होली के जुलूस की कार्य योजना छोड आयोजकों पर शिकंजा कसने में लगी नगीना पुलिस 

शहजाद अंसारी   
बिजनौर/नगीना। विगत वर्षों में नगीना में होली के त्यौहार पर शरारती तत्वों द्वारा रंग में भंग किये जाने और होली का जुलूस रुक जाने की घटनाओं के बावजूद पुलिस प्रशासन ने सबक नहीं लिया है मात्र शांति समिति की बैठक करके औपचारिकता ही पूरी की जा रही है जो हर थाना स्तर पर आयोजित होती ही है लेकिन नगीना पुलिस के पास नगीना की होली के जुलूस को शांतिपूर्ण निकलवाने की कोई खास कार्य योजना नहीं है।
पुलिस केवल जुलूस के आयोजकों पर ही शिकंजा कसने में लगी है जिससे होली के जुलूस के आयोजक बेमन से पुलिस के साथ हैं और नगर के गणमान्य लोग पुलिस की कार्यशैली के चलते अब ऐसे जुलूसों से किनारा करने में ही अपनी भलाई समझने लगे हैं। शरारती तत्व होली पर क्या गुल खिलाएंगे और पुलिस प्रशासन ऐसे में क्या करेगा इसका जवाब किसी के भी पास नहीं है क्योंकि पुलिस और प्रशासन की अनुभवहीनता का फायदा शरारती तत्व तो उठा जाते है बाद में गणमान्य लोगों की जान सांसत में आ जाती है कई बार अनुभवहीन अधिकारी डंडे का रौब दिखाते हुए जुलूस के हुरियारों से ही भिड़ कर पुलिसिया होली निकलने की ज़िद पकड़ गए जिस कारण शहर का माहौल तो खराब हुआ ही बाद में शरारती तत्वों में बेकसूरों का नाम आने के बाद बाजार बंद और व्यापारियों के आंदोलन के बाद पुलिस के बैकफुट पर आने से पुलिस प्रशासन की भी खासी किरकिरी हुई थी।
वास्तव में शरारती तत्व कौन थे जिन्होंने होली के त्यौहार पर फ़िज़ा में गन्दगी घोलने और शहर का माहौल बिगाड़ने में कामयाब रहे इसका पता लगाने में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी आज तक नाकाम हैं। हालांकि शासन ने आईपीएस सत्यजीत गुप्ता को नगीना कोतवाल बनाकर भेजा तो है पर वह नगीना के शरारती तत्व जो होली के ही दिन तीन घण्टे के लिए सक्रिय होते हैं नकेल कस पाते हैं या पिछली बार के अधिकारियों की तरह घुटने टेकते हैं ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल उनके पास भी आज तक कोई फुलप्रूफ योजना शरारती तत्वों से निबटने की नहीं है।

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