कानपुर जिले में देसी का पौआ सुपरहिट, डिमांड पूरी नहीं कर पा रहीं डिस्टिलरियाँ!

होली पर ढाई से तीन लाख लीटर अधिक शराब गटक जाते हैं कनपुरिये

अभिषेक त्रिपाठी

कानपुर। शहर में जितनी औसत शराब आम दिनों में बिकती है, कनपुरिये होली पर उससे तीन लाख लीटर तक अधिक शराब पी जाते हैं। ये कहना है आबकारी विभाग का। कानपुर नगर जिले में शराब की कुल खपत में देसी दारू का भाग 50 प्रतिशत से कुछ अधिक है। देसी का पौआ सुपरहिट है। होली पर डिमांड का हाल ये है कि डिस्टिलरियाँ देसी क्वाटर की सप्लाई ही पूरी नहीं कर पा रही हैं। यही कारण है कि अधिकृत सील पैक्ड देसी दारू नहीं मिलने पर गांव आदि में लोग दुकानों से नकली या खुली (मिलावटी) शराब लेकर तलब मिटाते हैं।
जिला आबकारी अधिकारी सुदर्शन सिंह ने बताया कि होली पर दो से ढाई लाख लीटर कंट्री मेड वाइन (देसी दारू, सीएल-2) शार्ट है। आबकारी अधिकारी देसी बनाने वाली डिस्टिलरियाँ के मालिकों को फोन कर-कर के डांट-डपट रहे हैं, लेकिन डिस्टिलरी मालिक भी केमिकल और माल उपलब्ध नहीं होने की दुहाई देकर जान बचा रहे हैं। उधर सप्लाई शार्ट होने से सरकार को त्योहार पर राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। जानकारों का कहना है कि यूपी में सप्लाई देने वाली डिस्टिलरियों की कैपिसिटी ब उतनी नहीं, जितनी डिमांड है। देसी पौआ की लोकप्रियता का हाल ये है कि बड़े-बड़े लोग करें रोककर देसी के ठेकों पर पौआ खरीदते दिख जाते हैं।
सोशल वर्कर रोबबय शर्मा कहते हैं कि शराबखोरी बढ़ती जा रही है। उसे पूरा करने में मिलावटखोर भी पीछे नहीं। इसी कारण मिथाइल अल्कोहल, थिनर जैसी शराब की महक वाली ज़हरीली चीजों को मिलाकर गांव, खेड़ा, खेत आदि से खूब बेंचा जा रहा है। अब इसको रोकने में पुलिस का ही अहम रोल है। शराबखोरी बढ़ती जा रही है। उसे पूरा करने में मिलावटखोर भी पीछे नहीं। इसी कारण मिथाइल अल्कोहल, थिनर जैसी शराब की महक वाली ज़हरीली चीजों को मिलाकर गांव, खेड़ा, खेत आदि से खूब बेंचा जा रहा है। अब इसको रोकने में पुलिस का ही अहम रोल है।

ज़रूर पढ़ें .. आबकारी विभाग और पुलिस ने पकड़ी 40 ड्रमों में भरी “खालिस मौत” http://www.dainikbhaskarup.com/2019/03/19/26456/

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