगलादेश के बल्लेबाज तमीम इकबाल ने ट्वीट कर कहा, “पूरी टीम हमले में सुरक्षित बच गयी है। डरावना अनुभव, कृपया हमारे लिए दुआ करें।” अल नूर मस्जिद मध्य क्राइस्टचर्च में डीन एवेन्यू से लगी हुई है।
दूसरा हमला क्राइस्टचर्च के उपनगरीय इलाके की एक मस्जिद में हुआ। पुलिस ने इन हमलों के मामले में कम से कम तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
इससे पहले न्यूजीलैंड हेराल्ड ने एक चश्मदीद के हवाले से बताया कि कम से कम दो बंदूकधारियों ने गोलीबारी की। एक अन्य चश्मदीद इदरीस खैरूद्दीन ने बताया कि उसे गोलियों की आवाज सुनकर पहले लगा कि कहीं निर्माण कार्य चल रहा है या ऐसा ही कुछ लेकिन कुछ ही देर में लोग इधर-उधर भागते और चीख-पुकार मचाते नजर आये। हमले के समय मस्जिद में लगभग 200 लोग मौजूद थे।

पुलिस आयुक्त माइक बुश ने बताया कि एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस पूरी क्षमता के साथ हालात सामान्य करने का प्रयास कर रही है लेकिन स्थिति अब भी बहुत खतरनाक बनी हुई है। मृतकाें की संख्या बढ़ने की आशंका है। पुलिस ने मध्य क्राइस्टचर्च इलाके के सभी लोगों को अगली नोटिस तक अपने घरों में रहने के निर्देश दिये हैं। क्राइस्टचर्च के स्कूलों को भी अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है

इस बीच आपको बताते चेल ब्रिटेन के अखबार दि सन के मुताबिक हमलावर ने अपने मैनिफेस्टो ‘दि ग्रेट रिप्लेसमेंट’ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नए सिरे से श्वेत पहचान और साझा उद्देश्य का प्रतीक बताया है. इस नरसंहार को अंजाम देने की वजह पर उसने लिखा है, ‘आक्रमणकारियों को दिखाना हैं कि हमारी भूमि कभी भी उनकी भूमि नहीं होगी, हमारे घर हमारे अपने हैं और जब तक एक श्वेत व्यक्ति रहेगा, तब तक वे कभी जीत नहीं पाएंगे. ये हमारी भूमि और वे कभी भी हमारे लोगों की जगह नहीं ले पाएंगे. परिभाषा के हिसाब से यह एक आतंकवादी हमला है. लेकिन मेरा मानना है कि यह कब्जे वाली ताकत के खिलाफ एक कार्रवाई है.’

मैनिफेस्टो के मुताबिक

हमलावर खुद को साधारण श्वेत व्यक्ति बता रहा है. जिसका जन्म ऑस्ट्रेलिया के श्रमिक वर्ग में हुआ. उसके परिजन ब्रिटिश मूल के हैं. हमलावर द्वारा लिखे गए 87 पेज के मैनिफेस्टो के मुताबिक वो श्वेत जन्म दर बदलने की बात कर रहा है. उसका कहना है कि अगर कल को सभी गैर-यूरोपीय अप्रवासियों को श्वेत भूमि से बाहर भी निकाल दिया जाए तब भी यूरोपीय लोगों का नाश सुनिश्चित है.

हमलावर का कहना है कि यूरोपीय लोगों की संख्या हर रोज कम होने के साथ वे बूढ़े और कमजोर हो रहे हैं. इसके लिए फर्टिलिटी लेवल 2.06 से बढ़ाना होगा नहीं तो उनका समूल नाश निश्चित है. उसका कहना है कि हमारी फर्टिलिटी रेट कम है, लेकिन बाहर से आए अप्रवासियों की फर्टिलिटी रेट ज्यादा है लिहाजा एक दिन ये लोग श्वेत लोगों से उनकी भूमि छीन लेंगे.

हमलावर के मैनिफेस्टो के मुताबिक उसे नाटो देशों की सेना में तुर्की को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति है. क्योंकि तुर्की विदेश है और मूलत: यूरोप का दुश्मन है. इसके अलावा वो फ्रांस के उदारवादी राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीयतावादी, वैश्विक और श्वेत विरोधी बताता है. हमलावर बताता है कि उसके मन मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली घटना यूरोपीय देशों में हुए आतंकी हमले हैं. जिसके बाद उसने तय कर लिया कि लोकतांत्रिक, राजनीतिक हल के बजाय हिंसक क्रांतिकारी हल ही एकमात्र विकल्प है.

उल्लेखनीय है कि खाड़ी देशों और पश्चिम एशियाई देशों जारी सशस्त्र संघर्ष की वजह से यूरोपीय देशों में अप्रवासी शरणार्थियों की काफी आवक हुई है. हाल के दिनों यूरोपीय देशों में इस बात को लेकर चिंता होने लगी है कि जिस रफ्तार से दुनिया भर के अप्रवासी वहां आकर बस रहे हैं. कुछ दिनों में ऐसी नौबत आ जाएगी कि यहां के मूल निवासी कही अपनी ही धरती पर अल्पसंख्यक न हो जाएं और अप्रवासी लोग बहुसंख्यक हो जाएं.

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