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Friday,19 January 2018
    ....न्यायमूर्तियों! राष्ट्र आपसे ये जानना चाहता है

    ....न्यायमूर्तियों! राष्ट्र आपसे ये जानना चाहता है

    तो यह देश के इतिहास में पहली बार हुआ. ऐसा कि पहली बार न्याय व्यवस्था में बैठे लोग लाचार दिखे. लाचार के साथ सिस्टम की ओर उंगली उठाते हुए भी. एक-एक उंगली इन चार लोगों ने उठाई ज़रूर लेकिन इन चारों ने ध्यान न दिया कि इनकी चार-चार उंगलियां खुद इनकी ओर थीं. खैर, अब सब नंगई पर उतर ही गए हैं तो प्रारम्भिक बात उठती है कि अपने ही चीफ जस्टिस दीपक मिश्र से ये चार ''दुखी आत्माएं'' मीडिया के पहले, व्यवस्था के मुताबिक़ राष्ट्रपति के पास क्यों नहीं गए?

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    तिलक के मन्त्रवत उद्घोष का उत्सव : डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    तिलक के मन्त्रवत उद्घोष का उत्सव : डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    यह संयोग था कि बालगंगाधर तिलक ने यह नारा कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन 1916 में दिया था। इस हिसाब से दो बात ध्यान में आती है। एक यह कि यह उद्घोष लखनऊ में हुआ इसलिए मुख्य समारोह भी यहीं होना चाहिए था।

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    तीन तलाक विधेयक जगाता न्‍याय की उम्‍मीद : डॉ. निवेदिता शर्मा

    तीन तलाक विधेयक जगाता न्‍याय की उम्‍मीद : डॉ. निवेदिता शर्मा

    भारत में जो मुस्‍लिम विद्वान और कानून के जानकार इसके दुष्‍परिणामों को देखकर भी जिस तरह से इसका समर्थन आज भी लगातार कर रहे हैं, उन्‍हें यह जरूर समझना चाहिए कि जब विश्‍व में कट्टरता के प्रतीक बन चुके पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 22 मुस्लिम देशों ने पूरी तरह से इस प्रथा को खत्म कर दिया है,

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    तीन तलाक के ताबूत में लोकसभा की अंतिम कील

    तीन तलाक के ताबूत में लोकसभा की अंतिम कील

    इसे मुस्लिम महिलाओं की सबसे बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। मुस्लिम महिलाओं ने तहेदिल से इस बिल का इस्तकबाल किया है।

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    अलकायदा की धमकी के बीच भारत का दायित्व

    अलकायदा की धमकी के बीच भारत का दायित्व

    भारत को अस्थिर करने के प्रयास सदियों से होते रहे हैं। जब पाकिस्तान का जन्म भी नहीं हुआ था और वह भारत का ही अंग था तब भी भारत पर आसुरी शक्तियों के हमले होते रहे।

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    हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का गवाह बन सकता है प्रयाग

    हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का गवाह बन सकता है प्रयाग

    गौ, गंगा, गायत्री भारत की मजबूती का आधार रही हैं। इस आधार को यहां के लोग कभी छोड़ना नहीं चाहेंगे। इस देश के तीर्थ और संत जनजागृति के आधार स्तंभ रहे हैं। भ्रष्ट आचरण वाले कुछ आडंबरप्रिय कालनेमियों की वजह से साधु-समाज और भारतीय आस्था को चोट पहुंची है।

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    शीशे में पाकिस्तान का बदरंग चेहरा : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

    शीशे में पाकिस्तान का बदरंग चेहरा : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

    पाकिस्तानी मीडिया इस पर अट्टाहास कर रहा था। बेमानी और शरारत भरे सवाल कर रहा था। जो सवाल उसको अजहर मसूद सहित असंख्य इस्लामी आतंवादियों से पूछने चाहिए थे ,

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    चिकित्सकों की हड़ताल पर उठते सवाल

    चिकित्सकों की हड़ताल पर उठते सवाल

    जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, अजमेर जैसे राज्य के बड़े अस्पतालों में भी जहां 4-5 हजार ऑपरेशन रोज होते थे, वहां अब मुश्किल से 15-20 ऑपरेशन ही हो रहे हैं। गंभीर रोगों से पीड़ित लोग इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने को मजबूर हैं। राज्य में स्वास्थ्य सेवा सुचारू रखने के लिए सेना, बीएसएफ और रेलवे के डॉक्टरों की मदद ली जा रही है।

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    योगी को कुर्सी नहीं, दायित्व प्रिय

    इस तरह की वारदात दोबारा न हो, यह सुनिश्चित करना-कराना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी है। वे देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के शलाका पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर 25 दिसंबर को नोएडा के बॉटनिकल गार्डन से दक्षिण दिल्ली के कालिका जी मंदिर तक दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन के उद्घाटन अवसर पर शिरकत करेंगे। यह मेट्रो चालक रहित होगी। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना है।

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    नए साल के जश्न पर भी मजहब का साया

    नए साल के जश्न पर भी मजहब का साया

    इसकी वजह यह है कि नए साल के जश्न पर भी मजहब की संकीर्ण छाया पड़ने लगी है। मुस्लिमों की बड़ी शैक्षणिक संस्था दारूल उलूम देवबंद ने नए साल के जश्न को ही नाजायज ठहरा दिया है।

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    यूपीकोका का विरोध या अपराध का समर्थन

    यूपीकोका का विरोध या अपराध का समर्थन

    जरूरत पड़े तो अपराधी के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई करे। राज्य सरकार के दायित्वों में यह बात भी शामिल है कि राज्य में अमन-चैन और भाईचारे का वातावरण बने।

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    भारतीय जनमानस की नब्ज को समझें राहुल

    भारतीय जनमानस की नब्ज को समझें राहुल

    उसके आगे जातिवाद क्षेत्रवाद सारे फैक्टर आउट हो चुके हैं। वास्तव में भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात का जो विकास किया है उसी की बदौलत नरेंद्र मोदी आज प्रधानमंत्री हैं।

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    विश्वविद्यालयों की भूमिका और दायित्वबोध पर सवाल

    विश्वविद्यालयों की भूमिका और दायित्वबोध पर सवाल

    नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय बनाना आज भी भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। आज देश के कुछ बड़े विश्वविद्यालय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देशविरोधी आचरण का भी समर्थन करते नजर आते हैं। इस तरह के हालात श्लाघनीय अर्थात प्रशांसा योग्य तो नहीं ही कहे जा सकते।

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    गुजरात के साथ कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का निहितार्थ : डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    गुजरात के साथ कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का निहितार्थ : डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    कांग्रेस को अपने से ज्यादा जातिवादी युवा नेता हार्दिक पटेल,अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश पर था।

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    औद्योगिक निवेश के लिए योगी सरकार का रोड शो : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    औद्योगिक निवेश के लिए योगी सरकार का रोड शो : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    भौतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि से वह फिर मालामाल होगा। भारत ने समृद्धि की भी लेकिन क्रांतिकारियों का सपना आज तक पूरा नहीं हो सका। आर्थिक और सामाजिक असमानत जिस तेजी के साथ बढ़ी, उसे नकारा नहीं जा सकता।

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    प्रसंगवश/आर.के.सिन्हा....आतंकियों-अपराधियों से क्यों ना हो सख्ती

    प्रसंगवश/आर.के.सिन्हा....आतंकियों-अपराधियों से क्यों ना हो सख्ती

    इनके उत्तर देश के पुलिस महकमों को खोजने होंगे। यह कोई नहीं कह रहा है कि हमारे यहां पुलिस की कार्यशैली में सुधार नहीं हुए। लेकिन, यह भी कोई स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होगा कि पुलिस की कार्यशैली में सुधार की कोई गुंजाइश ही नहीं बची है।

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    कांग्रेसः नई चमक को वजूद की तलाश!  : डॉ. प्रभात ओझा

    कांग्रेसः नई चमक को वजूद की तलाश! : डॉ. प्रभात ओझा

    तो परपंरा के नाम पर बराबर पलटी खाती पार्टी, कार्यकर्ताओं के नैराश्य के साथ नेतृत्व के बीच आपसी संघर्ष के हाल से कैसे निकलेगी, यह विचारणीय प्रश्न है।

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    कांग्रेस पार्टी के 132 साल का सफर : संजय तिवारी

    कांग्रेस पार्टी के 132 साल का सफर : संजय तिवारी

    गुलाम भारत में जब रिटायर्ड ब्रिटिश अधिकारी एलन ओक्टावियन ह्यूम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन किया तो यह करोड़ों भारतीयों के लिए अंग्रेजों से आजादी की मांग के मुखपत्र की तरह थी।

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    प्रसंगवश/आर.के. सिन्हा... घूमें राहुल-प्रियंका और खर्च उठायें करदाता ?

    प्रसंगवश/आर.के. सिन्हा... घूमें राहुल-प्रियंका और खर्च उठायें करदाता ?

    तो क्या उन्हें भी दे दी जाए एसपीजी सुरक्षा? सरकार को राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा को एसपीजी कवर देने के सम्बंध में फिर से विचार करने की और एस.पी.जी. एक्ट में आमूलचूल सुधार की सख्त और तत्काल आवश्यकता है।

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    अन्ना हजारे फिर करेंगे आंदोलन : सुधांशु द्विवेदी

    अन्ना हजारे फिर करेंगे आंदोलन : सुधांशु द्विवेदी

    लेकिन अन्ना हजारे के बारे में अगर कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगा कि केन्द्र में यूपीए सरकार के सत्ता से बाहर होने एवं केन्द्र की सत्ता में भाजपा के आने के बाद अन्ना का आंदोलन ध्वस्त सा हो गया है।

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    सच्चे किसान हितैषी थे शीशराम ओला : रमेश सर्राफ धमोरा

    सच्चे किसान हितैषी थे शीशराम ओला : रमेश सर्राफ धमोरा

    समाज में महिलाओं की दशा सुधारने का संकल्प कर ओला ने सेना से त्यागपत्र देकर समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखा।

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    आधुनिकता के नाम पर झारखंड में अश्लीलता : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    आधुनिकता के नाम पर झारखंड में अश्लीलता : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    झामुमो के लिट्टीपाड़ा विधायक साइमन मरांडी ने प्रेम के उन्मुक्त प्रदर्शन की जो रणनीति अख्तियार की है, उसकी जितनी भी आलोचना की जाए, कम है।

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    राजमार्ग और निवेश का नया अध्याय : डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    राजमार्ग और निवेश का नया अध्याय : डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    योगी ने इस परिस्थिति में बदलाव किया है। सिंगल विंडो सिस्टम, ई टेंडरिंग ,मूलभूत सुविधाओं में वृद्धि से स्थिति बदल रही है। योगी और उनके सहयोगी इसके लिए एक साथ कई मोर्चों पर कार्य कर रहे हैं।

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    अय्यर के बयान से कांग्रेस की फजीहत : सुरेश हिन्दुस्थानी

    अय्यर के बयान से कांग्रेस की फजीहत : सुरेश हिन्दुस्थानी

    कांग्रेस नेता के रूप में अपनी लम्बी राजनीतिक पारी खेलने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर को आखिरकार कांग्रेस ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।

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    अयोध्या: तथ्य, तारीखें, हाशिम अली का बयान और मुस्लिमों का रुख : प्रवीण गुगनानी

    अयोध्या: तथ्य, तारीखें, हाशिम अली का बयान और मुस्लिमों का रुख : प्रवीण गुगनानी

    आज ऐसा लगता है कि श्री राम जन्मभूमि के निर्माण का नया अध्याय हाशिम अली के उस बयान से ही प्रारम्भ होना चाहिये। रामजन्म भूमि की सांस्कृतिक परिधि में कोई भी मस्जिद नहीं होना चाहिए व जन्मभूमि स्थान पर मंदिर के अतिरिक्त कुछ और बनाने के प्रयासों व प्रस्तावों को सिरे से नकार दिया जाना चाहिये।

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    उ.प्र. के चुनाव परिणाम 'नियत की बरक्कत' : राजनाथ सिंह ‘सूर्य’

    उ.प्र. के चुनाव परिणाम 'नियत की बरक्कत' : राजनाथ सिंह ‘सूर्य’

    राजनीति न तो खानदानी व्यवसाय की तरह उत्तराधिकार क्षेत्र है और न अक्रांता के समान लूट खसोट का क्षेत्र, न ही सेवा के बदले प्राप्त करने की भावना एक याचना के लिए बना भिक्षाटन। सेवा निस्वार्थ होती है। सत्ता सेवा के लिए है।

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    कांग्रेस की विरासत और राहुल गांधी : सुरेश हिन्दुस्थानी

    कांग्रेस की विरासत और राहुल गांधी : सुरेश हिन्दुस्थानी

    देश की राजनीति में कई बार पराजय का सामना करने वाले राहुल गांधी को कांग्रेस का विरासती उत्तराधिकार मिलने वाला है।

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    शादी में बर्बादी रोकने को बिहार तैयार : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    शादी में बर्बादी रोकने को बिहार तैयार : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    बिहार के पास बुद्धि और विचार की प्रभूत क्षमता है, इसके बाद भी विकास के मायने में उसका पिछड़ापन बौद्धिक तबके को सोच-विचार के लिए बाध्य करता है।

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    महिलाओं के उत्थान के लिए उद्यमिता सम्मेलन : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    महिलाओं के उत्थान के लिए उद्यमिता सम्मेलन : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    ऐसी महिला जो अमेरिका के प्रथम नागरिक की बेटी भी है और सलाहकार भी है। जिस सम्मेलन में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं मौजूद हों, उस सम्मेलन की विशेषता सहज ही स्थापित हो जाती है।

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    गुजरात चुनाव के बदलते विमर्श

    गुजरात चुनाव के बदलते विमर्श

    बताने का सबब यह कि कांग्रेस अपने पुराने राजनीतिक कौशल अर्थात जातिवाद आधारित अंकगणित पर निर्भर रही है। भाजपा अब भी समुदायों को संप्रेषित कर रही है, लेकिन बूथ स्तर पर लोग छोटे-छोटे समूहों में हर द्वारा दस्तक को अपना रहे हैं। यह कांग्रेसी गणित की काट है। लेकिन भाजपा भी इस पूरे चुनाव को केवल विकास और राज्य की प्रगति तक नियंत्रित नहीं कर सकी। शायद इसकी वजह कांग्रेस की ढाई घरी चालें हों।

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    विदेश नीति पर बेतुकी टिप्पणी : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

    विदेश नीति पर बेतुकी टिप्पणी : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

    अमेरिका में कांग्रेस के उस निर्णय की आलोचना हो रही है, जिसमें पाकिस्तान को सहायता के लिए लगाई गई शर्ते शिथिल की गई। वैसे वहां के सत्ताधारी और विपक्ष दोनों ने उसकी रिहाई को अनुचित कहा है।

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    एक सफलता, अनेक विवाद में बीते पांच बरस

    एक सफलता, अनेक विवाद में बीते पांच बरस

    गुजरात को लेकर भी इसी तरह का भ्रम बना रहा और अंत में 33 विधानसभा क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ रही है। यह और बात है कि एक भी सीट पर उसका प्रत्याशी जीत नहीं पा रहा। कपिल मिश्रा ने पांच बरस होने पर लिखा ‘आम आदमी पार्टी से लेकर चार आदमी पार्टी तक आ गए’ ये पांच बरस आत्ममंथन और मूल्यांकन के वर्ष होने चाहिए, लेकिन पार्टी उत्सव में लगी है।

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    शहरों में समान सोच की सरकार बनाना ही योगी-लक्ष्य : सियाराम पांडेय ‘शांत ’

    शहरों में समान सोच की सरकार बनाना ही योगी-लक्ष्य : सियाराम पांडेय ‘शांत ’

    उसका मानना है कि ग्राम प्रधान से लेकर पार्षद तक, महापौर, नगर पंचायत अध्यक्ष जैसे पदों पर राष्टवादी सोच का आदमी बैठना चाहिए, तभी विकास के रथ को आगे ले जाया सकता है। एक भी ठीया कमजोर होने का मतलब है विकास चक्र का टूट जाना और यह राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी भूल होगी।

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    तो क्या पुतिन को मिले हुए हैं विशेषाधिकार

    तो क्या पुतिन को मिले हुए हैं विशेषाधिकार

    यूक्रेन के हस्तक्षेप के बाद से उसे दूसरी जगहों पर भी रूसी दखलंदाजी की चिंता व्यथित किए है। उसे लगता है कि रूस आज नहीं तो कल बाल्टिक राज्यों में भी हस्तक्षेप कर सकता है। इसलिए पश्चिमी मीडिया लगातार पुतिन की मुखालफत कर रहा है और बढ़ा-चढ़ाकर चीजों का वर्णन कर रहा है। कहा जा रहा है कि पुतिन ने देश में स्थिरता, परंपरा और कट्टरपंथी धर्म के नाम पर अनेक समूहों और उदारवादी संगठनों को कुचलकर रख दिया। जिनके साथ ज्यादतियां हुई, उनमें अनेक एनजीओ भी शामिल हैं।

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    असली और नकली संत फिर सुर्खियों में : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    असली और नकली संत फिर सुर्खियों में : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    यह देश के श्रद्धालु समाज पर उसका बड़ा उपकार भी होगा। लोग पाखंडी असंतों के जाल में फंसने से बचेंगे। इससे बड़ी उपलब्धि भला और क्या होगी?

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    शीतकालीन सत्र का विवाद

    शीतकालीन सत्र का विवाद

    क्यों एक छोटे और गरीब परिवार का आदमी, जिसे गांधी अंतिम आदमी कहते हैं, उसके लिए अवसर न हों और अवसर हों तो ऐसे लोग उसे अयोग्य घोषित करने में लगे रहते हैं। यह अयोग्यता आपकी मानसिकता में है, कदाचित उनके व्यक्तित्व में नहीं। इसलिए कि आप अंग्रेजी की ‘ब्लू ब्लड’ अवधारणा में विश्वास करते हैं। आपके मन में जातिवादिता का नासूर पनप रहा है। वरना इस तरह की भाषिक हिंसा का इस्तेमाल पहले कभी नहीं हुआ। कांग्रेस जैसी पार्टी से यह उम्मीद नहीं है।

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    राहुल की कप्तानी मतलब कांग्रेस का सफाया  : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    राहुल की कप्तानी मतलब कांग्रेस का सफाया : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    पूर्व के दुखद वृत्तों को भूलकर कोई राहुल गांधी का प्रतिद्वंद्वी बनने और बहुत बेआबरू होकर कांग्रेस से बाहर जाने की हिमाकत क्यों करेगा? जल में रहकर मगर से वैर करने का वैसे भी कोई सिद्धांत नहीं है। जो अगर खुशामद से आमद होती हो, बात बनती हो तो मुलाखफत करना कहां की बुद्धिमानी है?

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    फिल्म ‘पद्मावती’ में जनभावनाओं से अनुचित खिलवाड़ : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    फिल्म ‘पद्मावती’ में जनभावनाओं से अनुचित खिलवाड़ : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    भारतीय राजाओं का गौरवशाली इतिहास रहा है। राजाओं के बीच मतभेद भले ही अंग्रेजों और मुगलों से उनकी पराजय की वजह बना हो, लेकिन अपने राज्य की रक्षा में गर्दन काटने और कटाने में उन्होंने कभी संकोच नहीं किया।

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    राहुल गांधी की ताजपोशी

    राहुल गांधी की ताजपोशी

    महज आंकड़ों के जालों में उलझकर कांग्रेस अपना बचा-खुचा अस्तित्व भी संकट में डाल देगी। कोई भी पार्टी पूरी दुनिया में जहां भी लोकतंत्र है, दो अनिवार्य स्थितियों पर अवलंबित होती है। पहला पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र और दूसरा जन-संवाद। कांग्रेस में दोनों को ही हाशिए पर डाल दिया गया है। संवाद की सिद्धि संप्रेषणीयता में होती है। आप भले सही हों, लेकिन आपका सही लगना भी उतना ही जरूरी है।

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    ‘पद्मावती’ विवाद के पीछे कौन?

    ‘पद्मावती’ विवाद के पीछे कौन?

    यदि ऐसा कुछ फिल्म में नहीं है तो उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए, जो नहीं किया जा रहा। कोशिश सिर्फ इतनी है कि फिल्म जैसी भी है, उसे स-समय रिलीज हो जाना चाहिए। मगर याद रखा जाना चाहिए कि भारतीय मिथक हो या इतिहास के पात्र किसी के साथ भी लिबर्टी की इजाजत इस देश का समाज नहीं देता।

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    योगी-बिल गेट्स में 45 मिनट बात, द्रुत गति से होगा विकास : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    योगी-बिल गेट्स में 45 मिनट बात, द्रुत गति से होगा विकास : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    वे किस हद तक सरकार की सहायता कर सकते हैं। उनका सहयोग सशर्त होगा या बिना शर्त का, यह सब तय हो गया। इसे किसी उपलब्धि से कम नहीं माना जाना चाहिए।

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    ‘पप्पू’ कहने न कहने से क्या फर्क पड़ेगा

    ‘पप्पू’ कहने न कहने से क्या फर्क पड़ेगा

    लिहाजा, मुठ्ठीभर लोगों की भीड़ से यह गुमां करना कि वे कांग्रेस के खातेदार हैं, बचकाना खयाल है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल पिछले दिनों इस सवाल में उलझ गए थे कि कांग्रेस कैसे एक-दूसरे से स्पर्धा करती मांगों को हल करेगी। वह किन्हें पुटियाएगी और किन्हें छोड़ देगी? इस पर उन्होंने कहा था कि सरकार बन जाए फिर देखेंगे।

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    योगी के सपने और साफगोई

    योगी के सपने और साफगोई

    भले लोगों को यदि वाकई किसानों की चिंता थी, तो उनके लिए किया क्या? बिजली की समस्या से जूझ रहे प्रदेश के लिए कुछ नहीं हुआ, बेरोजगार युवाओं के लिए कुछ नहीं हुआ और इसके बाद भी दावा यह कि हमारे कामों को यूपी जानता है।

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    राम के धाम से योगी की चुनाव प्रचार यात्रा : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    राम के धाम से योगी की चुनाव प्रचार यात्रा : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    इस पर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए लेकिन बतौर मुख्यमंत्री जब वे यह कहते हैं कि राम के बिना इस देश में कोई काम नहीं हो सकता तो वे बहुत बड़े आध्यात्मिक रहस्य का उद्घाटन कर रहे होते हैं लेकिन इस पर कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है।

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    नहीं ‘मामा’ ऐसे नहीं चलेगा, हार तो हार है!

    नहीं ‘मामा’ ऐसे नहीं चलेगा, हार तो हार है!

    क्या किसान सचमुच शिवराज सिंह चौहान की सरकार से नाराज हैं? उन्हें अपनी उपज का वाजिब मूल्य नहीं मिल रहा। उनके साथ सरकार के कारिंदों ने ज्यादती की और आंदोलन को उत्पात बता दिया। व्यापमं घोटाले में हुई मौतों पर कोई साफ बात निकलकर नहीं आई। टीकमगढ़ में ओस चाटकर अपनी भूख-प्यास मिटाती स्त्री की तस्वीर उजागर हुई, तो कहा गया इसका कोई संबंध भुखमरी से नहीं है।

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    संघर्ष की अनेक दास्तां का नाम मैरिकाम

    संघर्ष की अनेक दास्तां का नाम मैरिकाम

    मैरिकाम की विजय के उपलक्ष्य में इठलाने और प्रशस्तियां पढ़ने का समय तो यह है ही, लेकिन यह समय की जरूरत है कि हम और-और मेरिकाम बनने के अवसर पैदा कर सकें। कर सकें कुछ ऐसा कि स्त्री अपनी अपेक्षा में पूर्णता को उपलब्ध हो सके।

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    स्माॅग के आगोश में उलझी पड़ी है जिंदगी : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    स्माॅग के आगोश में उलझी पड़ी है जिंदगी : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा देने भर से स्माॅग की समस्या का समाधान तो होने से रहा। वायु प्रदूषण के कारणों की तह में न केवल जाना होगा बल्कि ईमानदारी के साथ उन कारणों को दूर भी करना होगा। एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ देने मात्र से समस्या का हल होना होता तो यह समस्या कब की दूर हो गई होती।

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    दिल्ली में मौसम का बदला मन-मिजाज

    दिल्ली में मौसम का बदला मन-मिजाज

    इसलिए ऐसा लगता नहीं कि इनमें से किसी एक को इसकी जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए, क्योंकि जंग तो सभी की है। यह प्रदूषण से जंग है। यह पूरी दिल्ली की जंग है। इसलिए सभी को शामिल करना चाहिए। जहां तक पराली का मामला है, इसे संबंधित राज्य सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर देखना चाहिए। दिल्ली के लिए तो कम से कम दिल्ली सरकार की जवाबदेही तय हो। उससे पूछा जाना चाहिए कि सालों-साल बनती रहीं प्रदूषण नियंत्रण की योजनाओं का क्या हुआ।

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    स्मार्ट शहर के साथ स्मार्ट गांव का होना जरूरी : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

    स्मार्ट शहर के साथ स्मार्ट गांव का होना जरूरी : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

    प्राचीन काल से लेकर आज तक कि विकास यात्रा इसकी दास्तान है। सभ्यताएं बनीं। समय के साथ कई सभ्यताएं अपना अस्तित्व बचाने के विफल रहीं। कुछ आज भी कायम हैं।

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    स्वास्थ्य कब होगा हमारे सरोकारों में शुमार

    स्वास्थ्य कब होगा हमारे सरोकारों में शुमार

    ऐसे में स्वास्थ्य का अभिप्राय हमारे देश में निरोगी काया के रूप में नहीं सिर्फ बीमार न होने से है। यदि व्यक्ति चल-फिर रहा है तो सहज रूप में घर से बाहर तक लोग उसे स्वस्थ समझते हैं। फिर महिलाओं की हालत तो और भी ज्यादा खराब है।

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    विमुद्रीकरण के एक साल बाद भी स्याह को सफेद न कर पाने का मलाल : सियाराम पांडेय‘शांत’

    विमुद्रीकरण के एक साल बाद भी स्याह को सफेद न कर पाने का मलाल : सियाराम पांडेय‘शांत’

    जाहिर तौर पर इससे काला धन पर अंकुश लगाने में सरकार को मदद मिली। लोगों का घर में रखा पैसा बैंकों में आ गया। इससे आर्थिक ठहराव के दौर से गुजर रहे बैंकों को नई संजीवनी मिली।

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    गौरक्षा-सात नवम्बर 1966 की काली यादें : बृजनन्दन यादव

    गौरक्षा-सात नवम्बर 1966 की काली यादें : बृजनन्दन यादव

    11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की हत्या के बाद कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में इंदिरा गाँधी का चुनाव जीतना मुश्किल था।

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    सियासत की यह तर्ज बदलिए!

    सियासत की यह तर्ज बदलिए!

    कृष्णा सोबती ने अपनी रचनाओं में लेखन, भाषा और शिल्प की तमाम खोखलों को तोड़ा है। वे किसी ब्रेकेट में बंधकर नहीं लिखतीं, इसलिए पुनरुक्त भी नहीं होतीं। इनकी पहली कहानी 1950 ‘लामा’ नाम से प्रकाशित हुई और 1967 में स्त्री यौनिकता को प्रमुखता से रेखांकित करती कृति ‘मित्रो मरजानी’ साया हुई।

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    खुद पर यकीन से निश्चित हो जाती है सफलता : सोनाक्षी वर्मा

    खुद पर यकीन से निश्चित हो जाती है सफलता : सोनाक्षी वर्मा

    इन्हे गोल्ड मेडल भी मिला। इसके अलावा वह राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा नेट में एक बार सफल रहीं हैं। यूपीपीएस जे 2014 और 2016 में सफलता हासिल की।

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    खिचड़ी पर सीजती राजनीतिक खिचड़ी

    खिचड़ी पर सीजती राजनीतिक खिचड़ी

    कर भी दें तो क्या पहाड़ टूट जाएगा? वैसे ऐसा होने नहीं जा रहा। यह सिर्फ खिचड़ी को एक बड़े फलक पर पहचान दिलाने की छोटी सी भारतीय कोशिश है। राजनीति की अंगीठी से बहुत दूर! मगर फिर भी भाई लोग पका रहे हैं, बिन आंच राजनीतिक खिचड़ी

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    दागी नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट!

    दागी नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट!

    इसी की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट की बात कही। यदि यह फैसला हो जाता है, तो बाहुबलियों के दिन समझो लद गए। जिस तरह कुछेक बाहुबलियों ने चुनाव लड़ा, वह भारतीय लोकतंत्र की शर्मनाक तस्वीर पेश करता है। इसे लेकर ही चुनाव आयोग ने सजायाफ्ता सांसदों-विधायकों के चुनाव लड़ने पर आजीवन बंदिश लगाने की वकालत की है।

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    दहशत के मंजर के बाद कार्रवाई की दरकार  : रमेश ठाकुर

    दहशत के मंजर के बाद कार्रवाई की दरकार : रमेश ठाकुर

    जब आग के गोले फटकर नीचे गिरे तो भंयकर हादसे में तब्दील हो गए। घटना की मुख्य जगह पर एनडीआरएफ की टीम राहत-बचाव में जुट रही।

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    लेख-धर्म परिवर्तन की धमकी में कितना दम : केपी सिंह

    लेख-धर्म परिवर्तन की धमकी में कितना दम : केपी सिंह

    क्योंकि बाबा साहब अंबेडकर अपने जीवन के अन्तिम समय में न केवल स्वयं बौद्ध हो गए थे बल्कि सभी दलितों को सामाजिक गुलामी से मुक्ति के लिए इसी रास्ते पर आगे बढ़ने को निर्देशित भी कर गए थे।

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    प्रतिध्रुवीकरण जातिवादिता नहीं

    प्रतिध्रुवीकरण जातिवादिता नहीं

    ऐसे में कांग्रेस क्या उत्तर देगी? कैसे देगी? यदि वह हार्दिक को संतुष्ट नहीं कर पाती, तो पाटीदार कांग्रेस के विरोध में खड़े हो जाएंगे। स्वाभाविक रूप से वह स्थिति भाजपा के पक्ष में होगी। ओबीसी का वोट बैंक भी अर्से से भाजपा के साथ है। इसलिए गुजरात चुनाव धीरे-धीरे भाजपा के पाले में जाने लगा है।

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    मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों का होनेवाला राज्य-स्तरीय सम्मेलन ? : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों का होनेवाला राज्य-स्तरीय सम्मेलन ? : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    किंतु जिस तरह की चिंताएं लघु उद्योग के सामने जीएसटी की जटिलता और राज्य में अब तक सिंगल विंडो सिस्टम पूरी तरह खड़ा न होने से बनी हुई हैं, ऐसे में क्या यह संभव है कि सरकार अपने जिन उद्देश्यों को लेकर यह आयोजन कर रही है वह सफल हो सकेगा ?

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    ताजमहल पर किल-किल की वजह

    ताजमहल पर किल-किल की वजह

    आजाद भारत ने ताजमहल को भी पर्यटन स्थल माना है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताजमहल को अजूबा भी माना गया है, तो इस पर रोज बहस करने से कोई फायदा नहीं है, क्योंकि नाराजगी अगर इस बात से है कि यह मुगलों द्वारा स्थापित है, तो नाराजगी इस बारे में क्यों नहीं कि आप कुछ क्यों नहीं कर पाए। स्वाभाविक है कि आप आज उपस्थित हैं और मुगल कभी आए थे।

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    गुजरात में जाति के चक्रव्यूह में उलझी कांगेस : प्रमोद भार्गव

    गुजरात में जाति के चक्रव्यूह में उलझी कांगेस : प्रमोद भार्गव

    हालांकि इन तीनों नेताओं की जज्बाती मुद्दों को लेकर जो राजनीतिक हैसियत अपने-अपने जातीय समूहों में बनी है, वे परस्पर विरोधाभासी हैं। ऐसे में ये नेता कांग्रेस में रहते हुए अपने मुद्दों को कैसे नीतिगत आधार दे पाएंगे, यह विचारणीय पहलू है।

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    ताजमहल सांस्कृतिक धरोहर क्यों नहीं? :  राजनाथ सिंह ''सूर्य''

    ताजमहल सांस्कृतिक धरोहर क्यों नहीं? : राजनाथ सिंह ''सूर्य''

    न्यायालय से निपटारा न होने पर कानून बनाने की बात आती है, जिसके लिए संसद में बहुमत चाहिए। यह बात जब भाजपा द्वारा कही जाती है तो आरोप लगाया जाता है कि वह राम मंदिर बनवाने के अपने वादे से मुकर रही है।

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    शिंजो आबे की जीत का सबब

    शिंजो आबे की जीत का सबब

    वैसे इससे पहले भी शिंजो मध्यावधि चुनाव कराकर विजयी हो चुके हैं। इस चुनाव की घोषणा के साथ ही यह लगभग तय था कि शिंजो आबे की एलडीपी निश्चित रूप से विजयी होगी। इसकी एक वजह यह भी थी कि विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के विघटन से ही अस्तित्व में आए। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह विजय शिंजो आबे के राष्ट्रवादी अभियान की विजय है।

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    प्रदूषण से बढ़ती मौतें : प्रमोद भार्गव

    प्रदूषण से बढ़ती मौतें : प्रमोद भार्गव

    हालांकि इन रिपोर्टों के आंकड़े कितने विश्वसनीय हैं, एकाएक कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि एक ही समय विरोधाभासी रिपोर्टें भी आई हैं।

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    मुकुल राय का भाजपा के करीब आना

    मुकुल राय का भाजपा के करीब आना

    यह एक खराब संकेत है। जमीन से जुड़े लोग जब साइड लाइन हो जाते हैं, तो दल भी दरकिनार हो जाते हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से जब आप किसी भी बड़े दल को देखते हैं तो उसके गलनांक की मुख्य वजह यही होती है कि वे अपने भाववोध से गहरे जुड़े जमीनी लोगों को एक तरफ करने में लग जाते हैं। यह किसी भी दल की शोकांतिका लिखे जाने का संकेत है।

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    राजनीति में सयाना हो रहा है ‘पप्पू’

    राजनीति में सयाना हो रहा है ‘पप्पू’

    इसलिए भाजपा को जातिगत गणित से बा-खबर रहना होगा। फिलहाल इसमें बाजी कांग्रेस के हाथ लगी है। उसकी जातिगत चौसर अभी तक तो दमदार है। इसकी काट सोशल मीडिया नहीं जमीनी स्तर पर खोजनी होगी। वैसे यह सिर्फ चुनावी शुरुआत की फिजां है, अभी तो पर्याप्त गुंजाइश बकाया है।

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    सृष्टि रक्षा का महापर्व है छठ : आमोदकान्त

    सृष्टि रक्षा का महापर्व है छठ : आमोदकान्त

    उनके तेज और सृष्टि में कन्याओं की उपयोगिता को सिद्ध किया। पुत्र कामना को पूरा करने को षष्ठी रूपी कन्याओं की पूजा करनी होगी। इसलिए यह कन्या रूपी देवी का पर्व है।

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    भैया दूज पर बहनों का शाप भी बन जाता है आशीर्वाद : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    भैया दूज पर बहनों का शाप भी बन जाता है आशीर्वाद : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    अमंगल कामना भी उसकी की जाती है जिससे विशेष नफरत हो लेकिन बहनें तो अपने भाई पर जान छिड़कती हैं। उसके लिए तो वह अपनी जान देने तक को सन्नद्ध रहती हैं। ऐसे में वह उसके अमंगल की कामना कर भी कैसे सकती है? लेकिन यह सच है। प्रेम करने वाला शाप भी दे तो उसकी अंतरात्मा से आशीर्वाद ही निकलता है।

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    दादा प्रणब मुखर्जी की कांग्रेस को सलाह

    दादा प्रणब मुखर्जी की कांग्रेस को सलाह

    उन्होंने भविष्यवाणी भी की कि वह एक बार फिर उभरकर आएगी। वैसे इस बात में कोई शक नहीं कि कांग्रेस टूटकर-बिखरकर फिर-फिर खड़ी होती रही है। उसने इस देश को राजनीतिक क्षितिज दिया है, लेकिन प्रणब दा का भरोसा उनके अपने निजी यकीन की देन ज्यादा लगता है।

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    विनोद खन्ना की सीट पर शिकस्त के कारण

    विनोद खन्ना की सीट पर शिकस्त के कारण

    वैसे यह सीट भाजपा के खाते की थी, जिसपर विनोद खन्ना जीतते रहे थे। इसलिए हार का जिम्मा शिअद का इतना नहीं है, जितना भाजपा का। इसमें कोई संदेह नहीं कि इस उप-चुनाव में भाजपा के नेता केंद्र की नीतियों के सकारात्मक पक्ष को यहां समझने में असमर्थ रहे।

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    अष्ट सिद्धियों की रात है दीपावली

    अष्ट सिद्धियों की रात है दीपावली

    दीपावली स्वच्छता का पर्व है। दीपावली हर साल आती है। लोग इस दिन लक्ष्मी की आराधना भी करते हैं लेकिन इसके बाद भी बहुतों की दरिद्रता कम नहीं होती तो इसका मतलब यह है कि लक्ष्मी व्यक्ति की कर्मठता, ईमानदारी, बहादुरी और जिम्मेदारी से आती है। लक्ष्मी के सहस्त्र रूप हैं।

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    विनोद खन्ना की सीट पर शिकस्त के कारण

    विनोद खन्ना की सीट पर शिकस्त के कारण

    फिर भी आलोचक इतना तो कहेंगे ही कि इससे साफ हो रहा है कि भाजपा को पसंद करने वालों की तादाद घट रही है। ऐसा हो या न हो, कहा तो यही जा रहा है। वे तो विभिन्न विश्वविद्यालयों में हुई एबीवीपी की पराजय को भी सीधे भाजपा से और लोगों के समर्थन से जोड़कर देख रहे हैं।

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    हिंदू कार्ड नहीं, धार्मिक परिपाटी

    हिंदू कार्ड नहीं, धार्मिक परिपाटी

    ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ किसी भाषण का अंश नहीं है। यह दृष्टि है इस देश की, इसलिए जिसमें यह सब है उसे दृश से उत्पन्न दर्शन कहते हैं। यूरोप भी ऐसे लोगों को जो देखने की क्षमता रखते हैं ‘सीअर्स’ कहता है। जिन्हें हम ऋषि कहते हैं। ऐसी मान्यताओं में विकसित लोग किसी का कार्ड नहीं हो सकते।

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    राजबब्बर के लिए प्रेरक कैसे हो गए राहुल

    राजबब्बर के लिए प्रेरक कैसे हो गए राहुल

    उन्हें इसके लिए एक बेहतर रणनीति की भी जरूरत है। इसलिए सिर्फ इस बात पर पीठ थपथपाने से कुछ नहीं होगा कि प्रदेश की इकाइयां आपको अध्यक्ष के पद पर देखना चाहती हैं। यह सिर्फ राजनीतिक समायोजन की मांग है और इस तरह की संस्कृति कांग्रेस में अर्से से रही है। बेहतर है राहुल बाबा इससे बचें!

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    गरीबी हटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

    गरीबी हटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

    उसका कहना है कि ये लोग रोजाना 120 रुपए से कम में अपना खर्च चला रहे हैं। हमारे देश के छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान, इन राज्यों की 60 फीसदी आबादी गरीब कहलाती है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अति महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर लिया। उन्होंने तय किया कि 2022 तक देश से गरीबी को हटाया जाएगा। इससे ज्यादा सुनहला दिन भारतीय इतिहास में कोई न होगा, यदि गरीबी के संत्रास से, इस अभिशाप से देश को मुक्ति मिल जाए।

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    भ्रष्टाचार के आरोप और कांग्रेस के बयान : सुरेश हिन्दुस्थानी

    भ्रष्टाचार के आरोप और कांग्रेस के बयान : सुरेश हिन्दुस्थानी

    वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस धारणा को परिवर्तित किया है। हम जानते हैं कि लम्बे समय तक कांग्रेस के कार्यकाल में प्रधानमंत्री के पूरे परिवार ने ही सत्ता की सुविधाओं का उपयोग किया था, यह सत्ता का दुरुपयोग ही कहा जाएगा। इतना ही नहीं कांग्रेस के मंत्री और सांसदों के परिवार ने भी सत्ता की मलाई का स्वाद चखा।

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    फैसला प्रदूषण का, अनुवाद अपने-अपने

    फैसला प्रदूषण का, अनुवाद अपने-अपने

    सिलसिलों में संवेदना होती है, परंपरा के पोषक तत्व की तरह आख्यान भी होते हैं। अनवरत होते रहने से थोड़ी-बहुत रीतियां भी जुड़ जाती हैं। एक राज्यपाल तथागत राय ने इस पर टिप्पणी करते हुए दु:ख जताया। उन्होंने यह भी कहा कि दीपावली, होली वगैरह हिंदुओं के त्योहार हैं।

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    राहुल गांधी का गुजरात का दूसरा दौरा

    राहुल गांधी का गुजरात का दूसरा दौरा

    जामनगर में उन्होंने कहा कि झूठ बोल-बोलकर विकास पागल हो गया है। उन्होंने पाटीदार समाज से कहा कि भाजपा ने आप पर गोलियां चलवाईं, यह कांग्रेस का तरीका नहीं है। हम प्यार और भाईचारे से काम करते हैं। स्वयं को किसानों का हमदर्द बताने वाले राहुल सौराष्ट्र के एक गांव में बैलगाड़ी से पहुंचे और वहां उन्होंने मोदी की तरह चाय पर चर्चा की।

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    विकास पागल नहीं होता, पागल होते हैं नेता : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    विकास पागल नहीं होता, पागल होते हैं नेता : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    जब तक देश, प्रदेश और समाज का विकास करने से पहले जातियों और मजहबों के समीकरण देखे जाएंगे, विकास में पुरुषों और महिलाओं के चेहरे देखे जाएंगे, जब तक विकास को लेकर वोट की राजनीति होगी, तब तक यह देश सही मायने में विकसित हो ही नहीं सकता।

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    दिल्ली से पक्षियों का धीरे-धीरे गायब होना

    दिल्ली से पक्षियों का धीरे-धीरे गायब होना

    खोज में जब निकल ही आया, सत्य तो बुहत मिले, कुछ नए कुछ पुराने मिले, कुछ अपने कुछ बिराने मिले, कुछ ने लुभाया, कुछ ने डराया, कुछ ने भरमाया। तो परिंदे लुभाने, डराने और भरमाने की प्रतीती से अलग मनुष्य को मुकम्मिल मनुष्य बनाते हैं, इसलिए जरूरी है उनकी हिफाजत।

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    जीएसटी में छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत

    जीएसटी में छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत

    उनका कहना था कि करीब 65 हजार करोड़ का उनका रिफंड रुका हुआ है, जिसे उन्हें दिलाया जाएगा। सरकार ने हर निर्यातक का ई-वॉलेट बनाने का भी फैसला किया है। इसमें नेशनल एमाउंट का एडवांस क्रेडिट किया जाएगा। सरकार ने बच्चों के फूड पैकेट को भी 13 फीसदी सस्ता कर दिया है।

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    चीन के बहाने राहुल का मोदी पर निशाना : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    चीन के बहाने राहुल का मोदी पर निशाना : सियाराम पांडेय ‘शांत’

    वह कांग्रेस ही थी जिसके शासन में चीन ने भारत के बहुत बड़े भूभाग पर कब्जा किया था लेकिन कांग्रेस ने कभी उस भूमि को चीन से छुड़ाने की कोशिश नहीं की।

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    राष्ट्रगान देश की आत्मा की अभिव्यक्ति

    राष्ट्रगान देश की आत्मा की अभिव्यक्ति

    राष्ट्र, राज्य की संकल्पना के साथ ही उसका संविधान, उसका गान, उसका ध्वज यह सब उसमें अन्वित होता है। हमारे यहां संविधान के साथ तीन चीजें स्वीकारी गईं, उसमें विपुलता, वैविध्य और पक्का कौशल यह तीन बातें भी महत्वपूर्ण हैं।

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    हम लोग लूटने के लिए नहीं, कुछ करने के लिए आये हैं : स्वतंत्रदेव

    हम लोग लूटने के लिए नहीं, कुछ करने के लिए आये हैं : स्वतंत्रदेव

    परिवहन मंत्री के तौर पर स्वतंत्र देव सिंह कभी स्वयं बसों की धुलाई करते दिखे तो कभी बस अड्डे पर शौचालय सफाई की कमान उन्होंने संभाली। बसों की सीट से लेकर आपातकालीन खिड़कियों की जांच, उसके रूट और सुरक्षा को लेकर उन्होंने अचानक पहुंचकर यात्रियों से सीधा संवाद किया और उनसे मिले फीडबैक को अमल में लाने के निर्देश दिये।

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    मुख्यमंत्री की भाषिक हिंसा

    मुख्यमंत्री की भाषिक हिंसा

    उनके भी तमाम लोग जिन्होंने पार्टी को वैचारिक आधार दिया था और जो वैकल्पिक राजनीति की बात करते थे, वह अंतराल पहले केजरी को छोड़कर जा चुके हैं। मोदी को अधिनायकवादी बताते केजरीवाल स्वयं अपनी पार्टी में अधिनायकवादी हैं। ऐसा उन सभी लोगों का कहना है, जो इनके रवैये से पीड़ित और दुखी होकर पार्टी छोड़ने को बाध्य हो गए। केजरी को अंतरनिरीक्षण करना होगा कि कैसे उनका और उनकी पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है।

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    हिमाचल में कांग्रेस पर मोदी का प्रहार

    हिमाचल में कांग्रेस पर मोदी का प्रहार

    कांग्रेस निश्चित ही आज भी एक बड़ी पार्टी है। एक ऐसी पार्टी जिसे अपने बाबत कुछ नहीं बताना पड़ता, अलबत्ता संकल्पों और योजनाओं के बारे में बताना होता है। यही बात उसके लिए दिक्कत की है। एक लंबे अंतराल की हुकूमत के कारण जो सबसे ज्यादा फैला वह भ्रष्टाचार था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल में इसी बात को रेखांकित किया।

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    चुनाव से पहले गुजरात में चुनावी बिसात

    चुनाव से पहले गुजरात में चुनावी बिसात

    पटेलों ने कांग्रेस से पल्ला झाड़ा, तब से कांग्रेस का सत्ताई गुब्बारा पिचका पड़ा है। अन्यथा अन्य जातियों के वोट तो भाजपा और कांग्रेस को समान रूप से मिलते रहे हैं। इस गणित के कारण कांग्रेस अति उत्साह में आ गई है। उसे लगने लगा कि हार्दिक की उपस्थिति बड़ा फेरबदल कराने में कामयाब होगी।

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    गांधी विचारों में संक्रामक शख्सियत

    गांधी विचारों में संक्रामक शख्सियत

    इसलिए वे कहते रहे अपराध से घृणा करो अपराधी से नहीं। वे इम्येनुअल कांट की तरह रुपांतरण के हक में थे और यही वजह है कि वे गीता के भी करीब थे। गांवों की आत्मोभति और कुटीर उद्योग गांधीवादी अर्थशास्त्र की कीमिया है। उनका चरखा स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांति की तरह था।

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    भाजपा में इस बार राग यशवंत

    भाजपा में इस बार राग यशवंत

    यशवंत एक अर्से से प्रधानमंत्री से भेंट चाहते रहे हैं, पर उन्हें अवसर नहीं मिला। पार्टी का एक वरिष्ठ नेता मिलकर अपनी बात रखना चाहता है, तो उसे अवसर तो दिया ही जाना चाहिए। सिन्हा को कश्मीर भेजा गया था, लेकिन उनकी अनुशंसाओं पर कहते हैं उनसे बातचीत भी नहीं हुई। बहरहाल, यशवंत सिन्हा यदि सही हैं तब भी उन्हें इस तरह अपनी बात नहीं रखनी चाहिए थी।

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    फिर परेशानी क्या है राहुल बाबा!

    फिर परेशानी क्या है राहुल बाबा!

    क्या राहुल बाबा आपको यकीन है कि जिस कांग्रेस इतिहास को आप अपनी पीठ पर लादकर घूमते रहते हैं, उसे जनता ने भुला दिया है। सुषमा स्वराज ने आईआईटी और आईआईएम का उल्लेख किया, तो यह नहीं कहा कि इसे हमारी सरकार ने बनवाया। उन्होंने देश की प्रगति का गौरवगान किया और तुलना की कि इस दरमियां पाकिस्तान ने क्या किया?

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    नौकरशाह अच्छे राजनेता हों संभव नहीं

    नौकरशाह अच्छे राजनेता हों संभव नहीं

    अपनी बात को एक नियत दायरे, तरीके और प्रवाह से कहने का लहजा उन्होंने सीख लिया। फिर भी देश और दुनिया के कहानीकार और कवियों की सूची में अपना स्थान नहीं बना पाए। उनकी शैक्षणिक और प्रशिक्षणिक स्थिति कुछ ऐसी होती है कि वे अपनी कहन में सिद्धहस्त हो जाते हैं। लेकिन कभी कोई नौकरशाह विचारक नहीं हुआ, जबकि नेताओं को चाहे जितनी गाली दे दो, उन्हीं में कोई सोचने-विचारने और स्थिति बदलने का माद्दा रखता है। मंत्रिमंडल के विस्तार में जितने भी साथ लिए गए, उनमें अनेक नौकरशाह हैं। शायद यह समझा गया हो कि वे नियत समय में तयशुदा कार्य अथवा कार्यक्रम को पूरा करने का माद्दा रखते हैं। फिलवक्त एक उदाहरण श्रीमान अल्फोंस का है। उन्हें पर्यटन का अमला दिया गया। विभाग संभालते ही वे विवाद में आ गए। पहले उन्होंने यह बयान दिया कि केरल में गो-मांस मिलता रहेगा। फिर विदेशी पर्यटकों से कहा कि वे अपने अपने ही देशों से ‘बीफ’ लेकर आएं। इस पर भी वे रुके नहीं। एक और बयान श्रीमान ने दे दिया कि जो लोग अपनी कार या बाइक में 80 रुपए लीटर का पेट्रोल डलवाते हैं, वे इतने गरीब नहीं हैं कि पेट्रोल खरीद ही न सकें। इससे ज्यादा बकवास भरा भाषण मोदी सरकार में शायद ही किसी ने दिया हो। इसलिए भी कि इन महामना को न तो अंतरराष्ट्रीय बाजार की कोई जानकारी है, न तेल की कीमतों की। समूचे बाजार में तेल की कीमतें घट रही हैं और हमारे यहां उसे वास्तविक कीमत से 120 प्रतिशत अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।

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    विद्यालयों में सुरक्षा चिंता का सबब!

    विद्यालयों में सुरक्षा चिंता का सबब!

    शाला प्रबंधन के लिए बनाए गए नियम वैसे भी सुधारों की मांग करते हैं, फिर भी जितने वजूद में हैं उनका भी पालन बड़े स्कूलों के प्रबंधक नहीं करते। मजा यह कि इसके बाद भी वे बे-खटके रुपए छापते रहते हैं और सरकारें बड़ी जिम्मेदारियों में मशगूल हो जाती हैं। गांधी ने जिस सामुदायिक प्रबंधन की बात की थी, उस पर आजाद भारत ने कभी विचार नहीं किया।

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    अखिलेश यादव की घरेलू कलह

    अखिलेश यादव की घरेलू कलह

    सिर्फ काफिला लेकर चलना कारवां बनने का परिचायक नहीं है, इसे समझना होगा। और इसे भी कि यदि नया मोर्चा गठित हुआ तो सपा के पैर उखड़ जाएंगे। ऐसे में वे अपनी भविष्य की योजनाओं को मूर्तरूप नहीं दे सकेंगे। इसलिए अखिलेश को समझना होगा कि उनके लिए आज भी पारिवारिक कलह से उबरना प्राथमिकता होनी चाहिए।

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    सुषमा एक अतुलनीय हस्ताक्षर

    सुषमा एक अतुलनीय हस्ताक्षर

    आज अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर भी सबसे सबल विदेश मंत्री हैं सुषमा स्वराज! फिर चाहे वह निर्भया कांड की बात हो या कुछ और संसद ने सांस बांधे आज तक जितने लोगों को मंत्रमुग्ध सुना, सुषमा स्वराज उनमें एक हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश या कोई और देश उन्होंने भारतीय विदेश नीति को सदैव अपनाए जाने जैसा सम्मान दिलाया, जिसकी विरोधियों ने भी सराहना की।

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    योगी के श्वेतपत्र का मतलब

    योगी के श्वेतपत्र का मतलब

    जारी किए गए श्वेतपत्र में करीब 25 बिंदुओं को शामिल किया गया है। इनमें कानून-व्यवस्था, कृषि, लोक निर्माण, ग्रामीण स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, खनन, संस्कृति जैसे मुद्दे शामिल हैं। साफ है कि योगी ने गवर्नेंस के मसले पर अपनी अलग उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन हिंदुत्व के एजेंडे से दूरी नहीं बनाई।

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    आखिर कहां जाएं रोहिंग्या

    आखिर कहां जाएं रोहिंग्या

    1962 में मिलट्री की उथल-पुथल के बाद नेशनल रजिस्ट्रेशन कार्ड की बात कही गई। फिर 82 आया और नया नागरिकता कानून भी साथ लाया। इसने ज्यादातर रोहिंग्या को राज्यहीन बना दिया। ये लोग नए नियम के तहत सामान्य स्वास्थ्य सुविधाओं से भी वंचित हैं और वोट देने का अधिकारी तो उन्हें है ही नहीं।

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    क्यों कहना पड़ा सहवाग को ऐसा!

    क्यों कहना पड़ा सहवाग को ऐसा!

    जहां वीरेंद्र सहवाग जैसे हस्ताक्षर को प्रमाणित करना पड़े कि वह कोच क्यों नहीं हो सकता है और उसके बाद भी उसे माना नहीं जाए। यह ‘सेटिंग’ बहुत महंगी पड़ेगी भारतीय क्रिकेट को। याद रखा जाना चाहिए कभी हॉकी के भी सुहाने दिन थे, आज नहीं हैं। क्रिकेट में इस तरह की गलीच राजनीति उसके बेहतर और उजले भविष्य का संकेत तो नहीं है।

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    भारत-जापान मैत्री के नए आयाम

    भारत-जापान मैत्री के नए आयाम

    यह कुछेक देशों के लिए ईर्ष्या का विषय भी हो सकता है और हमारे देश में कांग्रेस जैसी पार्टी के लिए चिंता का विषय, जिनके उपाध्यक्ष महोदय केलिफोर्निया में भारतीय विदेश नीति की आलोचना करते हैं और कहते हैं कि भारत अलग-थलग पड़ता जा रहा है।

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    परदेस में राहुल गांधी उवाच!

    परदेस में राहुल गांधी उवाच!

    अर्थात विचार के स्तर पर यदि आप किसी को स्वीकार नहीं भी कर रहे हैं, तो अस्वीकार कीजिए, लेकिन यह तो मत कहिए कि ढांचा हमारा है, प्रारूप हमारा है। वंशवाद पर उन्होंने बोला। कहा कि ज्यादातर पार्टियों के लिए वंशवाद एक समस्या है, लेकिन बड़ी संख्या में उनकी पार्टी के लोगों की कोई वंशवादी पृष्ठभूमि नहीं है। यह बात तथ्यात्मक नहीं है, इसे भारतीयों से ज्यादा कौन जानता है। वे शायद यह कहना चाह रहे थे कि हमारा देश वंश संस्कारी देश है।

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    अखाड़ा परिषद ने जारी की फर्जी बाबाओं की सूची

    अखाड़ा परिषद ने जारी की फर्जी बाबाओं की सूची

    यह देश पकड़ने वाले को नहीं छोड़ने वाले को महत्वपूर्ण मानता है। फिर भी, पिछले कुछ दशकों में समाज की अवधारणा में संपत्ति एक महत्वपूर्ण कारक हो गई। बाबा गुरमीत उर्फ राम-रहीम जैसे लोगों ने तमाम जुगत बैठाकर 700 एकड़ में धर्म की खेती शुरू की और पंजाब और हरियाणा राज्य में खासा दबदबा कायम कर लिया।

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    दिग्विजय सिंह ने कहे प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द

    दिग्विजय सिंह ने कहे प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द

    क्या कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को गाली देने का काम सौंप रखा है। वे अपनी सरकार गंवाने के बाद आज तक कांग्रेस के लिए एक भी उपलब्धि जुटा पाने में असफल रहे हैं। वे भाविक रूप से भी उग्रवादी नहीं रहे, लेकिन पिछले तीन वर्षों में उन्होंने जितना भाषिक उत्पात मचाया कदाचित उसकी तुलना किसी से भी संभव नहीं है।

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    मोदी की म्यामां यात्रा के अर्थ

    मोदी की म्यामां यात्रा के अर्थ

    इस बात की आशंका है कि काम-काज के न होने और गरीबी से अघाए इन लोगों का इस्तेमाल आतंकी संगठन आसानी से कर सकते हैं। बुनियादी रूप से मुसलमान होने पर आतंकी संगठन इन्हें आसानी से ‘एप्रोच’ कर सकते हैं। इसलिए इन्हें यहां क्यों रहना चाहिए।

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    वृंदावन की तीन दिनी समन्वय बैठक

    वृंदावन की तीन दिनी समन्वय बैठक

    इसीलिए सरसंघचालक मोहन भागवत आर्थिक विकास की तो बात करते हैं, लेकिन उसमें भी पवित्रता का उल्लेख करते हैं। वे कतई नहीं चाहते कि दूसरे पश्चिमी देशों की तरह हमारा देश भी सामरिक और आर्थिक प्रगति उनके नक्शेकदम पर चलकर करे। उसे कुछ ऐसा करना चाहिए कि उस प्रगति में भारतीयता के दर्शन हों।

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    आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ ब्रिक्स

    आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ ब्रिक्स

    इसके जरिए चीन पाकिस्तान की मदद का इच्छुक है। मगर ब्रिक्स में असैन्य इस्तेमाल के लिए एटमी इनर्जी के विस्तार की वकालत की गई। साफ है कि ब्रिक्स सम्मेलन में भारतीय पक्ष का सभी देशों ने समर्थन किया। इससे कम से कम पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में शर्मिन्दगी उठानी पड़ रही है। उसके पास इसका कोई विकल्प नहीं, क्योंकि उसके यहां काम कर रहे संगठनों का भी जिक्र हो चुका है।

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    अरविंद केजरीवाल की ढाई घरी!

    अरविंद केजरीवाल की ढाई घरी!

    इसलिए भी कि पूरी दिल्ली इन्हीं मूलभूत समस्याओं से हलाकान थी। बावजूद इसके दिल्ली को वह सकून हासिल नहीं हुआ, जिसके लिए उसने लोकतांत्रिक करवट ली थी। ऐसे में यदि अरविंद और किसी राज्य की तरफ रुख करते हैं, तो अपने बचे-खुचे जनाधार से भी हाथ धो बैठेंगे।

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    मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में हुआ क्या?

    मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में हुआ क्या?

    हरदीप पुरी आईएफएस हैं। ब्राजील और ब्रिटेन में राजदूत रह चुके हैं, मोदी से 99 में मिले थे, जब वे श्यामजी कृष्ण शर्मा के अस्थिअवशेष लेने गए थे। और सत्यपाल सिंह 1980 के आईपीएस हैं। पुणे, नागपुर में कमिश्नर रहे सत्यपाल ने आतंकवाद की कमर तोड़ी और बागपत से अजित सिंह को चुनाव हराया था। प्रगतिशील विस्तार होने के बाद भी पार्टी को वरिष्ठ सांसदों पर भी भरोसा जताना चाहिए था, बजाय नौकरशाह रहे लोगों के।

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    यशभारती पुरस्कार का अपयश!

    यशभारती पुरस्कार का अपयश!

    कांग्रेस के समय में और अनेक गड़बड़ियां हुईं या रही होंगी, लेकिन पुरस्कारों के चयन के मसले में यदि वे भी अपने-अपने कर रहे होते, तो किसी भी वामपंथी या दूसरी विचारधारा के लेखक या खिलाड़ी को पुरस्कार मिला ही न होता। इस बात को मान लेने में हर्ज क्या है कि आपने सरकार को उन चेलों के हवाले कर दिया था, जो सिर्फ आपकी ‘जय’ बोलते थे। ऐसा न होता तो ‘यशभारती’ को इतना अपयश न उठाना पड़ता।

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    खट्टर ने अमित शाह को रिपोर्ट सौंपी, इस्तीफा नहीं!

    खट्टर ने अमित शाह को रिपोर्ट सौंपी, इस्तीफा नहीं!

    इनके दो मंत्रियों ने इस ढोंगी के चरणों में अपने ‘डिसक्रेशनरी फंड’ के 50-50 लाख रुपए चढ़ावे में चढ़ा दिए। यह ऐसा पैसा होता है जिसे सरकार मंत्री को इसलिए सौंपती है कि वह अपने विवेक का इस्तेमाल कर उसे प्रदेश की उन्नति और बेहतरी में लगाए। इन लोगों ने अपने विवेक का ऐसा भौंडा प्रदर्शन किया कि वर्षों तक याद रखा जाएगा।

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    तीन तलाक से आजादी: एक अभूतपूर्व निर्णय

    तीन तलाक से आजादी: एक अभूतपूर्व निर्णय

    अदालत का यह फैसला प्रधानमंत्री मोदी जी की उस इच्छाशक्ति की भी विजय है, जहाँ उन्होंने मुस्लिम समाज की महिलाओं को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए, उनके अधिकारों और हितों की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक तौर पर कई दफा अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।उन्होंने इस सामाजिक मसले पर राजनीति के मंचों से अपनी आवाज मुखर की, जिसके परिणामस्वरूप तीन तलाक पर देश भर में बहस और विमर्श चला।

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    विपक्षी एकता के नाम पर लालू की रैली!

    विपक्षी एकता के नाम पर लालू की रैली!

    अखिलेश यादव तो रैली में पहुंचे और ‘अच्छे दिन’ से लेकर भीड़ के बारे में कहा कि इसे देखकर भाजपा वालों के होश फाख्ता हो गए होंगे। ऐसा ही भाषण उन्होंने यूपी चुनाव के समय बनारस में दिया था। कहा था कि भीड़ देखकर भाजपा भयभीत हो गई। वह हुई हो या नहीं, लेकिन नतीजे देखकर अखिलेश यादव आज तक डरे हुए हैं।

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    शुक्र को नप गए गुरु, राम-रहीम दोषी

    शुक्र को नप गए गुरु, राम-रहीम दोषी

    आपने हिंसा बरपने दी। अन्यथा जो बाद में हुआ कि भीड़ को पंचकूला से जीरकपुर की तरफ धकेला गया, यह पहले भी हो सकता था। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी नजर पूरी घटना पर है, लेकिन इतना पर्याप्त नहीं।

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    मायावती का लालू की रैली से इनकार

    मायावती का लालू की रैली से इनकार

    फिलहाल होने वाले विधानसभा चुनावों में भी विपक्ष कुछ कर पाने की हालत में नहीं है। सिर्फ इतनी सी बात से कुछ नहीं होगा कि राहुल गांधी पर कोई बड़े आरोप नहीं हैं। उन पर न भी हों, तो लालू महाराज! आप पर तो हैं।

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    बार-बार होती रेल दुर्घटनाएं, माजरा क्या है?

    बार-बार होती रेल दुर्घटनाएं, माजरा क्या है?

    सवाल यह है कि दुर्घटना के बाद दो-चार दिन ऐसे बयान आते हैं, फिर किसी बात की खबर क्यों नहीं आती? जांच ही चलती रहती है। कहीं कुछ होता नहीं। यह निराशा नहीं है, आगे दुर्घटना न हो इस बात की तैयारी है। लोग दंडित होंगे ही नहीं तो लापरवाही पर अंकुश लगेगा कैसे? ट्रेन अनेक सुधारों की मांग करती है। सिर्फ रफ्तारी रेलों की घोषणा भर इसका विकास नहीं है।

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    साझी विरासत के नाम विपक्ष का जमावड़ा

    साझी विरासत के नाम विपक्ष का जमावड़ा

    फारुक की दिक्कत यह है कि वे 35 ‘ए’ के मामले में यकायक सक्रिय हुए और घाटी में यह संदेश देना चाहते हैं कि वे कश्मीरियत की लड़ाई लड़ रहे हैं। अमूमन उनके बयानों से राजनीतिक तूफान उठता रहता है। वे अब भी अपने लिए हुकूमत के अवसर देख रहे हैं। मगर इनमें कहीं गठबंधन की अनिवार्यता, उसके लिए जरूरी लचक और भविष्य के लिए विपक्ष के ‘ब्लू-प्रिंट’ जैसी बात नहीं थी।

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    चंद्रकांत देवताले का चिरनिद्रा में चले जाना

    चंद्रकांत देवताले का चिरनिद्रा में चले जाना

    देवताले आपसे चाहे कॉफी हाउस में मिलें अथवा घर पर, बेहद आत्मीयता से मिलते। उनका कोई आग्रह नहीं था कि आप उनसे इत्तफाक रखें। उनके पास असहमति के लिए पर्याप्त गुंजाइश थी। उनके लिए असहमति का अर्थ विरोध नहीं था।

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    लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी

    लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी

    इसका मकसद भी साफ है और कैनवास भी पर्याप्त बड़ा। आस्था के नाम पर हिंसा चाहे जो करे, उसे यह देश स्वीकार नहीं करेगा। इस कैनवास में विभिन्न संप्रदायों के रंग भरें, तो पाएंगे कि उन्होंने यह कहा कि ऐसे किसी भी शख्स या समुदाय को बख्शा नहीं जाएगा, जो हिंसा के हक में है। उन्होंने एक अभिभावक की तरह अपना भाषण दिया।

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    नीतीश को सबक देने सड़क पर उतरे शरद!

    नीतीश को सबक देने सड़क पर उतरे शरद!

    राजद के पास अब भी कांग्रेस है, दूसरे विरोधी दल हैं। यानी, विपक्ष की एकता के मसले पर जिसके गुब्बारे में हवा लालू भर रहे हैं, उसमें भी शरद कुछ ज्यादा नहीं कर पाएंगे, क्योंकि यह संपूर्ण अवधारणा लालू की है। जद(यू) बुनियादी रूप में बिहार की पार्टी है। वहीं उसका आधार है, जिसके नेता नीतीश कुमार हैं।

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    और अहमद पटेल का चुनाव जीतना

    और अहमद पटेल का चुनाव जीतना

    भाजपा भी अपने पर लगे आरोपों से बच सकती थी, लेकिन उसकी जल्दबाजी और दिग्विजयी दिखने की उसकी उत्कंठा ने किरकिरी करवा दी। आपका अच्छा होना ही पर्याप्त नहीं है, जरूरी यह भी है कि आप अच्छे दिखें। राज्यसभा का चुनाव कोई जनमत संगग्रह नहीं है।

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    कैसे समझेंगे हम स्वतंत्रता का महत्व : डॉ नीलम महेंद्र

    कैसे समझेंगे हम स्वतंत्रता का महत्व : डॉ नीलम महेंद्र

    हम भले ही खुद को आज इक्कीसवीं सदी का भारत कहते हों लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार आज भी आबादी के मात्र 18% हिस्से को ही 21 वीं सदी की मूलभूत सुविधाएं जैसे स्वच्छ पानी भोजन हासिल हैं। हम भले ही दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं लेकिन उसकी आत्मा कहीं खो गई है।

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    हामिद अंसारी की चिंता का सबब

    हामिद अंसारी की चिंता का सबब

    क्यों है? यह कहकर आप पत्थरबाजी को भी न्यायोचित ठहरा रहे हैं। कश्मीर समस्या का हल बातचीत से होना चाहिए। जरूर होनी चाहिए। पर किससे? क्या इसमें उन अलगाववादियों को शामिल करना चाहिए, जो भारत की एकता-अखंडता के लिए रोज समस्याएं बुनते रहते हैं। दरअसल, यहां न तो ‘सेक्युलरिज्म’ पर कोई संकट है, न सहिष्णुता पर।

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    हरियाणा की बेटी से वहीं छेड़छाड़

    हरियाणा की बेटी से वहीं छेड़छाड़

    इस दादागीरी के सामाजिक ढांचे को बदलने के लिए गंभीरता पूर्वक प्रयास करने होंगे। सिर्फ स्कूल और विश्वविद्यालय खोलकर किताबी बातें तो उड़ेली जा सकती हैं, लेकिन व्यक्तित्व नहीं बनाए जा सकते। ऐसे व्यक्तित्व जिनसे देश बनने वाला है।

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    जयराम नरेश की चेतावनी का मतलब

    जयराम नरेश की चेतावनी का मतलब

    पार्टी का सोचने, काम करने और संवाद का आभिजात्यी ढंग पार्टी को बदलना होगा। पुराने कांग्रेसी मनीषी अब नहीं हैं और न अब वे मतदाता हैं, जो उनकी कार्यकुशलता, दर्शन से आप्लावित रहते थे। एक नई पीढ़ी है समाने, उसके पास जूझने के सिवा कुछ नहीं है। उसे यकीन पर भी यकीन नहीं है।

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    ‘शादी शगुन’ तो मिलेगा, लेकिन स्नातक होने पर

    ‘शादी शगुन’ तो मिलेगा, लेकिन स्नातक होने पर

    हालांकि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर भी तंज कसा है। उन्होंने कहा कि हमारी योजनाएं बंद कर दीं, अब ये लोग 51 हजार रुपए बांट रहे हैं। यह क्या है? यह अखिलेश का बचकाना सवाल है, जिसकी उम्मीद भी लोग नहीं करते। यह योजना उनकी समाजवादी पेंशन या कि लैपटॉप योजना से बिल्कुल अलग है। यह योजना बच्चों के ‘ड्रॉपआउट’ रुकवा सकेगी और भर सकेगी उनमें अध्ययन का ‘गौरव’!

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    कांग्रेस के विचार से मुक्त हो रहा है भारत : जयकृष्ण गौड़

    कांग्रेस के विचार से मुक्त हो रहा है भारत : जयकृष्ण गौड़

    हमारे यहाँ यह मुहावरा प्रचलित है कि जो गरजता है, वह बरसता नहीं। चीन भी जानता है कि उसकी धमकियों को धूल चटाने की ताकत भारत में है। भारत न केवल सैन्य शक्ति से वरन् आर्थिक दृष्टि से भी चीन की कमर तोड़ सकता है। भारतीय बाजार से चीनी सामान का सफाया होने लगा है।

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    आयकर छापेमारी से दिक्कत किन्हें है?

    आयकर छापेमारी से दिक्कत किन्हें है?

    मुद्दा यह है कि क्या दलगत राजनीति की आड़ में या कि स्थानीय राजनीति के तहत आर्थिक अपराधों को जारी रहने दिया जाए? या कभी इन अपराधों पर हाथ बढ़ाए जाएं और इन्हें कानून के दायरे में लाकर दंडित किया जाए। या सिर्फ इसलिए कुछ न किया जाए कि ये लोग राजनीतिक दलों से संबंद्ध हैं। इस देश के प्रधानमंत्री ने नोटबंदी से पहले भी संकेत दिया था कि आधार कार्ड अनिवार्य होने चाहिए।

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    विदेश नीति पर संसद में सुषमा स्वराज!

    विदेश नीति पर संसद में सुषमा स्वराज!

    बांडुंग में उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया। सारे प्रश्नों से संतुष्ट या निहत्था हुआ विपक्ष अब विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। वे निश्चिंत हैं कि बांडुंग में सुषमा स्वराज का भाषण हुआ था, जिसे उन्होंने डाउनलोड किया है। हकीकत यह है कि वह भाषण एशिया अफ्रीका कॉन्फ्रेंस का है। विदेश नीति आज नेहरू युग से कहीं आगे बढ़ गई है, इसे मानने से गुरेज क्यों है?

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    काल्पनिक हजामत की अफवाह : रमेश ठाकुर

    काल्पनिक हजामत की अफवाह : रमेश ठाकुर

    हालांकि कुछ संदिग्ध और जेबकतरों को पकड़ कर शक के आधार पुलिस पूछताछ करती रही। दिल्ली में इस घटना की सच्चाई को जानने के लिए पुलिस मनोवैज्ञानिक अस्पताल इबहास की मदद लेने लगी।

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    देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान है भारत छोड़ो आंदोलन काः रमेश सर्राफ धमोरा

    देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान है भारत छोड़ो आंदोलन काः रमेश सर्राफ धमोरा

    दोनों प्रकार के मार्ग से पूरा देश आंदोलित हो उठा। गांधीजी का ‘करो या मरो’ अत्यन्त ही शक्तिशाली मंत्र था। शब्द शास्त्र के कुशल शिल्पकार बापू के मंत्र का भी देशव्यापी असर पड़ा और यह नारा बाद में ध्येय मंत्र बन गया।

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    बिहार में क्या करना चाहता है विपक्ष?

    बिहार में क्या करना चाहता है विपक्ष?

    सवाल यह है कि एक आरोप लगा रहा है और दूसरा जवाब दे रहा है, यही बात फिर-फिर बिहार में हो रही है। ऐसे में लालू अपने अहंकार और सत्ताई कमान के सपने पाले बिहार को ‘हार्स ट्रेडिंग’ की तरफ ले जा सकते हैं। यह मानना भी अति-आकांक्षा प्रेम हैं कि यदि शरद यादव आवाज लगाएंगे तो कई विधायक टूटकर उनके पीछे आ जाएंगे।

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    विश्वास और समर्पण के रिश्ते को सिर्फ मजहबी न मानें: सियाराम पांडेय ‘शांत’

    विश्वास और समर्पण के रिश्ते को सिर्फ मजहबी न मानें: सियाराम पांडेय ‘शांत’

    योगी सरकार के इस निर्णय के बाद अल्पसंख्यकों का क्या रुख होगा, यह देखने वाली बात होगी। समर्पण और विश्वास के रिश्ते (निकाह) को सिर्फ मजहबी नहीं माना जाना चाहिए।

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    लश्कर आतंकी दुजाना का मारा जाना

    लश्कर आतंकी दुजाना का मारा जाना

    अबु दुजाना के इस ऑपरेशन में पुलिस को सेना की 182 बटालियन, 55 राष्ट्रीय रायफल्स और सीआरपीएफ ने मदद की। कुछेक संगठित गिरोहों को होने वाली फंडिंग की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी कर रही है। इस पर भी जांच होनी चाहिए कि ये पत्थरबाज लोग कहां से आते हैं। इनका निशाना सेना है। इन्हें किस राजनीतिक दल या नेता की सीधी मदद मिल रही है। याद रखा जाना चाहिए कि ऐसा कोई संगठित काम बिना किसी स्थापित दल की निरंतर मदद के संभव नहीं है।

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    यादों में सिमटकर रह गये सावन के झूले : रमेश सर्राफ धमोरा

    यादों में सिमटकर रह गये सावन के झूले : रमेश सर्राफ धमोरा

    लोग अब घर की छत पर या आंगन में ही रेडीमेड फ्रेम वाले झूले पर झूलकर मन को संतुष्ट कर रहे हैं। बुद्धिजीवी वर्ग सावन के झूलों के लुप्त होने की प्रमुख वजह सुख सुविधा और मनोरंजन के साधनों में वृद्धि को मान रहे हैं।

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    चुनौती से बहुत दूर खड़े नमो

    चुनौती से बहुत दूर खड़े नमो

    अभी तो आगाज है इसलिए ठीक-ठीक पता नहीं चल रहा। इसके चलते हर शख्स का आर्थिक हिसाब-किताब गोपनीय नहीं रह पाएगा। उसे बताना ही होगा कि इतना पैसा कहां से और बे-नामी संपत्ति कैसे खड़ी हो गई। उन्होंने खादी पहनने की अपील की, स्वदेशी वस्तुओं की पैरवी की, मेक इन इंडिया की वकालत की। विपक्ष को इतनी तेजी से हुए राजनीतिक और समाजिक बदलाव की उम्मीद नहीं थी।

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    अमित शाह की लखनऊ यात्रा के सियासी निहितार्थः सियाराम पांडेय ‘शांत’

    अमित शाह की लखनऊ यात्रा के सियासी निहितार्थः सियाराम पांडेय ‘शांत’

    अमित शाह की लखनऊ यात्रा का लबोलुआब यही रहा है। अगर भाजपा उनके मंत्र पर काम करती है, प्रशासन और विधि व्यवस्था अनुकूल हो जाती है तो राजनीति के राजपथ पर भाजपा का अजेय रथ निर्बाध दौड़ता रहेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।

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    मेहबूबा ने राष्ट्रीय ध्वज पर ऐसा क्यों कहा?

    मेहबूबा ने राष्ट्रीय ध्वज पर ऐसा क्यों कहा?

    वे मुठ्ठीभर डरपोक अलगगाववादी! वे जो अंधेरे में भी बंदूक थामे, नकाब डाले निकलते हैं! कौन? क्या यह ध्वज कश्मीर के आसमान पर भी मेहबूबा की मर्जी से फहराता रहा है? वस्तुत: यह एक ऐसा अनुच्छेद है, जो अमूमन संविधान की किताबों से भी ओझल है, लेकिन जम्मू-कश्मीर विधानसभा को यह अधिकार देता है कि वह स्थायी नागरिक की परिभाषा तय करे।

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    बिहार की राजनीति का उन्नीस-बीसःसियाराम पांडेय ‘शांत’

    बिहार की राजनीति का उन्नीस-बीसःसियाराम पांडेय ‘शांत’

    भाजपा और जदयू की यह युति बिहार को नई दिशा देगी, उसे उन्नति के शिखर पर ले जाएगी, इसकी उम्मीद तो की ही जा सकती है। केंद्र और राज्य में समान विचारधारा की सरकार होने का लाभ बिहार की जनता को मिलेगा, इसमें रंच-मात्र भी संदेह नहीं है।

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    और बिहार में टूट गया महागठबंधन!

    और बिहार में टूट गया महागठबंधन!

    नीतीश के अगले राजनीतिक कदम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा बिहार के भविष्य, न्याय और विकास के लिए जो भी जरूरी होगा किया जाएगा। सारे दरवाजे खुले हुए हैं। इस बीच अर्थात उनके इस्तीफे के चंद मिनट बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए भ्रष्टाचार से एकजुट होकर लड़ना देश की जरूरत है।

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    भाजपा के खिलाफ आंदोलन करेंगी मायावती!

    भाजपा के खिलाफ आंदोलन करेंगी मायावती!

    यूपी इस बात से हलाकान था कि सपा, बसपा को चुनते हुए प्रदेश जहां का तहां खड़ा था। सिवा अपराध और जातिविशेष की सांगठनिक दादागिरि के। यही वह कारण था कि यूपी ने सपा या बसपा को जरा भी अवसर नहीं दिया।

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    मायावती का इस्तीफा बनाम दलित-प्रेम

    मायावती का इस्तीफा बनाम दलित-प्रेम

    मायावती ने राज्यसभा से अपना इस्तीफा सौंपा, तो उनके निशाने पर सत्ताधारी भाजपा ही थी, लेकिन इसके बावजूद माया के इस्तीफे से भाजपा नाखुश नहीं, बल्कि खुश है। भाजपा से जुड़े लोग भले ही मायावती के इस्तीफे को महज सियासी ड्रामा बताते हों, लेकिन उनके भीतर की खुशी बार-बार छलक जा रही है।

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    अब जंग वेंकैया नायडू बनाम गोपाल कृष्ण

    अब जंग वेंकैया नायडू बनाम गोपाल कृष्ण

    यह अलग बात है कि मृत्युदंड के खिलाफ बापू और बाबासाहेब के विचारों से प्रभावित प. बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी को आतंकी याकूब मेमन तथा पाकिस्तान में मृत्युदंड पाए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को क्षमादान देने की वकालत करने के कारण सियासी मोर्चे पर विवादों का सामना भी करना पड़ रहा है।

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    समाजवादी कुनबे में कलह और दूरियां विद्यमान

    समाजवादी कुनबे में कलह और दूरियां विद्यमान

    आखिरकार वही हुआ, जिसकी आशंका जताई गई थी। समाजवादी पार्टी (सपा) में टूट एक और नए मोड़ पर पहुंच गई। इसकी वजह बनी सोमवार को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर संपन्न चुनाव। इस चुनाव में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के गुट ने परस्पर विरोधी प्रत्याशियों के खिलाफ मतदान किया, यानी जिस क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई गई थी, वह सच साबित हुई।

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    सावन के महीने में अंकुआते सपने

    सावन के महीने में अंकुआते सपने

    सावन चल रहा है। आपसे-हमसे होकर बीत रहा है। सावन में किसान की आंख में अच्छी फसल के सपने हैं। बादलों को अपना गांव बताते किसान अपने खेतों से भी गुजारिश करते हैं कि उसके साथ बदरिया की पुकार लगाए। वे हैं कि आती और जाती हैं। उनका कुंआरा मन और हिंडोलापन झूले डलवा देता है।

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    मोदी सरकार दुनिया में सबसे भरोसेमंद

    मोदी सरकार दुनिया में सबसे भरोसेमंद

    आर्गेनाइजेशन फॉर इकानॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओइसीडी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 73 फीसदी भारतीय मोदी सरकार में भरोसा रखते हैं। यह दुनिया की किसी भी सरकार पर किए गए वहां के लोगों से ज्यादा बड़ा प्रतिशत है। अर्थात, पूरी दुनिया में सिर्फ हमारा देश ऐसा है, जो सबसे ज्यादा भरोसा रखता है।

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    नीतीश की सरकार को कोई खतरा नहीं

    नीतीश की सरकार को कोई खतरा नहीं

    चाहे ऐसा हो जाए या वैसा, समीकरण यह बने या वह, बिहार में नीतीश कुमार की सरकार को कोई खतरा नहीं है। हुआ सिर्फ इतना है कि नीतीश ने स्पष्ट किया कि वे दागदार छवि के साथ राजनीति नहीं करना चाहते। उन्होंने विनीत भाव से लालू यादव के पाले में सवालों की गेंद उछालकर कहा कि राजद तेजस्वी के बारे में स्वयं फैसला कर ले।

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    क्रिकेट के गलियारे में दौड़ा कोच बनाने का फैसला

    क्रिकेट के गलियारे में दौड़ा कोच बनाने का फैसला

    भारतीय क्रिकेट के गलियारे में उस दिन दूधिया धुआं घूम रहा था। वीरेंद्र सहवाग ने अपनी संपूर्णता में मुख्य कोच बनने की कोशिश की थी। उनका इंटरव्यू भी हुआ। दो घंटे चले साक्षात्कार में ऐसा कुछ नहीं हुआ, जिससे लगे कि सहवाग कोच नहीं बन रहे हैं।

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    आखिरी घर तक दीया जलाना है

    आखिरी घर तक दीया जलाना है

    योगी आदित्यनाथ का पहला बजट संकेत है, संकल्प है। संकेत इस बात का कि इन्होंने एकात्म मानववाद पर चलने और ''अंत्योदय'' के रूप में अंतिम आदमी तक मदद पहुंचाने की बानगी दी है और संकल्प इस बात का कि हम प्रदेश में अपेक्षित सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए कृत संकल्पित हैं।

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    दस सर्कुलर रोड पटना का ड्रामा!

    दस सर्कुलर रोड पटना का ड्रामा!

    पटना के इसी पते पर लालू यादव रहते हैं। 9 जुलाई को यहीं राजद की आवश्यक बैठक हुई। इससे कुछ दिन पहले पार्टी ने अपना स्थापना दिवस मनाया था। पार्टी की बैठक में कतार से लालू परिवारी जमे हुए थे। उसी बैठक में तय हुआ कि तेजस्वी का त्यागपत्र देने की जरूरत नहीं है।

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    तो क्या शाकाहारी जीत नहीं सकते ?

    तो क्या शाकाहारी जीत नहीं सकते ?

    बात है एक बार फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की। वहां सामाजिक न्याय कमेटी की ओर से अवार्ड कार्यक्रम था। इसमें प्रोफेसर कांचा इलैया ने कहा कि शाकाहार कर हम चीन को नहीं हरा सकते। चीन पर विजय प्राप्त करने के लिए हमें मांसाहार करना होगा।

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    'आप' के विधायकों पर धोखाधड़ी का प्रकरण!

    'आप' के विधायकों पर धोखाधड़ी का प्रकरण!

    वह पार्टी जो ईमानदारी का ढोल बजाकर, सत्य निष्ठा की कसमें खाकर वैकल्पिक राजनीति जैसी बड़ी डीगें हांककर सत्तानशीं हुई, आज उस पर जितने और जिस तरह के आरोप लग रहे हैं, वे उसे ही नहीं उस पर भरोसा करने वाले सभी लोगों को शर्मसार कर रहे हैं।

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    लालू यादव की आकांक्षा की लालटेन

    लालू यादव की आकांक्षा की लालटेन

    बात लालू यादव की पार्टी राजद के स्थापना दिवस की है, जिसमें भभक रही थी पार्टी की आकांक्षा की लालटेन! उन्होंने अपनी तकरीर में विपक्ष की एकता और अगले लोकसभा चुनाव पर फोकस किया। उन्हें लगता है कि यदि विपक्षी इकठ्ठे होकर महागठबंधन बना लें, तो भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोका जा सकता है।

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    नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा

    नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा

    यह कहना कि भारतीय विदेश नीति मुहाने पर आ गई है या विफल हो रही है महज एक अतिशयोक्ति है। आज इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, नरेंद्र मोदी को ''विश्व नेता'' ठहरा रहे हैं। अंग्रेजी के कुछेक अखबारों में मोदी की अमेरिका यात्रा पर भी सवाल उठाए थे कि वे वहां से क्या लाए? बिना इस बात को समझे कि यह दौर 70 और 90 के दशक का नहीं है।

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    संप्रभुता के नाम पर चीन की दादागीरी

    संप्रभुता के नाम पर चीन की दादागीरी

    इस वजह से वह पूर्वोत्तर राज्यों पर नजर गड़ाए है। इसी तरह चुंबी घाटी का ज्यादातर इलाका भूटान का भू-गोल है, उससे चीन का कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन घाटी के कई शिखर सामरिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि वे ''चिकेन्स नेक'' जिसे सिलीगुड़ी गलियारा भी कहा जाता है, उससे ऊपर हैं। अब यदि चीन इन हिस्सों को कब्जा लेता है, तो पूर्वोत्तर प्रक्षेत्र में वह फायदे में होगा।

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    नीतीश कुमार की साफगोई भरी ढाई धरी चाल

    नीतीश कुमार की साफगोई भरी ढाई धरी चाल

    राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष लामबंद होना चाह रहा था। उसे यकीन था कि कांग्रेस की अगुआई में इस चुनाव को बेहद संजीदगी से लड़ा जाए, लेकिन वे न तो इकठ्ठे हो पाए, न किसी नाम पर एकमत नजर आए। इस बीच एनडीए ने रामनाथ कोविंद का नाम उजागर कर दिया।

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    प्रधानमंत्री के संकेत के निहितार्थ

    प्रधानमंत्री के संकेत के निहितार्थ

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआई) के स्थापना दिवस समारोह में न केवल प्रेरणादायी, उत्साह से लबालब और ईमानदार राह प्रदर्शित करने वाला उद् बोधन दिया, बल्कि उन्होंने अपनी सरकार के फैसलों को सही , गरीबों के हित में बताते हुए उन लोगों के लिए सीधे संकेत दिए, जो देश में कालाबाजार और कालेधन को फैलाने का काम करते हैं।

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    गो-रक्षा के नाम पर हिंसा अस्वीकार्य

    गो-रक्षा के नाम पर हिंसा अस्वीकार्य

    गो-रक्षा हो और समाज में इसके पुख्ता प्रबंध हों, इस बारे में 50 के दशक से लगातार कोशिशें, मांग और आंदोलन हो रहे हैं। सेठ गोविंद दास से लेकर गांधी तक ने गाय को पूजनीय और जरूरी बताते हुए उसकी रक्षा की पैरवी की।

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    मगर तुम तो अपने गिरेबां में झांककर देखो

    मगर तुम तो अपने गिरेबां में झांककर देखो

    दिल्ली विधानसभा में बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। सदन में भगदड़, एंबुलेंस और यहां तक कि स्ट्रेचर मंगाने की नौबत आ गई। खबर है कि सदन में हंगामा करने वाले आम आदमी पार्टी के दो कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के विधायकों ने मारपीट की।

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    वह सवाल मिताली राज से क्यों पूछा गया?

    वह सवाल मिताली राज से क्यों पूछा गया?

    अपने को वैचारिक संप्रभुता का दर्जा देने वाला अमेरिका, विकसित अमेरिका, जो स्वयं को विचारों की आजादी का स्वर्णमाल (गोल्डन रीथ) समझता है, वह भी लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषय को प्राथमिकता में नहीं रखता।

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    सकारात्मक नतीजों के योगी के सौ दिन

    सकारात्मक नतीजों के योगी के सौ दिन

    किसानों के मसले पर यह सरकार संवेदनशील साबित हुई है। सरकार ने पांच हजार से ज्यादा गेहूं क्रय केंद्र बनाए। इसी का नतीजा है कि गेहूं की खरीद पिछले साल की अपेक्षा इस साल चार गुनी बढ़ी है।

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    केन्द्र की तर्ज पर सबका साथ सबका विकास है लक्ष्य

    केन्द्र की तर्ज पर सबका साथ सबका विकास है लक्ष्य

    योगी आदित्यनाथ ने प्रयाग में अद्धकुम्भ के लिए अभी से प्रयास किए जा रहे हैं। गंगा की सफाई पर भी काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वहीं एण्टी भू माफिया पोर्टल लान्च करते हुए अब तक 05 हजार 891 हेक्टयेर भूमि को अतिक्रमण मुक्त करते हुए खाली कराया जा चुका है।

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    आपातकाल के अत्याचारों की कहानियां

    आपातकाल के अत्याचारों की कहानियां

    वो तो इंदिराजी को इन्हीं लोगों में से किसी ने चुनाव की सलाह दे डाली, कुछ इस ख्वाब में कि इस ज्यादती के बाद विरोध कहां से होगा? 19 महीने बाद हुए चुनाव में राजनारायण ने रायबरेली में इंदिराजी को चुनाव हराया और इसी तरह जार्ज, लिमये, आडवाणी, मोरारजी, चंद्रशेखर, अटलजी विजयी होकर आए और जनता पार्टी की अगुआई में सरकार बनी।

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    क्रिकेट की कलह में इस बार पिसे कुंबले

    क्रिकेट की कलह में इस बार पिसे कुंबले

    कुंबले जैसी शख्सियत का ऐसे चुपचाप विदा हो जाना किसी भी दृष्टि से शुभ-संकेत नहीं है। कहीं ऐसा न हो कि कुंबले के बिना विराट न खुद स्थापित हो पाएं, न टीम को जगह बनाने दें।

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    मीराकुमार के जरिये विपक्ष का दलित कार्ड

    मीराकुमार के जरिये विपक्ष का दलित कार्ड

    फिर भी उन्होंने विपक्ष की बैठक में शिरकत की, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और जगजीवनराम की बेटी मीराकुमार को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित किया।

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    योग: कर्मसु कौशलम‍्!

    योग: कर्मसु कौशलम‍्!

    इसमें नाथयोग का भी योगदान है। ना का अर्थ है शिव और थ का अर्थ है शक्ति। यह सहस्त्रार पर शक्ति के शिव से मिलने का पर्व भी माना जाता है। योग को चित्त विरोधी निरोध भी कहते हैं। ''चित्त वृत्ति निरोध: योग:'' चित्त की वृत्तियां लगातार एक जैसी और एक तरफ न होती रहें।

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    रायसीना की तरफ रामनाथ!

    रायसीना की तरफ रामनाथ!

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नाम की संस्तुति के साथ न केवल सारे कयासों को गलत साबित कर दिया, बल्कि दलितों, वंचितों और गरीब वर्ग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी एक बार फिर जाहिर किया। उन्होंने बताया कि भाजपा की सरकार दलितों को मुख्यधारा से जोड़ने के सिर्फ नारे नहीं लगाती, उसके लिए उद्यम भी करती है।

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    क्रिकेट में ध्वजारोहण न हो सका!

    क्रिकेट में ध्वजारोहण न हो सका!

    यदि क्रिकेट को एक सभ्यता की तरह फैलने देना है, तो पूरे देश में ''टेलेन्ट हंट'' करना होगा। पाकिस्तान की इस टीम में कोई जहीर अब्बास, जावेद मियादाद, वसीम अकरम या शोएब अख्तर नहीं थे। एक नई टीम थी। ख्वाबों और हौसलों की टीम, जिसने विराट कोहली की अकड़ को ध्वस्त कर दिया। सचिन तेंदुलकर ये विराट की तुलना करने वाले जान लें कि सचिन ने न केवल बल्ले, बल्कि साथी खिलाड़ियों में जज्बा भरने से भी जीत की पहल की है और बिना बयानबाजी किए उसे हासिल किया है।

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    राष्ट्रपति चुनाव के लिए कवायद

    राष्ट्रपति चुनाव के लिए कवायद

    ऐसा पहली बार नहीं हो रहा कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतभेद और तनाव का दौर देखने को मिला हो। विपक्ष और सतारूढ़ ही नहीं सत्ताई गलियारों में भी इस किस्म का तनाव पहले देखने को मिला है।

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    सिकुड़ती नौकरियों का सच!

    सिकुड़ती नौकरियों का सच!

    अनुसूचित जाति/जनजाति को रोजगार के लिए दस लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक का कर्ज बैंक दे रही हैं। यह सब तो ठीक है, लेकिन फिलवक्त संदेह के बादल हैं कि ये लोग ''सस्टेन'' कर पाएंगे या नहीं। यदि नहीं तब क्या होगा? ये सवाल उसी नौकरी की ''कंडीशनिंग'' से उपजे सवाल हैं, जिसे अब तक समझाया नहीं गया था।

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    बिहार में शिक्षा का उल्कापात!

    बिहार में शिक्षा का उल्कापात!

    ऐसे में साफ है कि शिक्षा के प्रश्न को गंभीरता से कभी नहीं लिया गया। उसे ''रुटीन'' काम की तरह लिया जाता है। जैसे चल रहा है, चलने दिया जाए। अव्वल तो समूची परीक्षा-प्रणाली सवालों के घेरे में है। विद्यार्थियों की अधिगम शैलियों में पर्याप्त भिन्नता होती है।

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    ताकि फिर मंदसौर न दुहराया जाए

    ताकि फिर मंदसौर न दुहराया जाए

    किसान आंदोलन ने कई करवटें ली हैं। मांग। लोगों का सड़क पर आना। सियासत। आंदोलन का उग्र होना। फायरिंग। उपवास और सत्याग्रह। इतने सारे मुद्दों और विषयों और स्थितियों के चलते तीन और किसानों ने मध्य प्रदेश में आत्महत्या कर ली। इसके साथ ही सप्ताह में 5 लोगों ने आत्महत्या कर ली।

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    अखिलेश की जमीन तलाशने की कोशिश

    अखिलेश की जमीन तलाशने की कोशिश

    समाजवादी पार्टी के नौजवान आका अखिलेश यादव राजनीति की इस भंवरदार कश्ती में अपना ''फिटमेंट'' तलाश रहे हैं। वे मान रहे हैं कि भाजपा की तरफ आरोपों के पत्थर उछालकर वे अपने लिए फिर गुंजाइश निकाल लेंगे। या कि समाजवादी पार्टी की सरकार के कामों के प्रति जनता के मन में अब भी सम्मान है और उसका जिक्र कर वे जनता की सहानुभूति हासिल कर लेंगे।

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    आसान नहीं होगा दिल्ली का चुनाव

    आसान नहीं होगा दिल्ली का चुनाव

    जिस भ्रष्टाचार को चुनावी दुपट्टा बनाकर केजरीवाल उतरे थे चुनावी वैतरणी पार करने, उससे वैतरणी तो पार हो गई, लेकिन असलियत खुलते ही वे स्वयं भ्रष्टाचार के दल-दल में फंस गए।

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    गुणगान से नहीं होगा किसान समस्या का हल

    गुणगान से नहीं होगा किसान समस्या का हल

    यदि इस देश में रोजाना दो हजार किसान किसानी छोड़कर मजदूर बन रहे हों, यदि 52 फीसदी किसान कर्ज में डूबे हुए हों, यदि हर घंटे दो किसान आत्महत्या कर रहे हों, ऐसे में किसान का गुणगान करने से कुछ नहीं होगा। उन्हें ''अन्नदाता'' कहने भर से समस्या हल नहीं होगी।

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    ''हम ना मरिहैं, मरिहैं संसारा''

    ''हम ना मरिहैं, मरिहैं संसारा''

    नौ जून को कबीर को पारंपरिक रूप से याद किया जाता है। इसे संत दिवस भी कहते हैं। कबीर अद्भुत हैं। वे भाषा के नहीं भाव के संत हैं। इसलिए उन्हें समझने के लिए भाव के स्तर तक जाना होता है। सीधी अनुभूति का संत, सीधे संप्रेषण का संत, जो मस्तिष्क से नहीं ह्दय की वीणा की अनुगूंज से बोलता है।

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    12वीं के टॉपर का संन्यासी होना

    12वीं के टॉपर का संन्यासी होना

    हमारे यहां एक होमापक्षी की कथा आती है। कथा है कि पक्षी का अंडा आसमान से गिरता है, उसके नीचे गिरते-गिरते ही उसमें से बच्चा निकल आता है। वह देखता है कि वह नीचे गिर रहा है। पूरी तरह गिरा तो बच नहीं पाएगा। वह पक्षी सतह तक आने से पहले पुन: ऊपर की यात्रा करना शुरू कर देता है।

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    किसानों पर फायरिंग !

    किसानों पर फायरिंग !

    मुद्दा यह है कि मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री इस घटना को आसान घटना क्यों समझ रहे हैं? क्या ऐसा नहीं कि प्रशासनिक अक्षयता के चलते मंदसौर का आंदोलन अब पूरे प्रदेश में गति पकड़ रहा है?

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    आम आदमी पार्टी का संकट

    आम आदमी पार्टी का संकट

    साफ है कि केजरीवाल हर उठे मुद्दे को अपना मुद्दा बनाने की कोशिश करना चाह रहे हैं। लगातार पार्टी के गिर रहे ग्राफ और विश्वसनीयता पर उनका ध्यान नहीं है। उनका ध्यान है कि कम से कम प्रयास में देश के नेता कैसे बना जाए।

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    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आज, पास हो सकते हैं अहम प्रस्ताव

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आज, पास हो सकते हैं अहम प्रस्ताव

    पार्टी सूत्रों का कहना है कि बैठक में देश के मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा होगी। गोहत्या, यूपी सहारनपुर में जातीय हिंसा, केंद्र सरकार की कार्यशैली, अर्थव्यवस्था और कश्मीर समेत कई मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किये जाने की संभावना जताई जा रही हैं।

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    फिर बोले बबुआ राहुल

    फिर बोले बबुआ राहुल

    शंकर सिंह वाघेला का मामला अभी सुलझा नहीं है। पहले उन्होंने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गुजरात का प्रभारी बनाकर भेजा था। मुद्दा आया कि आलाकमान उन्हें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दे, ताकि भरत सोलंकी वगैरह का पत्ता कट जाए।

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    डोनाल्ड ट्रंप का बेवकूफी भरा फैसला

    डोनाल्ड ट्रंप का बेवकूफी भरा फैसला

    इसीलिए अमेरिका को साथ लिया गया, वह साथ आया भी, लेकिन ट्रंप के बेवकूफाना रवैये के चलते अब पेरिस समझौते का स्वरूप कुछ और हो जाएगा। बात पर्यावरण की थी ट्रंप कह रहे हैं इससे अमेरिका को आर्थिक नुकसान हो रहा था।

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    चदरिया को गंदली करती आम आदमी पार्टी

    चदरिया को गंदली करती आम आदमी पार्टी

    इससे पहले भी सीबीआई स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी की नियुक्ति के बारे में मामला दर्ज कर चुकी है। इसके साथ ही आज दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने अदालत को सूचित किया कि केजरीवाल और अन्य पर लोक निर्माण विभाग में घोटाले की शिकायत के बाद तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गईं।

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    गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना

    गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना

    गाय वास्तव में एक चलता-फिरता अस्पताल है। यह वैज्ञानिक शोधों से स्पष्ट हो चुका है। यह संभवतया इकलौता पशु है जो ऑक्सीजन लेता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है। इसका दूध पीने से कैंसर नहीं होता।

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    ढाई दशक बाद साजिश का प्रकरण

    ढाई दशक बाद साजिश का प्रकरण

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अयोध्या में 1992 में ढांचा ध्वंस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने मंगलवार को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार समेत 12 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। इससे पहले निचली अदालत और हाईकोर्ट ने इन्हें साजिश के आरोप से मुक्त कर दिया था।

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    गाय के मसले पर हड़बोंग क्यों?

    गाय के मसले पर हड़बोंग क्यों?

    किसी ने कहा है ''मैं इस भयावह हकीकत के बीच फूल उगा रहा हूं, मित्र। मैं जानता हूं अपनी कमजोरी, लेकिन क्या करूं अपनी इस आदत का जिसने पक्के मकान के आंगन में थोड़ी सी कच्ची जमीन छोड़ रखी है।''

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    और अब आ गया रामपुरी वीडियो

    और अब आ गया रामपुरी वीडियो

    एक और घृणित, शर्मनाक और एंद्रिक फुरफुरी के दबाव में अपराध करते छोकरों का वीडियो रामपुर (उत्तर प्रदेश) से आया। ये दो बेटियों से छेड़छाड़ कर रहे थे। अपनी धमनियों में बहते लहू को उफनता हुआ मानकर ये सभी जैसे किसी सीरियल की शूटिंग कर रहे थे। निशंक, निडर। बात पहले जबानी थी।

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    हुनरमंदी में भी बाजी मारती बेटियां

    हुनरमंदी में भी बाजी मारती बेटियां

    ग्यारह लाख बच्चे इस बार सीबीएसई की बारहवीं कक्षा की परीक्षा में बैठे थे। इनमें सर्वाधिक अंक नोएडा की रक्षा गोपाल ने हासिल किए। अखिल भारतीय स्तर पर दूसरी टॉपर चंडीगढ़ की भूमि सावंत रहीं। वे विज्ञान की छात्रा हैं।

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    बंगाल से चल रही मादक पदार्थ की तस्करी, दो गिरफ्तार

    बंगाल से चल रही मादक पदार्थ की तस्करी, दो गिरफ्तार

    पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थो की तस्करी बेतहासा जारी है। बंगाल से लखनऊ तक दो किलो मादक पदार्थ लेकर पहुंचे दो तस्करों को एसटीएफ ने मड़ियांव इलाके से गिरफ्तार किया है।

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    विपक्षी एकता का सबब!

    विपक्षी एकता का सबब!

    भारतीय राजनीति में 1967 से गठबंधनी सरकारों का दौर शुरू हुआ, धीरे-धीरे विरोध पक्ष इस नतीजे पर पहुंच गया कि सत्ताधारी दल को मिले वोटों के मुकाबले यदि गठबंधन कर गणित बैठाया जाए तो हम लोग सत्ता में हो सकते हैं।

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    सहारनपुर के बवाल से उठते सवाल

    सहारनपुर के बवाल से उठते सवाल

    सहारनपुर में मंगलवार को एक बार फिर बवाल और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। खबर है कि मायावती के कार्यक्रम से पहले कुछ युवकों ने शब्बीरपुर गांव के ठाकुर पक्ष के तीन घरों में आगजनी और पथराव किया। वहीं कुछ लोगों ने मायावती की सभा से लौट रहे समर्थकों पर पथराव और फायरिंग की।

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    निकाहनामे में तीन तलाक न देने की शर्त

    निकाहनामे में तीन तलाक न देने की शर्त

    तीन तलाक की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को नया हलफनामा दायर कर कहा कि बोर्ड काजियों को निकाह पढ़ाते वक्त यह सलाह देने के लिए निर्देश जारी करेगा कि शौहर एक साथ तीन तलाक नहीं दे सकता।

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    मुंबई तीसरी बार बना चैंपियन

    मुंबई तीसरी बार बना चैंपियन

    फिर कोलकता वगैरह! इसकी वजह टीमें तो होंगी हीं, लेकिन आरंभ में सचिन तेंदुलकर का इस टीम से खिलाड़ी की तरह जुड़ना। उनकी सरमस्ती और समझाइश में यह टीम आज भी काम करती है, ऐसी मान्यता है। यही वजह कोलकता नाइटराइडर्स के साथ है कि उसके साथ सौरभ गांगुली जुड़े थे।

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    राम मंदिर पर डॉ. स्वामी का बयान

    राम मंदिर पर डॉ. स्वामी का बयान

    भाजपा के विरोधी ऐसे लोगों को साध लेते हैं, जिन्हें अधिसंख्य लोगों की भावनाओं का भी पता नहीं। राम मंदिर जैसे आंदोलन का भी जिन लोगों ने विरोध किया, उनके अंदरखाने नेताओं ने माना कि बन जाए, तो आपत्ति क्या है? इसके बाद ज्यादातर नेताओं ने दानेबाजी शुरू कर दी कि वे भाजपाइयों की तुलना में ज्यादा हिंदू हैं।

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    लालू का नया पैंतरा मायावती!

    लालू का नया पैंतरा मायावती!

    कुकुरमुत्तई राजनीति के इस दौर के तस्कर संकेतों के बीच लालू यादव आज भी ताल ठोककर राजनीति करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के बरगदी स्वरूप को चुनौती देने का काम वे सिलसिलेवार कर रहे हैं। अपनी परिधि और सीमाएं समझने के बावजूद उन्होंने बिहार में भाजपा के अश्वमेद्य को रोककर बताया कि वे जमीनी राजनीति की बारीकियों के गुर जानते हैं।

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    झूठा पाकिस्तान कोर्ट में भी हारा

    झूठा पाकिस्तान कोर्ट में भी हारा

    पाकिस्तानी फौज ने जिस तरह से स्कीम रची और पैंतरा चला वह नाकामयाब हो गया। जानते होंगे कि वहां फौज और चुनी हुई सरकार में रस्साकशी चलती रहती है। पाकिस्तानी हुक्मरानों ने आइसीजे को यह भी कह दिया कि इस प्रकरण की सुनवाई का अधिकार उसे नहीं है।

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    लालू यादव और चिदंबरम पर पड़े छापे!

    लालू यादव और चिदंबरम पर पड़े छापे!

    कम से कम लालू को इससे बचना होगा। छापेमारी सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध नहीं है। क्या नोटबंदी के समय यह नहीं कहा गया था कि अगला कदम सरकार बेनामी संपत्ति पर उठाएगी। जो कहा, सो किया। इसमें प्रतिशोध कहां है? सिर्फ इसलिए आपके खिलाफ कुछ नहीं किया जाए कि आप विपक्षी एकता के लिए प्रयास कर रहे हैं! या कि आप कांग्रेस के समर्थन से नई इबारत लिखने की कोशिश कर रहे हैं।

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    तीन तलाक और भगवान राम!

    तीन तलाक और भगवान राम!

    यह शीर्षक हास्यास्पद है न, मगर क्या करें जैसे इस शीर्षक के संदर्भों का आपस में कोई संबंध नहीं है, ठीक इसी तरह मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने तीन तलाक को आस्था का मसला बता दिया। उन्होंने इसे राम से भी जोड़ने की हिमाकत की। उन्होंने कहा कि तीन तलाक 1400 सालों से है, इसलिए आस्था का मसला है और संविधान से ऊपर है।

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    नई विधानसभा में पहले दिन!

    नई विधानसभा में पहले दिन!

    राजनीतिक संस्कृति के लोकतांत्रिक प्रतिष्ठान अर्थात उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोमवार को नई विधानसभा का पहला दिन था। धूप का कहवा पीते प्रदेश ने हाल ही में नई सरकार चुनी और परंपरागत रूप में राज्यपाल राम नाइक का अभिभाषण हुआ, लेकिन बाकी सब कुछ लोकतांत्रिक परंपरा की तरह नहीं हुआ।

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    अरविंद के लिए मुश्किल है कलंक धोना

    अरविंद के लिए मुश्किल है कलंक धोना

    यह इतना आसान नहीं जितना अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी समझ रही है कि भ्रष्टाचार का कलंक धुल जाएगा और दिल्ली भूल जाएगी कि रातों-रात राजा बना यह शख्स कभी भ्रष्टाचारी कहा गया। जूलिया क्रिस्टेवा नाम की मनोवैज्ञानिक का मानना है कि कोई नया पाठ दरअसल, अन्तरपाठ (इंटरटेक्स्चुयोलिटी) के दिक में ही जन्म लेता है।

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    नसीमुद्दीन को बसपा से हटाए जाने का मतलब!

    नसीमुद्दीन को बसपा से हटाए जाने का मतलब!

    वस्तुत: उत्तर प्रदेश में मायावती भी उसी ध्रुवीकरण की समाजशास्त्री रणनीति पर भरोसा कर रही थीं कि यहां मुस्लिम वोट सध जाएं तो सरकार मुमकिन है। इसी आधार पर उन्होंने विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक मुस्लिम प्रत्याशी उतारे, तब वे नसीमुद्दीन सिद्धीकी और उनके बेटे अफजल पर न्यौछावर थीं।

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    सपा कनात के भीतर की कुहनीबाजी

    सपा कनात के भीतर की कुहनीबाजी

    जलती भूख की मानिंद त्रस्त समाजवादी पार्टी सत्ताई निवाले के लिए लगातार बेचैन और ऊहापोह में है। अखिलेश यादव ने पहली बार यह साफ कर दिया कि वे पार्टी की कमान किसी भी हालत में मुलायम सिंह यादव को नहीं सौपेंगे। जो कुछ भी इस बारे में पहले कहा-सुना गया बात की बात थी।

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    मेहबूबा की विदाई तक कश्मीर हल मुश्किल

    मेहबूबा की विदाई तक कश्मीर हल मुश्किल

    जैसा कि जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री मेहबूबा ने स्वयं माना कि उनकी पार्टी के डरे हुए कार्यकर्ता गांव छोड़कर भाग गए हैं, इन हालातों में लगता नहीं कि वे कश्मीर समस्या के हल में जरूरी भूमिका निभा सकती हैं।

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    आम आदमी पार्टी का खास झगड़ा

    आम आदमी पार्टी का खास झगड़ा

    जैसे तितली अपने कोकीन से निकलते हुए संघर्ष करती है, वैसे ही यदि कोई दल जनता के बीच संघर्ष कर निकलता है तो निखरता है। जिस तरह तितली के पंख उस संघर्ष से उड़ने लायक बन जाते हैं उसी तरह उस पार्टी को जनसहयोग के, जनाधार के रूप में पंख मिल जाते हैं।

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    एक थी निर्भया...! यही नाम सब जानते हैं!

    एक थी निर्भया...! यही नाम सब जानते हैं!

    सिमोन-द-बोउआ ने कहा था ''स्त्री पैदा नहीं होती, बनाई जाती है।'' अलग-अलग समाजों में स्त्री बनाए जाने का प्रचलन है और इससे भी ज्यादा हड़बड़ी में हैं वे लोग जो हर लड़की को सिर्फ मादा मानते हैं।

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    गुजरात में गेहलोत की गुगली

    गुजरात में गेहलोत की गुगली

    इस जन्मदिन से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस में अच्छे दिन आ गए लगता है। वैसे अशोक बुनियादी रूप से जादूगर हैं। वे जादूगर आनंद के भी करीबी हैं। जादू के कई शोज भी कर चुके हैं। इस बरस गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं और कांग्रेस के लिए एक बार फिर बड़ी चुनौती है।

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    लड़ाई इतनी न बढ़े कि युद्ध अनिवार्य हो जाए

    लड़ाई इतनी न बढ़े कि युद्ध अनिवार्य हो जाए

    पाकिस्तान को समझना होगा हालांकि समझ से उसका कोई लेना-देना लगता नहीं, फिर भी कि आपसी लड़ाइयां इतनी न बढ़ें कि युद्ध अनिवार्य हो जाए। वह लगातार भारतीय अस्मिता, नेतृत्व को चुनौती देते हुए हमारे भू-भाग में गड़बड़ी फैलाता रहा है।

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    समाजवादी पार्टी में जारी है खींचतान

    समाजवादी पार्टी में जारी है खींचतान

    लोकतंत्र में जीत-हार से ज्यादा महत्वपूर्ण है अपने मुद्दों पर जनता को राजी करना, उसके बीच रहना, लेकिन यूपी चुनावों के नतीजों के बाद से समाजवादी पार्टी अब भी संयत नहीं हुई। इसके लिए अखिलेश यादव के वे बयान जिम्मेदार हैं, जो सिरे से भाजपा सरकार को खारिज करने में लगे हैं।

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    तीन तलाक के मसले पर प्रधानमंत्री

    तीन तलाक के मसले पर प्रधानमंत्री

    इसलिए तीन तलाक जैसे मुद्दों को जितनी जल्दी हो सके मुस्लिम भाइयों को स्वयं हल कर लेना चाहिए। इससे उन्हें नए सिरे से परस्पर निर्भरता की कीमिया हासिल होगी, जो घर का बुनियादी गुण सूत्र है।

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    योगी सरकार से प्रदेश को आस

    योगी सरकार से प्रदेश को आस

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौ दिन के अंदर सरकार के कामकाज पर श्वेतपत्र जारी करने की बात कही है। यह उनकी सदाशयता ही कही जाएगी कि उन्होंने विपक्ष को श्वेत पत्र जारी करने की मांग का मौका ही नहीं दिया और खुद श्वेतपत्र जारी करने की बात कह दी।

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    पहले पत्थरबाजी बंद हो फिर संवाद

    पहले पत्थरबाजी बंद हो फिर संवाद

    कश्मीर के हालात तत्काल समाधान की मांग करते हैं, लेकिन समाधान निकले कैसे? पत्थरबाजी होती रहे, सैनिकों के साथ बदसलूकी जारी रहे और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन यह कहे कि सरकार समाधान के लिए, वार्ता के लिए आगे नहीं आ रही है।

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    विनोद खन्ना या स्वामी विनोद भारती का गुजर जाना!

    विनोद खन्ना या स्वामी विनोद भारती का गुजर जाना!

    वक्त की गीली सीमेंट पर अभिनय का मुलायम पांव धरे ध्यान की दुनिया में ओशों की क्रांति घटाने का भाव लिए स्वामी विनोद भारती गुजर गए। रह गए हैं वे निशान, जो सदैव अक्षुण्ण रहेंगे। लंबे सीधे बाल और कमोबेश पतली आवाज के साथ अभिनय संसार में वे दर्द की अर्थच्छाया को खोजते रहे।

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    निगम चुनाव में भाजपा की विजय दुंदुभी!

    निगम चुनाव में भाजपा की विजय दुंदुभी!

    दिल्ली निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर विजय दुंदुभी बजा दी है। परिणाम पूर्व किए गए चुनावी आकलन में कहा गया था कि इस बार फिर भाजपा ही एमसीडी में जीतकर ''हैट्रिक'' बनाएगी। नतीजे करीब-करीब वैसे ही आए हैं।

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    नक्सलियों के मुखबिर

    नक्सलियों के मुखबिर

    ऐसी ही घटना कुछ साल पहले आंध्र प्रदेश में भी हुई थी, जब सुरक्षाकर्मियों के गुजरने की सूचना पुलिस के ही लोगों ने नक्सलियांे को दी थी जिसमें कई जवान मारे गए थे। इस बात का खुलासा खुद केंद्र को भेजी गई उडीसा सरकार की एक रिपोर्ट में हुआ था।

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    फिर नक्सली हिंसा, छत्तीसगढ़ लहूलुहान

    फिर नक्सली हिंसा, छत्तीसगढ़ लहूलुहान

    पुलिस, सशस्त्रबल या कहें सेना इसमें लोग सिर्फ आत्मोत्सर्म के लिए भर्ती नहीं होते और साफ कहें तो मरने के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए विजय और उसके स्वाभिमान की रक्षा के लिए होते हैं।

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    तमिलनाडु के किसानों की कौन सुनेगा?

    तमिलनाडु के किसानों की कौन सुनेगा?

    तमिलनाडु के किसान करीब चालीस दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं, मगर उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा। वे तरह-तरह से यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कर्ज और पानी के अभाव में उनका जीना दुश्वार हो गया है।

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    कश्मीर की पत्थरबाजी शर्मनाक करतूत

    कश्मीर की पत्थरबाजी शर्मनाक करतूत

    कश्मीर का नाम प्रकृति के पत्रों पर भोर की उजली हंसी के रूप में जाना जाता रहा है, जहां हवाएं लिखती रही हैं फूलों पर चिठ्ठियां, झीलें लिखती रहीं मुस्कुराता उल्लास, लेकिन वर्षों से ऋतुएं बदल गईं या बदल दी गईं। अब सिर्फ कोलाहल है, करतूतें हैं, कायराना मंसूबे हैं, सेना पर पत्थरबाजी है, एक अजीब करतूती सन्नाटा राग है।

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    लाल बत्ती का हटना एक जाजम पर लाने की जुगत!

    लाल बत्ती का हटना एक जाजम पर लाने की जुगत!

    आज की बात एक शेर से शुरू करते हैं कि ''उठो ये मंजर ए-शब-ताब देखने के लिए कि नींद शर्त नहीं ख्वाब देखने के लिए''। अब तक न जाने कितने सपनों में आकर कयामत बिखेर गई होंगी ये लाल बत्तियां! न जाने कितने गांवों की गर्द उछालकर पेड़ों की पत्तियों तक पहुंचा गई होंगी ये लाल बत्तियां!

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    फिर चलेगा अयोध्या मसले में प्रकरण!

    फिर चलेगा अयोध्या मसले में प्रकरण!

    सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या के विवादित ढांचे को ढहाए जाने के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 12 नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा चलाने का आदेश दिया। विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा पर भी प्रकरण चलाया जाएगा।

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    याद चंद्रशेखर की, बात सियासत की!

    याद चंद्रशेखर की, बात सियासत की!

    चंद्रशेखर उस जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे जिसमें जनसंघ पूरी तरह विलीन हो गया था। वे कुलजमा, एक बेहतर और सकारात्मक बदलाव के पक्षधर थे। इसलिए उन्हें दी गई श्रद्धांजलि तभी अर्थपूर्ण हो सकती है, जब सपा पूरी तरह से विधायी रुख अख्तियार करे और उनके विचारों में किन विचारों पर काम कर रही है, इसे बताए।

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    राममंदिर और तीन तलाक के सवाल

    राममंदिर और तीन तलाक के सवाल

    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अंतत: कह दिया कि वे उच्चतम न्यायालय के आपस में बातचीत से राममंदिर बनाए जाने के मशविरे को नामंजूर करते हैं। कहा कि वे अदालत के फैसले को मानेंगे। जो बात आपसी चर्चा के बाद सहमति से मानी जाती है सौहार्द्र के घनत्व को बढ़ाती है और जो लादी जाती है उसे मानते तो हैं, लेकिन उससे सौहार्द्र पनपे या संगति बढ़े, इसके आसार कम ही होते हैं।

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    समाजवादी कनात में भभकती लालटेन!

    समाजवादी कनात में भभकती लालटेन!

    समाजवादी पार्टी बेचैनी, झूंझ, खीझ और अजीब ऊहापोह की स्थिति में है। उसे चुनावी हार स्वीकार नहीं, अपने भीतर झांकने को वह राजी नहीं, अन्तरनिरीक्षण का कोई पग उसने बढ़ाया हो दिखाई नहीं देता। अखिलेश यादव यह समझने का प्रयास भी नहीं कर रहे कि प्रदेश का राजनीतिक समीकरण बदल चुका है।

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    मुआवजे की बाट जोह रहे बुन्देलखण्ड के किसान

    मुआवजे की बाट जोह रहे बुन्देलखण्ड के किसान

    वास्तव में बुन्देलखण्ड के इस जिले की हालत ‘जल बिच मीन प्यासी’ जैसी है। यानी जो मछली पानी में रहकर भी प्यासी हो। देखा जाए तो जनपद में गोविन्द सागर बांध, माताटीला बांध, राजघाट बांध, जामनी बांध, रोहिणी बांध, लोअर रोहिणी बांध, सजनाम बांध, उटारी बांध, कचनौंदा बांध, शहजाद बांध हैं।

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    बदल रही यूपी की चाल

    बदल रही यूपी की चाल

    राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद संभालने के साथ ही उत्तर प्रदेश की निस्तल गहराई में एक अजीब उल्लास भर दिया है। यह काम उन्होंने अपनी गति और वेग से किया और जल्दी ही यह भरोसा प्रदेश भर में फैल गया कि नई सरकार ''योग: कर्मसु कौशलम'' कहती और मानती ही नहीं दर्शाती भी है।

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    उप-चुनावों में भी फहराया भाजपा का परचम

    उप-चुनावों में भी फहराया भाजपा का परचम

    बछड़े सी धूप के मौसम में उप-चुनावों के परिणामों ने विपक्ष को राजनीतिक संकेत पढ़ने का अवसर नहीं दिया। या कि विपक्ष की बांग देने की इच्छा धरी की धरी रह गई। भाजपा ने दिल्ली, हिमाचल, मध्यप्रदेश, राजस्थान और असम के उपचुनावों में ध्वज फहरा दिया। कर्नाटक में जरूर कांग्रेस ने दोनों विधानसभा सीटें जीत लीं।

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    सुबह के स्कूलों से बच्चों को लाभ ?

    सुबह के स्कूलों से बच्चों को लाभ ?

    इसलिए जरूरी है कि हमारे शिक्षाविद् अपने वादों से मुक्त होकर इस पर विचार करें और सर्वथा भारतीय शिक्षा व्यवस्था का ढांचा तैयार करें, ताकि बच्चे सचमुच बिना बोझ के सहज भाव से शिक्षित हो सकें। ऐसा होते ही स्कूलों के समय भी अपने-आप तय हो जाएंगे और बच्चों का प्रदर्शन आज से कई गुना ज्यादा अच्छा होगा।

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    डल झील के प्रदेश में शांति कब

    डल झील के प्रदेश में शांति कब

    विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पिछले दिनों कहा कि सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी भारत का अभिन्न अंग है। नि:संदेह इसकी अभिन्नता पर भारत में कहीं मतभेद नहीं है, लेकिन कश्मीर की झील से शांति की बयार उठती ही नहीं। घाटी जैसी अभूतपूर्व खूबसूरत वादी में जब-तब खून बहता रहता है।

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    उत्तर प्रदेश में योगी का तेज और वेग!

    उत्तर प्रदेश में योगी का तेज और वेग!

    उत्तर प्रदेश की बागडोर जब से योगी आदित्यनाथ के हाथ में आई है परिसर के शैवाल तक चमकने लगे हैं, और आत्मलीन विपक्ष सजग होकर अपनी मीमांसा में जुट गया है। एक अजीब अक्स-ए-खुशबू फिजाओं में तारी है कि गुंचा-गुंचा बदलने लगा है। लेकिन विकास की जमीन इस समय तक इतनी बंजर है कि यकायक यहां प्रगति के गेंहू नहीं उगाए जा सकते।

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    शौक उड़ने का, तहजीब सड़क की भी नहीं

    शौक उड़ने का, तहजीब सड़क की भी नहीं

    यदि आप सांसद हैं तो आप पर देश के नियमों का पालन करने की और भी बड़ी जिम्मेदारी है। सांसद हैं तो आप पर दोहरी जिम्मेदारी है, नागरिक की भी और सांसद की भी। इसके विपरीत इनका आचरण कुछ इस तरह का है कि जो कुछ है वह मैं हूं, बाकी सभी ना-कुछ हैं। आपका पर्याप्त सम्मान है, संभवतया उससे ज्यादा जितने आप मनुष्य हैं।

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    शुंगलू कमेटी के नाम से ही परेशां थे ‘आप’ के लोग

    शुंगलू कमेटी के नाम से ही परेशां थे ‘आप’ के लोग

    वस्तुत: अरविंद केजरीवाल की पूरी टीम रातों-रात क्रांति करना चाह रही थी। विशाल जनादेश, तीन बार की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित की शिकस्त, कुल जमा ऐसा था, जैसे सपने में कोई सम्राट बन जाए। बहुत शांति से, चैन से, सहयोग से यदि यह पार्टी और इसके नेता कदम बढ़ाते, तो आज स्थिति यह नहीं होती कि लोग कहते फिरते कि यह ‘झंझटियों’ की पार्टी है।

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    आनलाइन वोटिंग व्यवस्था अमल में लाए आयोग

    आनलाइन वोटिंग व्यवस्था अमल में लाए आयोग

    निर्वाचन आयोग को दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। आधुनिक तकनीक और विकास की वजह से वोटिंग के दूसरे तरीके भी अब मौजूद हैं। उसी में एक आनलाइन वोटिंग का तरीका हो सकता है। वैसे इसे हैक की आशंका से खारिज किया जा सकता है।

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    अन्नदाता किसान के हक में योगी सरकार!

    अन्नदाता किसान के हक में योगी सरकार!

    जानते होंगे कि लखनऊ के पास मलीहाबाद को आम बेल्ट कहा जाता है और वहां अमिया अभी तक बौराई नहीं हैं। ऐसे में किसानों को राज्य सरकार से तोहफे की उम्मीद थी। इससे पहले भी फसल बीमा की राशि 5,500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 13,280 करोड़ रुपए की जा चुकी है।

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    ईवीएम पर प्रश्न चिह्न लोकतंत्र के लिए चिंतनीय : अनिल शर्मा

    ईवीएम पर प्रश्न चिह्न लोकतंत्र के लिए चिंतनीय : अनिल शर्मा

    राष्ट्र स्तर पर अटेर उपचुनाव की ईवीएम गड़बड़ी के मुद्दे को विभिन्न विरोधी राजनीजिक दलों को तूल देने में मप्र की निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह की बोलने के सलीके ने अहम भूमिका निभाई है।

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    ज्यादातर आरोपी वयस्क भी नहीं!

    ज्यादातर आरोपी वयस्क भी नहीं!

    रामदरस मिश्र की पंक्तियां हैं- ''लड़का बड़ा हो रहा है, लड़की बड़ी हो रही है, लड़का धीरे-धीरे घर खाली कर रहा है, लड़की धीरे-धीरे घर भर रही है, लड़का डरा रहा है सड़कों, चौराहों को, लड़की स्वयं अपने से डर रही है।'' बिल्कुल इसी दौर के एक ऐसे समाज में हम जी रहे हैं, जो मूल्यों और संवेदनाओं से धीरे-धीरे रीत रहा है, उसके हाथ शेयर मार्केट के भावों की तरह हैं, वहां सिर्फ खनक होती है तो रुपयों की।

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    आतंकवाद से ज्यादा मौतें मुहब्बत के फेर में

    आतंकवाद से ज्यादा मौतें मुहब्बत के फेर में

    जितनी चीजें अब तक ''अनडिफाइन'' रह गईं उनमें प्रकाश, समय, प्रेम शामिल है। अंधकार का न होना प्रकाश कहा जा सकता है, लेकिन होता नहीं। जो सिर्फ व्यतीत होता रहे वह समय है, लग सकता है, मगर होता नहीं।

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    योगी का गौशाला भ्रमण और सियासी कानाफूसी

    योगी का गौशाला भ्रमण और सियासी कानाफूसी

    उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गौ-प्रेम जगजाहिर है। मुख्यमंत्री बनने से पहले तक गोरखनाथ मंदिर में वह करीब 350 गायों की सेवा रोजाना करते आए हैं। अब मुख्यमंत्री का ओहदा संभालने के बाद उनका नया ठिकाना लखनऊ का 5, कालिदास मार्ग का बंगला हो गया है।

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    राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयं सेवक संघ!

    राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयं सेवक संघ!

    छत्तीसगढ़ तो कभी पूरी तरह कांग्रेसी ही था। वहां से वर्षों जनसंघ या कोई पार्टी नहीं जीतती थी। अजित जोगी के कांग्रेसी मुख्यमंत्री बनने के बाद वहां लोगों को लगा कि यदि शोषण और जातिवाद नए राज्य का फलादेश है तो हमें स्वीकार नहीं है। इनके शासनकाल के बाद वहां भाजपा की सरकार बनी और इसके मुख्यमंत्री रमन सिंह को ''चाउरवाले बाबा'' कहा गया।

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    विश्व को एक आर्थिक एवं राजनैतिक व्यवस्था बनाने की जरूरत

    विश्व को एक आर्थिक एवं राजनैतिक व्यवस्था बनाने की जरूरत

    भारतीय मूल की निकी हैली को विश्व की शान्ति की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिकी राजदूत बनाया गया है। वह दक्षिणी कैरोलिना की गवर्नर भी रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के 44 वर्षीय अजित पई को संघीय संचार आयोग (एफसीसी) का अध्यक्ष बनाया है।

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    मौजूदा शिक्षा प्रणाली में बदलाव का वक्त.....

    मौजूदा शिक्षा प्रणाली में बदलाव का वक्त.....

    हमारे देश कि वैदिक शिक्षा पद्धति देश की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा पद्धति है, लेकिन हम आधुनिकता के आड में इसे भूलकर तरह-तरह तरह के शिक्षा प्रणाली को अपना रहे हैं... क्या आधुनिक दौर में अपनाए जा रहे विषयों को भारतीय वैदिक शिक्षा प्रणाली के तहत संचालित नहीं किया जा सकता है..

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    वासंती नवरात्र, प्रतीक और अर्थ!

    वासंती नवरात्र, प्रतीक और अर्थ!

    भारतीय दर्शन कहता है कि इस देश की मिथक यह है कि यहां का कोई भी त्यौहार बिना कथा-उपकथा और उपाख्यान के नहीं होता। ये सब मिलकर त्यौहारों को सार्थक और प्राणवान बनाते हैं। नौ दिवसीय वासंती नवरात्र भी ऐसे ही हैं। इसमें नौ महीनों में स्त्री की स्थितियों के सांकेतिक रूप विद्यमान रहते हैं।

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    बूचड़खानों पर इतना शोर क्यों?

    बूचड़खानों पर इतना शोर क्यों?

    ऐसा कहीं नहीं हो रहा। नहीं हो रहा तो लोग हड़ताल क्यों कर रहे हैं? वे इसलिए हड़ताल कर रहे हैं कि उनसे कहा जा रहा है कि वे नियमों का पालन करते हुए बूचड़खाना चलाएं।

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    शिक्षा में भारतीयता की तलाश

    शिक्षा में भारतीयता की तलाश

    एक शेर से बात शुरू करते हैं। ''कागज में दब कर मर गए कीड़े किताब के, दीवाने बे-पढ़े ही मशहूर हो गए'' हमारी शिक्षा प्रणाली पर जब भी बातचीत हुई, वक्तव्य आए, वे सब इस शेर की कतार में आते हैं। इसलिए भी कि आज तक हमारी शिक्षा प्रणाली में कोई बुनियादी बदलाव नहीं हुआ और अनेक शख्सियतें शिक्षाविदों के रूप में सम्मानित हो गईं।

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    अखिलेश यादव के तंज का सबब!

    अखिलेश यादव के तंज का सबब!

    उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के चश्मोचराग अखिलेश यादव ने नई सरकार के गठन के सप्ताह से भी कम समय में तंज कसने शुरू कर दिए हैं। साफ-साफ यह कि वे अपनी हार को पचा पाने की स्थिति में नहीं हैं।

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    पागलपन की हद तक ओछी हरकत!

    पागलपन की हद तक ओछी हरकत!

    शिवसेना सांसद रविंद्र गायकवाड़ ने एयरइंडिया के 60 वर्षीय ड्यूटी मैनेजर को पीटा। अपनी इस शर्मनाक हरकत पर उन्होंने शर्मसार होने के बजाय अपनी पीठ ठोंकी और कायराना अहंकार में भरकर कहा कि ''मैने उसे 25 सैंडिल मारे हैँ।'' और कहा कि ''मेरा बस चलता तो उसे जहाज से नीचे फेंक देता।''

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    मनचलों पर पाबंदी और पहरेदारी

    मनचलों पर पाबंदी और पहरेदारी

    यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों के विभागों के बंटवारे के साथ ही कुछेक कदम उठाए। ये वे कदम थे जिनके बारे में घोषणापत्र में जिक्र है। उनमें एक है अवैध बूचड़खानों पर पाबंदी और दूसरा है मनचलों पर लगाम लगाने की कोशिश। इन दोनों ही कदमों से स्वच्छंदता को स्वतंत्रता समझने वाले लोगों में हड़कंप मच गया।

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    आस्था का सवाल राम मंदिर

    आस्था का सवाल राम मंदिर

    वैसे डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का यह समाधान भी गौर करने लायक है कि मंदिर वहीं बने और मस्जिद सरयू के दूसरी तरफ बने। उनकी दलील है कि नमाज मस्जिद में पढ़ी जाती है और दुआ कहीं भी मांगी जा सकती है।

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    23 मार्च (जन्म दिवस) पर विशेष :- श्रीकृष्ण की दीवानी मीरा : मृत्युंजय दीक्षित

    23 मार्च (जन्म दिवस) पर विशेष :- श्रीकृष्ण की दीवानी मीरा : मृत्युंजय दीक्षित

    मीरा की रचनाओं को चार ग्रंथों नरसी का माजरा, गीतगोविंद की टीका, राग गोविंद के पद के अलावा मीराबाई की पदावली, राग सोरठा नामक ग्रंथों में संचयित किया गया है। मीरा की भक्ति में माधुर्य भाव काफी है। मीरा ने अपने बहुत से पदों की रचना राजस्थानी मिश्रित भाषा में की है।

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    भारत इतना दुखी देश क्यों है? : डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    भारत इतना दुखी देश क्यों है? : डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    संयुक्तराष्ट्र की मूल्यांकन पद्धति वैज्ञानिक होती है। उसके सही होने की संभावना ज्यादा ही रहती है। वह हर देश के हालात को छह पैमानों पर नापने की कोशिश करती है। सुशासन, प्रति व्यक्ति आय, स्वास्थ्य, भरोसेमंदी, स्वतंत्रता, उदारता। इन पैमानों पर भारत पिछड़ा हुआ है।

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    जहां से मानवता सांस लेती है, वह है कविता

    जहां से मानवता सांस लेती है, वह है कविता

    कविता समय के केंद्र में मनुष्य की चिंता के कैनवास पर बड़ी होती है। इसलिए जीवन को शब्द देती चलती है, हालांकि अनुभवों से आपके शब्द आकार लेते हैं। अपनी संस्कृतिजन्य उपस्थिति से यथार्थ और मूल्य के खारे समंदर को मीठा करती चलती कविताएं अपनी स्थापना में ही वैश्विक हो जाती हैं।

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    चार राज्यों में भाजपा सरकार

    चार राज्यों में भाजपा सरकार

    उसके लिए उन्हें मोदी की तरह का राष्ट्रव्यापी छवि का, राष्ट्रीय आलोक का नेता सामने लाना होगा, जिसके पास आने वाले भारत के लिए जरूरी सपना हो। ऐसा न होने की स्थिति में मोदी के लिए किसी तरह की चुनौती पेश करना विपक्ष के बस में नहीं होगा।

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    उत्तर प्रदेश में योगी की ताजपोशी के साथ महाबदलाव के क्षण

    उत्तर प्रदेश में योगी की ताजपोशी के साथ महाबदलाव के क्षण

    प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अभी तक की छवि कटटर हिंदूवादी की रही है। अब वह अपनी कटटर हिंदूवादी छवि से हटकर किस प्रकार से प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाते हैं यह तो आने वाला समय बतायेगा। लेकिन वर्तमान में प्रदेश में एक अभूतपूर्व बदलाव की बयार बह रही है।

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    इन्हें कब नसीब होंगे घर!

    इन्हें कब नसीब होंगे घर!

    ''फुड फॉर आल'' ''हाउस फॅार आल'' और ''हेल्थ फॉर आल'' इस देश में मौजूदा समय की सबसे बड़ी मांग है। प्रकृति के व्यवस्था संतुलन से सीखना होगा कि हम हमारे समाज को तरक्की पसंद समाज बनाना तो चाहते हैं, लेकिन उसकी प्राथमिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते। इसे पूरा किए बिना आप विकास के ढोल बजाते बिजूके ही नजर आएंगे।

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    एम्स में आये मरीजों को ऐप पहुंचाएगा डॉक्टर कक्ष तक

    एम्स में आये मरीजों को ऐप पहुंचाएगा डॉक्टर कक्ष तक

    म्स के कंप्यूटरीकरण के अध्यक्ष डॉ. दीपक अग्रवाल के मुताबिक एम्स के एप को गूगल मैप से जोड़ने की कवायद जारी है। जिससे मरीज के मोबाइल पर संस्थान के अंदर का नेविगेशन भी उपलब्ध कराया जा सकेगा। गौरतलब है कि एम्स में रोजाना दस हजार से ज्यादा मरीज उपचार के लिए आते हैं।

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    दो दिन में नरेंद्र मोदी के तीन फैसले

    दो दिन में नरेंद्र मोदी के तीन फैसले

    सामाजिक न्याय पार्टी के झंडों से निसृत नहीं होता, नारों से नहीं टपकता, इसके लिए सरकारों को गतिशील होना होगा। क्या यह सवाल भाजपा विरोधियों के लिए मौजूं नहीं है कि एक बार किसी राज्य में भाजपा सरकार बन जाए तो कई वर्ष लोग उसे काम करते देखना चाहते हैं क्यों?

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    संसार के कुछ सुलझे तथा अनसुलझे प्रश्न?

    संसार के कुछ सुलझे तथा अनसुलझे प्रश्न?

    हथियारों की होड़ के अन्तर्गत एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा बजट में नौ फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की है, दूसरी तरफ चीन ने भी अपने रक्षा बजट में सात फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की है।

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    बच्ची के सुरों पर पहरेदारी का खयाल!

    बच्ची के सुरों पर पहरेदारी का खयाल!

    ऐसा कैसे हो गया? और क्यों हो गया? या तो यह ऐसे समूहों की इरादतन चुप्पी है या वे इसतरह के मसले को आजादी के तसब्बुर से जोड़कर नहीं देखते। किसी दल ने भी इस पर अपना ''स्टेण्ड'' साफ नहीं किया। महिला दिवस पर जो लोग रेंक-रेंककर सशक्तिकरण के नारे लगा रहे थे, वे आज एक बच्ची की आवाज को खामोश किए जाने वाले फतवे पर कुछ बोलते क्यों नहीं?

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    उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में भाजपा की जीत के ऐतिहासिक मायने

    उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में भाजपा की जीत के ऐतिहासिक मायने

    सबसे खास बात यह हो रही है कि अब भाजपा के पास राज्यसभा में अप्रैल 2018 में पूर्ण बहुमत हो जायेगा तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति भी भाजपाका ही हो जायेगा। पीएम परंद्र मोदी अब आने वाले दिनों में चिंतामुक्त होकर काम कर सकेंगे और विपक्ष के पास कोई मुददा नहीं रह जायेगा।

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    कांग्रेस को अपनी ही रचना फिर से करनी होगी

    कांग्रेस को अपनी ही रचना फिर से करनी होगी

    भारत जैसे बहुविध देश में कांग्रेस का विलुप्त हो जाना लोकतंत्र के लिए खासा खामियाजा है। विपक्ष में सही, लेकिन होना जरूरी है, मगर यह सिर्फ चुनाव की बाट जोहने और यहां-वहां से पढ़कर आए नए प्रबंधकों की नियुक्ति करने से नहीं होगा।

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    और अब ईवीएम मशीन पर बावेला

    और अब ईवीएम मशीन पर बावेला

    इसके बजाय इस बात से परेशान और उद्विग्न है कि गोवा और पंजाब में कैसे हारे? मुद्दा ही गलत उठा रहे हैं ये लोग! ईवीएम मशीन की दिक्कत नहीं है यह! यह दिक्कत है समर्थन के भ्रम की, जो इन्हें हासिल नहीं था।

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    केजरीवाल कब समझेंगे

    केजरीवाल कब समझेंगे

    यही वजह है कि वे गुजरात चुनाव की भी बाट जोह रहे हैं। लेकिन, इससे वे जनाधार और जनता की शुभाकांक्षा खोते जा रहे हैं। वैसे भी पार्टी बनने के बाद इतनी जल्दी मुख्यमंत्री का पद पाने वाले वे बड़भागी तो हैं, वरना लालू, नितीश, मुलायम, जयललिता, ममता को भी वर्षों खपाने पड़े हैं।

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    नतीजों से पहले नतीजों का आकलन

    नतीजों से पहले नतीजों का आकलन

    ताजा आकलनों में तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को खासी बढ़त दिखाई गई है, मणिपुर में थोड़ा सा फासला है करीब दो सीटों का। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में किसी एक दल की बहुमत की सरकार नहीं आ रही।

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    एक्जिट पोल से भाजपा को राहत, सपा-बसपा और कांग्रेस आहत: सियाराम पांडेय 'शांत'

    एक्जिट पोल से भाजपा को राहत, सपा-बसपा और कांग्रेस आहत: सियाराम पांडेय 'शांत'

    नानुकर और बात है तथा सत्ता का मोह और कार्रवाई से बचने की अभिलाषा एक बात। हालांकि जैसे कि संकेत मिल रहे हैं, उसके मुताबिक 11 मार्च को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा का कमल खिलना तय है और यह उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

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    चुनाव तो किसी तरह हो गए, अब नतीजों की बारी

    चुनाव तो किसी तरह हो गए, अब नतीजों की बारी

    पूरा देश जिसमें आस्था रोप रहा है, जिसे अपना नायक कह रहा है उस पर उन्मादी टिप्पणी करने का अधिकार शिष्टता तो कतई नहीं। नेहरू 52 के छह महीने चले चुनाव में सैकड़ों सभाएं कर सकते हैं तो मोदी तीन दिन बनारस में क्यों नहीं रुक सकते।

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    दिवस मनाना, सम्मान और प्रेम देना नहीं

    दिवस मनाना, सम्मान और प्रेम देना नहीं

    इस बराबरी के लिए पूरे देश में एक सामाजिक आंदोलन की जरूरत है जो सिर्फ नारे लगाने, झंडे फहराने या हिलाने और बाद में राजनीतिक पार्टी में तब्दील होने वाला आंदोलन न हो।

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    हरियाणा में सब ठीक-ठाक नहीं

    हरियाणा में सब ठीक-ठाक नहीं

    जानते होंगे कि हरियाणा का चुनावी गणित जाटों के आस-पास घूमता रहा है। गैरजाट तो पहली बार लामबंद हुए थे। ऐसा भी नहीं होता यदि हुड्डा सरकार रियल एस्टेट कारोबारियों के बजाय हरियाणा की जनता को, उनके स्वाभिमान को तवज्जो देती।

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    मतदाताओं को रिझाता शोर थमा

    मतदाताओं को रिझाता शोर थमा

    पंत ने लिखा था जैसे बृज की उर्वशी के दाहिने हाथ में अमृत पात्र और बाएं हाथ में विष का कटोरा है। उस पुरानी गुदड़ी में असंख्य छिद्र और अपार संकीर्णताएं हैं। इन उपमाओं के साथ चुनाव और चुनाव प्रचार को देखें तो लगेगा कि मतदाता के हाथ में जय-पराजय है।

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    भीड़ से चुनावी भव-सागर पार करती पार्टियां

    भीड़ से चुनावी भव-सागर पार करती पार्टियां

    एक शेर से बात शुरू करते हैं। ''उन्हें भी जोश-ए-उल्फत हो तो खत्फ उठे मोहब्बत का, हमीं दिन-रात अगर तड़पें तो फिर इसमें मजा क्या है?'' तमाम राजनीतिक दल जैसे इसी शोर को कहते फिर रहे हों। सभी यह बताने में लगे हैं कि हमसे ज्यादा तुम्हारा हितैषी कोई नहीं।

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    केजरीवाल का कमाल : डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    केजरीवाल का कमाल : डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    अरविंद और मनीष, दोनों ही मेरे प्रिय साथी हैं। मैं दोनों से कहता हूं कि वे दिल्ली प्रशासन के सभी कर्मचारियों और विधायकों के लिए यह अनिवार्य क्यों नहीं कर देते कि उनका और उनके परिजन का इलाज सरकारी अस्पतालों में ही हो।

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    अमर्त्य सेन को खतरे में क्यों लग रहा लोकतंत्र

    अमर्त्य सेन को खतरे में क्यों लग रहा लोकतंत्र

    नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने कहा कि देश में भय का वातावरण बनाया जा रहा है और विरोधी आवाजों को ''राष्ट्रविरोधी'' करार देकर पीटने का भय दिखाकर अलग विचारों को हतोत्साहित किया जा रहा है।

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    सांसदों, विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार

    सांसदों, विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार

    भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी ने एक निजी बिल के जरिए निर्वाचित प्रतिनिधियों को वापस बुलाए जाने का अधिकार जनता को दिए जाने की बात उठाई है। इससे पहले भी यह मसला उठा कि अगर जनता को चुनकर विधानसभा, संसद में भेजने का अधिकार है तो उसे वापस बुलाने का अधिकारी भी होना चाहिए।

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    पाखंडी साधुओं की पोल कौन खोलेगा?: डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    पाखंडी साधुओं की पोल कौन खोलेगा?: डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    सच्चे साधुओं की समुचित प्रतिष्ठा तभी होगी, जबकि इन पाखंडी साधुओं के हर पैंतरे की पोल वे अपनी फिल्मों में खोलते रहें। यह काम महर्षि दयानंद सरस्वती ने अब से डेढ़ सौ साल पहले हरिद्वार के कुंभ में पाखंड खंडिनी पताका गाड़कर किया था।

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    बोलने की आजादी में असहमति हो तो भी बर्दाश्त करें!

    बोलने की आजादी में असहमति हो तो भी बर्दाश्त करें!

    वे हें- रेट्रीब्यूशन(प्रतिशोध), रीप्रेशन (दमन), रेस्ट्रीक्शन (प्रतिबंध)। न कोई प्रतिशोध ले रहा है, न प्रतिबंध लगाया जा रहा है और न दमन किया जा रहा है।

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    तकनीकी विकास के इस सपने का साथ दीजिए

    तकनीकी विकास के इस सपने का साथ दीजिए

    चुनावी आपाधापी और जुमलेबाजी के बीच कुछ खबरें ऐसी भी आती हैं, जो हमें थोड सा सुकून जरूर देती हैं, अपनी उपलब्धिया जताती हैं और उनके जरिए अपने आप पर हमें गर्व करना भी सिखाती हैं। बिना इंजन की रेलगाड़ी यानी ट्रेन सेट बनाने की परियोजना के ऐलान की खबर भी कुछ ऐसी ही है।

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    चेतावनी के बाद दंड का भी हो विधान

    चेतावनी के बाद दंड का भी हो विधान

    चुनावी मौसम में अपनी जाति और धर्म को लेकर मतदाता एक हद के बाद चाहे संजीदा ना भी हो, लेकिन मीडिया उनकी गोलबंदी का आधार इन्हीं दो बिंदुओं पर ढूंढ़ता और भावी नतीजों की मीमांसा करता नजर आता है। चूंकि राजनीतिक दल और राजनेता की सियासी जिंदगी ही पूरी तरह मतदान पर केंद्रित रहती है।

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    महाराष्ट्र बढ़ाएगा यूपी भाजपा का उत्साह

    महाराष्ट्र बढ़ाएगा यूपी भाजपा का उत्साह

    महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश की दूरी बहुत ज्यादा है। दोनों जगहों के राजनीतिक मुद्दे भी अलग हैं। लेकिन, इसके बावजूद महाराष्ट्र से से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए जो खबरें आईं हैं, वह उसका उत्साह बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं।

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    क्यों करनी पड़ी सोनिया को अपील

    क्यों करनी पड़ी सोनिया को अपील

    पांच राज्यों में हो रहे विधान सभा चुनाव जितने उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए महत्वपूर्ण हैं, जितने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए परीक्षा के समान हैं, उससे भी कहीं ज्यादा अहम कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए हैं।

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    यूपी चुनाव में हिंसक भाषा और ध्रुवीकरण

    यूपी चुनाव में हिंसक भाषा और ध्रुवीकरण

    ग्रेनविल आस्टिन ने ''इंडियन कांस्टीट्यूशन : कार्नर स्टोन ऑफ ए नेशन '' की भूमिका में लिखा है कि भारत के निर्माताओं ने संविधान के तहत राष्ट्र के आदर्शों और उन्हें हासिल करने के लिए संस्थाओं और प्रक्रियाओं की स्थापना की है। इनमें शामिल है भारत की राष्ट्रीय एकता, अखण्डता और समतावादी समाज की स्थापना करना।

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    हिंदी को प्राथमिकशाला में अनिवार्य किया जाना

    हिंदी को प्राथमिकशाला में अनिवार्य किया जाना

    इस समस्या का उपचार भी मातृभाषा में सन्निहित है, उदाहरण के लिए उन सभी देशों पर नजर रखें जिनकी अपनी मातृभाषा है और वे उसमें सांस लेते हैं। वे विभेदी स्थितियों से रूबरू नहीं होते। अगर जापान में संतरे की तरह खाया जाने वाला फल एक दिन अमरीकी कहकर बेचा जाता है तो पूरे देश में वह फल बिकता ही नहीं।

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    होली में बिजली मिलती है, तो ईद पर भी मिले

    होली में बिजली मिलती है, तो ईद पर भी मिले

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फतेहपुर की आमसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ''अगर रमजान में बिजली आती है, तो दीवाली में भी आनी चाहिए। होली में बिजली मिलती है, तो ईद पर भी मिलनी चाहिए।'' यह वक्तव्य उत्तर प्रदेश चुनाव के संपूर्ण अभियान में मनुब्यता से भरा वक्तव्य है।

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    सरकारी संपत्ति आपकी अपनी संपत्ति है...

    सरकारी संपत्ति आपकी अपनी संपत्ति है...

    अब.. ऐसा नहीं है कि रईसों या फिर ब़डे लोगों को अपराध करने पर सजा नहीं होती है या फिर कानून उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करता है.. होता है..लेकिन मेरा सिर्फ इतना कहना है कि आम नागरिक और खास लोगों के बीच मिलने वाले न्याय और कार्रवाई की प्रक्रिया में आसमान-जमीन का अंतर होता है... अब अपराधी तो अपराधी होता है तो फिर अलग-अलग तरह की व्यवस्था क्यों...?

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    डिंपल का होना और प्रियंका का परिवारी कोना!

    डिंपल का होना और प्रियंका का परिवारी कोना!

    उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मतदान के चरण जारी हैं और मतदान का प्रतिशत सभी दलों को विवेचन करने को बाध्य कर रहा है कि वोट किस तरफ जा रहे हैं। एक चुनी हुई चुप्पी में यहां का वोटर है कुछ बोल नहीं रहा, मगर मत दे रहा है।

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    तमिलनाडु में सियासी समर

    तमिलनाडु में सियासी समर

    तमिलनाडु में इडाप्पडी पलानीस्वामी मुख्यमंत्री बना दिए गए। राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने 63 वर्षीय पलानीस्वामी को 31 मंत्रियों के साथ शपथ दिलाई। कहा गया कि इससे तमिलनाडु में चल रही राजनीतिक उठापठक समाप्त हो जाएगी, लेकिन ऐसा लगता नहीं है। इसलिए भी कि पलानीस्वामी, शशिकला समूह के आज्ञाकारी शिष्य ही नहीं हुक्म बजाने वाले ताबेदार की तरह उफके हैं।

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    शादी को तमाशा न बनाएं! : डा. वेद प्रताप वैदिक

    शादी को तमाशा न बनाएं! : डा. वेद प्रताप वैदिक

    पुत्र जन्म पर भी थोड़ा बहुत उत्सव जरुर होता है लेकिन परण यानी शादी में मैंने कई घरों को बरबाद होते देखा है। कानूनन इस फिजूलखर्ची पर रोक जरुर लगनी चाहिए लेकिन जैसे आय कर कानून के बावजूद काला धन दनदनाता है, वैसे ही इस कानून से बच निकलने के रास्ते भी खोज लिए जाएंगे।

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    सूबे के कप्तान से क्या डिंपल राजी होंगी?

    सूबे के कप्तान से क्या डिंपल राजी होंगी?

    पूरे देश में मेघालय की स्त्रियों को छोड़ दें तो उनके लिए गैर-बराबरी की स्थितियां कभी खत्म नहीं होती दिखतीं। किसी ने लिखा है, लड़कियों की दशा पर लिखा है- ''वो खिजां की जर्द सी शॉल में, जो उदास पेड़ के पास है, वो तुम्हारे घर की बहार है, उसे आंसुओं से हरा करो''।

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    उत्तराखंड और यूपी की 67 सीटों के लिए मतदान!

    उत्तराखंड और यूपी की 67 सीटों के लिए मतदान!

    यूपीए की सरकार ने इस बारे में कौन से कदम उठाए? इसी वजह से तो बुंदेलखंड में भुखमरी के हालात पैदा हो गए थे। बसपा तो घोषणा पत्र जारी करती नहीं है, फिर भी इस बार उसने कर्जमाफी का मुद्दा उछाला है। बात यह है कि प्रदेश का किसान विकास की मुख्यधारा का हिस्सा कब बन पाएगा?

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    शशिकला कलाएं बदलती रहीं और अमावस हो गई

    शशिकला कलाएं बदलती रहीं और अमावस हो गई

    इस पार्टी में ऐसा भी नहीं था। इसे प्रमाणित करने के लिए शशिकला ने विधायकों को बंधक बनाया, महिला कार्ड खेला, पत्रकार परिषद में टिसुए बहाए और जताने की कोशिश की कि एक महिला के खिलाफ पुरुष पड़यंत्र कर रहे हैं।

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    अदालतों-अस्पतालों पर लगे लगाम : डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    अदालतों-अस्पतालों पर लगे लगाम : डॉ. वेद प्रताप वैदिक

    जनता क्या करे? जनता को चाहिए कि वह मनस्थिति पर जोर दे। बचपन से ही बच्चों को खेल, व्यायाम और स्वास्थ्यप्रद भोजन के सुद्दढ़ संस्कार दे। वे क्यों तो बीमार पड़ेंगे और क्यों अस्पताल जाएंगे? इसी प्रकार यदि सत्यनिष्ठ जीवन के संस्कार मिलेंगे तो ऐसे बच्चों को अदालत की शरण में जाने की जरूरत बहुत कम पड़ेगी।

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    प्रेम का स्थापत्य और प्रेम का दिन!

    प्रेम का स्थापत्य और प्रेम का दिन!

    जानते होंगे कई शुरुआती क्रिश्चियन शहीदों के नाम वेलेन्टाइन थे। 1969 तक कैथेलिक चर्च ने ग्यारह वेलेन्टाइन दिनों को मान्यता दी थी। इसी तरह कैथोलिक विश्वकोश संत वेलेन्टाइन का उल्लेख करता है, जिनका जिक्र शुरुआती शहादतों में 14 फरवरी की तारीख के अंदर आता है।

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    उमा भारती के वक्तव्य पर बवाल क्यों?

    उमा भारती के वक्तव्य पर बवाल क्यों?

    बलात्कार पर उमा भारती की टिप्पणी को सिर्फ भाजपाई नहीं कहा जा सकता, दरअसल उसे किसी दलीय चौखटे में रखकर उसका विश्लेषण करना भी तमाम महिलाओं को एक तयशुदा चौखते में फिट कर विमर्श करने जैसा है। इसलिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बलात्कारियों को उल्टा लटकाकर उनकी धुनाई की जानी चाहिए, तब तक यह जारी रहनी चाहिए जब तक उनकी चमड़ी न उधड़ जाए।

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    रचनात्मकता के नाम पर भौंडापन और इतिहास से छेड़छाड क्यों....

    रचनात्मकता के नाम पर भौंडापन और इतिहास से छेड़छाड क्यों....

    फिल्म समाज का आइना होता है... फिल्म के रचनाकार समाज को एक नई दिशा देने वाले केवट होते हैं... परन्तु यदि एक नाव को सही दिशा देने वाला नाविक गलत दिशा में अपनी ताकत लगाए तो संभवतः नाव कभी भी अपनी मंजील पर नहीं पहुंच सकता.. संभवतः इसकी संभावना ज्यादा हो जाएगी कि नाव बीच मझदार में फंस जाए और डूब जाए...

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    उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान

    उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान

    उत्तर प्रदेश की 73 सीटों के लिए मतदान 11 फरवरी को होना है, यह प्रदेश का पहले चरण का मतदान होगा। इसमें करीब पंद्रह जिलों के 3.66 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे। शामली, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, फिरोजाबाद, आगरा और कासगंज ये जिले भी उन पंद्रह जिलों में शामिल हैं, जो मतदान करेंगे।

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    तमिलनाडु की तमतमाहट!

    तमिलनाडु की तमतमाहट!

    शशिकला को समझना होगा कि पार्टी जयललिता की वैचारिक अस्मिता, सौष्ठव और प्रसार का नतीजा है। वह जयललिता के घर की खाली कुर्सी नहीं कि घर बुहारते हुए कोई भी उस पर बैठ जाए।

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    यह सजा नहीं, बच्चों के साथ किया अपराध

    यह सजा नहीं, बच्चों के साथ किया अपराध

    विद्यालय चलाकर आप उस नैसर्गिक अधिकार की पूर्ति में सहायक होते हैं। विद्यालय यातना गृह नहीं हो सकते। बच्चे जहां सहजता से विभिन्न विषयों की शिक्षा ग्रहण कर सकें और स-सम्मान जीवन-यापन कर सकें। ऐसी कुछ कामना और कल्पना रही होगी विद्यालय के बारे में। धीरे-धीरे ये फीस उगाउ धंधेबाजों के अड्डे बन गए।

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    शिवसेना का चौपड़ खेलना!

    शिवसेना का चौपड़ खेलना!

    भाजपा के साथ शिवसेना बुनियादी मुद्दों पर समान विचार रखती है। लगभग एक हद तक दोनों एक-सी सोच रखते हैं। शिवसेना के पास और कोई राष्ट्रीय फलक की हैसियत वाली पार्टी है भी नहीं। उसके ''हिंदुत्व'' और राजनीतिक तेवरों की वजह से महाराष्ट्र में भी उसके और साथी नहीं हैं।

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    स्कूलों में बढ़ती हिंसा बताती क्या है?

    स्कूलों में बढ़ती हिंसा बताती क्या है?

    खबरें हैं कि स्कूल के विद्यार्थियों के बीच हिंसा बढ़ती जा रही है। यह समस्या खासकर सरकारी स्कूलों में है और तेजी से बढ़ रही है। पिछले हफ्ते की खबर है कि दिल्ली के दिलशाद गार्डन इलाके के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों के दो गुट आपस में भिड़ गए। इन्हें देखकर एक शिक्षक ने मोर्चा संभाला और वह बीच-बचाव में आ गया।

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    मतदान, कन्यादान की तरह पवित्र!

    मतदान, कन्यादान की तरह पवित्र!

    अपने मिजाज, मेहनत-मशक्कत और तासीर में अलग-अलग पंजाब और गोवा में प्रचार अभियान थम गया है। अब मतदान होगा। लोकतंत्र के इस महोत्सव में सभी नागरिकों से अपेक्षा है कि वे सभी मतदान करें, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। हमने इसे ''दान'' जैसे शब्द से भी जोड़ा और उसमें पुण्य भाव जागृत करने का प्रयास किया, फिर भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

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    और अब मुलायम मान गए!

    और अब मुलायम मान गए!

    खबरें हैं कि मुलायम सिंह यादव मान गए हैं। यह भी कि अब वे 9 तारीख के बाद सपा का प्रचार करने निकलेंगे। गुस्सा, नाराजी, खीझ, झूंझ और निपटा देने की पट बजाउ, धमकियों और चुनौतियों से भरे प्रहसन का लगभग पटाक्षेप हो गया।

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    मोदी की दिशा में जेटली के कदम!

    मोदी की दिशा में जेटली के कदम!

    नए बजट को पेश करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा ''हम आगे-आगे चलते हैं आइए आप''। इसी उक्ति की तरह का बजट है यह। वस्तुत: बजट विभिन्न मदों में रुपए के आबंटन और वापसी का हिसाब-किताब ही नहीं होता, यह किसी भी सरकार की विकास की कल्पना को दर्शाता है।

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    मुलायम की एक और सख्त चाल!

    मुलायम की एक और सख्त चाल!

    मुलायम सिंह यादव ने अपने ताजा बयान में कहा कि समाजवादी पार्टी के समर्थक कांग्रेस के प्रत्याशियों के खिलाफ पर्चा भर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ''यह गठबंधन सपा को नष्ट कर देगा''। यह सिर्फ बूढ़े हो गए एकाकी ''नेताजी'' का प्रलाप भर नहीं हैं। इसके अनेक परिणाम भी होंगे, और वे चुनाव के वक्त और बाद में परिलक्षित भी होंगे।

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    चुनाव की सरगर्मी और घोषणा पत्र

    चुनाव की सरगर्मी और घोषणा पत्र

    सवाल यह है कि इस सबके बाद मतदान होगा, जनता जिस तरह रीझेगी, उस तरह वोट भी देगी, सरकार बनेगी और प्रदेश अपनी अस्मिता के साथ बाट जोहेगा कि प्रगति होगी! क्योंकि प्रगति का अर्थ सिर्फ कारखाने या आह्वरब्रिज नहीं होता। राजनीतिक दल तो किसी तरह अपने बुनियादी वोट बचाकर ''स्टेपनी वोटों'' के जरिए किसी तरह सरकार तो बना ही लेते हैं।

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    चरखे के साथ गांधी की वापसी

    चरखे के साथ गांधी की वापसी

    दिल्ली के कनाटप्लेस में खादी ग्रामोद्योग और एनडीएमसी के सहयोग से बहुत बड़ा स्टील का चरखा लगाया जा रहा है। चरखा पालिका बाजार की पार्किंग में लगाया जा रहा है। यहां भी कहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचेंगे।

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    संस्कृति, कानून और प्रदर्शन... कब तक..?

    संस्कृति, कानून और प्रदर्शन... कब तक..?

    जनभावनाओं के आगे झुकी सरकार के रवैये को देखकर अब देश भर में तमाम तरह के सांस्कृति कार्यक्रमों के आयोजन पर लगे प्रतिबंध को हटाने की आवाजें उठने लगी है।

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    उ.प्र. चुनाव तैयारियों की 'स्टारकास्टिंग' पूरी

    उ.प्र. चुनाव तैयारियों की 'स्टारकास्टिंग' पूरी

    उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारियों में लगे हैं सभी दल! इन्हीं तैयारियों में शामिल है प्रचार करने वाली टीम! सभी दल अपने-अपने स्टार-प्रचारकों की सूची तय कर चुके हैं। इसमें बहुत आग्रह और मुनव्वल से बुलाई जा रहीं प्रियंका गांधी का नाम भी शुमार हो गया है।

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    अथ श्री शरद यादव उवाच!

    अथ श्री शरद यादव उवाच!

    शरद यादव भारतीय राजनीति की एक ऐसी जरूरी शख्सियत हैं जो संसद में संजीदगी से अपने प्रवाहमान तर्कों से दिग्गजों को ध्वस्त कर अपनी स्थापनाएं देते रहे हैं। आपातकाल हटाए जाने के बाद मध्यप्रदेश के जबलपुर से जिस इंजीनियरिंग स्नातक ने लोकतांत्रिक क्रांति की इबारत लिखने में अपनी भूमिका अता की, उस शख्स की टिप्पणियों पर अब बवाल होने लगा है।

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    जब सेहत भी ठीक नहीं होगी

    जब सेहत भी ठीक नहीं होगी

    खबर दु:खद है कि ''एजुस्पोर्ट्स'' नामक संस्था ने स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण करवाया और देश के 26 राज्यों के बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति को चिंतनीय बताया है। कहा कि भावी पीढ़ी का स्वास्थ्य बेहतर होने की बजाय लगातार गिरता जा रहा है। हर तीसरे छात्र का बॉडी मास इंडेक्स ''बीएमआई'' मानक के अनुरूप नहीं है। हमारे यहां कहा गया ''पहला सुख निरोगी काया''।

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    बहु-प्रतीक्षित सपा, कांग्रेस गठबंधन

    बहु-प्रतीक्षित सपा, कांग्रेस गठबंधन

    सपा का यह पहला चुनाव होगा जिसमें उसके मुखिया पर पारंपरिक आरोप नहीं हैं। दंगों में सक्रिय और विधाई भूमिका न निभाने के बाद भी अखिलेश की संवेदनशीलता पर सवाल नहीं उठे। ऐसे में कांग्रेस से समझौता और एक सैकड़ा सीट पर भरोसा उनके लिए बड़ा सट्टा न बन जाए।

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    ''जलीकट्टु'' पर अध्यादेश

    ''जलीकट्टु'' पर अध्यादेश

    तमिलनाडू के राज्यपाल विद्यासागर राव ने शनिवार को ''जलीकट्टु'' पर अध्यादेश जारी कर दिया। जलीकट्टु को मदुरै और राज्य के अनेक हिस्सों में खेला जाता है। इसे लेकर मरीना बीच पर लोग जमा हो गए। पशु संरक्षण पर काम करने वाले एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पाबंदी लगा दी थी।

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    उत्तर प्रदेश में स्कूली बस हादसा!

    उत्तर प्रदेश में स्कूली बस हादसा!

    यह महज कोहरे का दुष्परिणाम नहीं है और न ही ड्राइवरों पर लादी जाने वाली लापरवाही। इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ स्कूल प्रशासन है, जिस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए और उनके स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जानी चाहिए। वस्तुत: शिक्षा को हमारे यहां दर्शन कहते हैं। यह ''दृश'' धातु से बनता है। इसका अर्थ है देखना।

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    वोट के नाम पर धर्म और जाति के उलझे धागे

    पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर व गोवा के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दल अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिये धर्म एवं जाति के कंधे पर सवार हो गयी है। जबकि धर्म और जाति के नाम पर वोट की राजनीति करना गैरकानूनी है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में जाति, धर्म, भाषा और समुदाय के नाम पर वोट मांगने को गैर कानूनी करार दिया है लेकिन राजनीतिक दलों पर इसका कोई प्रभाव नजर नहीं आ रहा है, यह एक विडम्बनापूर्ण है। देश के लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन राजनीतिक दल चुनावी राज्यों में प्रतिकूल रवैया अपनाए हुए हंै। हालांकि राजनैतिक दल अपने ”वोट स्वार्थ“ के कारण इसे नकारते नहीं, पर स्वीकार भी नहीं कर पा रहे हैं। और कुछ नारे, जो अर्थ नहीं रखते सभी पार्टियां लगा रही हैं। धर्म और जाति की राजनीति का विरोध नेता नहीं, जनता कर रही है।

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    गठबंधन के बाद उत्तर प्रदेश में क्या होगा?

    गठबंधन के बाद उत्तर प्रदेश में क्या होगा?

    उत्तर प्रदेश में महागठबंधन तो नहीं हुआ, अलबत्ता, गठबंधन हो गया। महागठबंधन के पीछे जो लोग आस लगाए बैठे थे, उन्हें उम्मीद रही होगी कि बिहार चुनाव के नतीजे यहां भी दोहराए जा सकेंगे। अब इतना तय है कि जाट वोट समाजवादी पार्टी को नहीं मिल सकेंगे। इससे कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा।

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    सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ेगी कलह

    सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ेगी कलह

    आज वहीं सिद्धू कह रहे है कि कांग्रेस पार्टी जो कहेगी वो वह से चुनाव लड़ेंगे। क्या यह बात वह भाजपा में रहकर नहीं कह सकते थे। यह सही है कि सिद्धू लोकसभा चुनाव में अमृतसर से चुनाव नहीं लड़ सकते हंै। उन्हें अमरिन्दर सिंह के खिलाफ मोहरा बनाया जायेगा।

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    नोटबंदी का असर: सब्जियों की कीमतें गिरीं

    नोटबंदी का असर: सब्जियों की कीमतें गिरीं

    कोलार कर्नाटक का सबसे बड़ा सब्जी उत्पादक क्षेत्र है और यहां एशिया का दूसरा सबसे बड़ा टमाटर बाजार है। नवंबर में यहां टमाटर 3-5 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहे थे जो सामान्य से 85 फीसदी कम है। देश के दूसरे इलाकों की हालत भी ऐसी ही है।

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    यूपी में सेनाएं सन्नद्ध, ऊहापोह बरकरार

    इसका आशय इनका एक साथ होना नहीं, एक से वोट बैंक पर अपना हाथ रखना है। कहा यह भी जा रहा है कि भाजपा की नजर पूरे प्रदेश में गैरजाटव दलित मतों पर भी है। इस सबके बीच 1962 में नाथुसिंह को चित करने वाले मुलायम खामोश हैं, देखना यह है कि वे समाजवादी पार्टी के लिए किसे चित करते हैं?

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    शशि थरूर का भाषा संबंधी प्रलाप

    शशि थरूर का भाषा संबंधी प्रलाप

    पहली बात यह कि हिंदी वैसे ही प्रसारित हो रही है तो हिंदी को लादने का उपक्रम नहीं करना चाहिए। क्या यह सही नहीं है कि जिन देशों ने भी अंग्रेजी की जड़ों को अपने घर से उखाड़ फेंका उन्होंने विकास के गगनचुंबी मानक ही नहीं चूमे अपनी सभ्यता को कुछ इस तरह ढाला कि वह उनकी भाषा में सांस लेती है।

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    क्रिकेट जगत की दो उपलब्धियां

    क्रिकेट जगत की दो उपलब्धियां

    फटाफट क्रिकेट ने बहुत ही कम समय में अतुलनीय लोकप्रियता बटोरी है। एक दौर था जब परिणाम पांच दिन खेलने के बाद भी नहीं मिलते थे। उस समय में बड़े स्ट्रोक्स को देखने के लिए दर्शक तरस जाते थे। यह वही समय था जब क्रिकेट भारत में राजे-रजवाड़ों का खेल हुआ करता था।

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    शिक्षा पर सचिवों की अनुशंसा

    शिक्षा पर सचिवों की अनुशंसा

    शिक्षा को और अधुनातन, और यर्थाथवादी, प्रायोगिक या उपयोगी बनाने के विमर्श बरसों से उठ रहे हैं। इसमें बुनियादी शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा की स्थिति, दिकक्तें, विद्यार्थियों के ''ड्रॉप आउट'' जैसे मसलों पर मंथन चल रहा है। लेकिन कुछ निकलकर नहीं आ रहा।

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    शिक्षा प्रणाली में सुधार का वक्त .....

    शिक्षा प्रणाली में सुधार का वक्त .....

    संविधान के 86वां संशोधन अधिनियम, 2002 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में छह से चौदह वर्ष के आयु के सभी बच्‍चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया ताकि सभी बच्चों को समान रूप से शिक्षा मिल सके। इसे आरटीई अर्थात शिक्षा का अधिकार कानून नाम दिया गया जिसके तहत शिक्षा पाना हर बच्चे का कानूनी अधिकार है।

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    समस्या कहां है... मोदी में या चरखे में

    समस्या कहां है... मोदी में या चरखे में

    ऐसा कभी कहा नहीं गया कि गांधी जी की तस्वीर सदैव यहां से प्रकाशित होने वाले केलेण्डर पर होगी। न ग्रामोद्योग का ऐसा कोई संकल्प था। यह तो निरंतरता के चलते परंपरा में बदल गया था। गांधी और खादी अन्योन्याश्रित रहे हैं, लेकिन हम यह समझाने में नाकामयाब रहे कि गांधी जी चाहते रहे हैं कि देश का युवा खादी पहने।

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    विपक्ष के आरोपों के गुब्बारे का क्या हुआ ?

    विपक्ष के आरोपों के गुब्बारे का क्या हुआ ?

    और सुप्रीम कोर्ट ने सहारा डायरी मामले में जांच की मांग करने वाली अर्जी को खारिज कर दिया। इसके लिए न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और अमित रॉय की नई पीठ ने इसकी सुनवाई की। जानते होंगे कि अर्जी प्रख्यात वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांतिभूषण के बेटे प्रशांत भूषण ने की थी।

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    नींद भी जरूरी है इस सब के साथ

    नींद भी जरूरी है इस सब के साथ

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर के एक व्यापारी ने नींद नहीं आने की वजह से त्रस्त होकर आत्महत्या कर ली। खबर में बताया गया कि वह लगातार दवाइयां लेने विभिन्न चिकित्सीय परामर्श हासिल करने के बाद भी ठीक से सो नहीं पा रहा था। इनसोमनिया अथवा अनिद्रा की इस बीमारी का प्रसार हमारे देश में बढ़ता जा रहा है।

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    आदिवासी महिलाओं से ज्यादती !

    आदिवासी महिलाओं से ज्यादती !

    आज तक वेरियर एल्विन का काम ही सबसे प्रमाणिक है, जिन्होंने अपनी पुस्तक ''मारिया-मूरिया एंड घोटु़ल'' की प्रस्तावना में लिखा कि ''मुझे मिशनरियों ने यहां धर्म परिवर्तन करवाने के लिए भेजा था।'' जानते होंगे कि एल्विन छत्तीसगढ़ रहे हैं और गांधी के समकालीन थे, फिर इन्होंने मिशन के काम से इस्तीफा दे दिया था। उस समय से अब तक धान का कटोरा कहे जाने वाले प्रदेश में भी आदिवासी की पीठ और पेट में कोई फर्क नहीं दिखता।

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    राष्ट्र अस्मिता पर मंड़राते संकट के बादल

    ।दुनियाँ में अनेक देश हैं जो कि राष्ट्र नहीं हैं।देश एक भूखण्ड है। किसी भूखण्ड को देश होने के लिए उसमें नागरिकों का होना और एक सरकार का होना जरुरी होता है। किसी देश को राष्ट्र होने के लिए उसके पास एक संविधान, एक भाषा, एक संस्कृति, एक ध्वज आदि का होना जरूरी है। देश का मूल तत्व भूखण्ड है वहीं राष्ट्र का मूल तत्व संस्कृति है। यानि देश मूर्त है और राष्ट्र अमूर्त। राष्ट्र एहसास है, राष्ट्र आचरण है और देश स्थूल है, भौतिक है। मौजूदा समय में देश और राष्ट्र दोनों घोर संकट में है। भारत राष्ट्र की एक बड़ी समस्या यह है कि यहाँ के निवासी राष्ट्रीयता के नाम पर अपने को भारतीय उदघोषित तो करते हैं किंतु उनके आचरण में राष्ट्रीयता की उपस्थिति अंश मात्र ही है। अधिकांश भारतीयों में संविधान उल्लंघन व कानून तोड़ने की आदत सी पड़ गयी है।

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    एशिया का सबसे बड़ा किताबों का मेला

    एशिया का सबसे बड़ा किताबों का मेला

    गुलजार की एक नज्म है ''किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से, बड़ी हसरत से तकती है, महीनों अब उनसे मुलाकातें नहीं होतीं....मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल और महके हुए रुक्के, किताबें मांगने, गिरने-उठाने के बहाने जो रिश्ते बनते थे, उनका क्या होगा..शायद वो अब नहीं होंगे।''

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    विपक्षी दलों की चिंता का सबब

    विपक्षी दलों की चिंता का सबब

    जैसा शीला दीक्षित ने पिछले दिनों कहा था कि यदि अखिलेश यादव से समझौता हो जाता है तो वे अपना नाम मुख्यमंत्री की दौड़ से वापस ले लेंगी। अब भी उसमें अपनी जमीन गोड़ने की अभीप्सा नहीं हो रही, वह कांधे तलाश रही है। इस पर अरुण जेटली ने बजट को निर्धारित तिथि पर ही जारी करने का मन्तव्य जताते हुए कहा कि इन लोगों के अनुसार तो नोटबंदी बड़ा ही अलोकप्रिय कदम है, फिर इन्हें भय किस बात का है ?

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    मोदी और नीतीश ने की परस्पर सराहना

    मोदी और नीतीश ने की परस्पर सराहना

    ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर नीतीश कुमार बांछे खिलाते आए और उसी तरह गए भी। मोदी ने भी इस बार किसी तरह की धारधार नुक्ताचीनी नहीं की अपितु बिहार मुख्यमंत्री की नीतियों और कार्यशैली की प्रशंसा की। गुजरात के मुख्यमंत्री रहने तक तो मोदी, नीतीश की पसंद थे, लेकिन एनडीए की अगुआई करने की बात आते ही नीतिश खुराफात पर अमादा हो गए।

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    चुनाव की तारीख और जीत की अटकलें

    चुनाव की तारीख और जीत की अटकलें

    चुनाव आयोग ने उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभा के लिए चुनाव की तारीख घोषित कर दी है। इसके साथ ही चुनावों के नतीजों पर अटकलों का दौर शुरू हो गया। इसमें गोवा और मणिपुर तो छोटी विधानसभाएं हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की अनुगूंज तो चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही शुरू हो गई थी। इस दरमियां एक न्यूज चैनल का साझा सर्वे भी आ गया।

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    धर्म आधारित नहीं होगी राजनीति....

    धर्म आधारित नहीं होगी राजनीति....

    सबसे हैरानी की बात यह है कि हर बार राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का गलत फायदा उठाकर धर्म, जाति या समुदाय का प्रचार में इस्तेमाल करने के बावजूद बचने का रास्ता निकाल हीं लेते है। और हमसबने आजाद हिन्दूस्तान के राजनीतिक इतिहास में कई बार देखा-सुना और पढ़ा भी है।

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    धर्म के नाम पर वोट मांगना कब बंद होगा

    धर्म के नाम पर वोट मांगना कब बंद होगा

    तुलसी ने लिखा है ''ऊंचा निवास नीच करतूती'' ज्यादातर दलों की यही स्थिति है। वे विजयी होने के लिए व्यक्ति को राजी नहीं करते उसमें अपना निजत्व खोजने को विवश कर देते हैं। वह निजत्व आदमी को एक बोली, एक सा पहनावा और एक से रीति-रिवाज में अपनापन खोजने को लाचार कर देते हैं।

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    मगर समाजवादी समुराई कब तक रहेंगे ?

    मगर समाजवादी समुराई कब तक रहेंगे ?

    अखिलेश का गुनाह है तो यह कि वह लठ्ठमार भाषा में संवाद नहीं करता, हर ड्यौढ़ी के आगे नतमस्तक होकर ''डिक्टेशन'' नहीं लेता और अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उसने बनी-बनाई सपाई शैली से अलग निकलकर एक ऐसी सर्वस्वीकार्य छवि बनाई, जिसने उसे पिता की छत्र-छाया से निकालकर प्रदेश का नेता बना दिया।

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    राष्ट्रपति की चिंता इरादतन इतिहास

    राष्ट्रपति की चिंता इरादतन इतिहास

    भारतीय इतिहास कांग्रेस के 77वें सत्र के उद्घाटन पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देशभक्ति का नतीजा यह नहीं होना चााहिए कि हम इतिहास की व्याख्या करते वक्त तथ्यों की ओर से आंख मूंद लेने वाला रवैया अपनाएं या अपनी पसंद की दलील को सही ठहराने के लिए सच से कोई समझौता कर लें।

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    आईओए ने कैसे किया यह फैसला

    आईओए ने कैसे किया यह फैसला

    इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने कॉमनवेल्थ (राष्ट्रकुल) खेलों के समय हुए घोटाले के आरोपी और पूर्व कांग्रेसी सांसद सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला को आजीवन अध्यक्ष का पद दे दिया। हंगामा मचा तो कलमाड़ी ने कह दिया कि यह समय इस सम्मान के लिए उपयुक्त नहीं है।

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    विपक्षी आठ दलों का ताना-बाना

    विपक्षी आठ दलों का ताना-बाना

    कांग्रेस की अगुआई में विपक्षी आठ दलों ने विमुद्रीकरण की नीति को विफल बताया और मांग की कि प्रधानमंत्री त्यागपत्र दे दें। इसमें तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, जद (एस) जैसी पार्टियों ने शिरकत की। इतना ही नहीं, नोटबंदी को ''सुपर इमरजेंसी'' भी कहा गया।

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    समाजवादी पार्टी में टिकट वितरण पर खींचतान!

    समाजवादी पार्टी में टिकट वितरण पर खींचतान!

    शकुंतला एक ही है हमारे उपाख्यानों में। एक है जो दुष्यंत के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्शाती है और एक है जो कण्व के आश्रम में मुक्त और गौरवशाली है।

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    राहुल की मदद को सोनिया जी मैदान में

    राहुल की मदद को सोनिया जी मैदान में

    उत्तर प्रदेश चुनाव में अपनी खोई जगह और जमीन हासिल करने के लिए बेताब है कांग्रेस! राहुल, विमुद्रीकरण को मुद्दा बनाना चाह रहे हैं और कोशिश में हैं कि आम आदमी को बड़े आदमी के दुख में अपना सुख न दिखाई देने लगे।

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    अखिलेश यादव के संतुलित समीकरण

    अखिलेश यादव के संतुलित समीकरण

    उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का हर कदम उनके संतुलित समीकरण की ओर संकेत करता है। ऐसा समीकरण जो जनता के बीच संप्रेषित करने के लिए अनिवार्य है। वह कितनी संप्रेषित हुई, यह बात अमूमन चुनावी नतीजे बताते हैं। ताजादम उठाए फैसले में उन्होंने 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति संवर्ग में शामिल करने की अनुशंसा की है।

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    चंद्रबाबू नायडू की नाराजी बे-मतलब नहीं

    चंद्रबाबू नायडू की नाराजी बे-मतलब नहीं

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की मुख्यमंत्रियों की बनाई गई समिति के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि नोटबंदी से जन्मी समस्याएं 40 दिन तक खत्म नहीं होने वाली। उन्होंने 1984 में नंदमूरि तारक रामाराव के समय में आए नकदी के संकट से इसकी तुलना करते हुए कहा कि वह भी तीस दिन में नियंत्रित हो गई थी।

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    गुजरात में अब ब्राह्मणों की चाहत!

    गुजरात में अब ब्राह्मणों की चाहत!

    गुजरात में अगले विधानसभा चुनाव को एक साल बचा है, ठीक ऐसे समय में ब्राह्मणों ने अपना मोर्चा खोल दिया है। वे चाहते हैं कि उनकी सामुदायिक प्रगति के लिए एक कमीशन गठित किया जाए, ताकि वह इनकी समुन्नति के लिए नए सिरे से अनुशंसा करे। इससे पहले पटेल समूह ने आरक्षण की मांग उठाई थी।

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    सत्ताइस साल यूपी बेहाल!

    एक दौर में कांग्रेस अकेली पार्टी होती थी, िजसकी सत्ता पर दावेदारी होती थी और वोट न बंटे इसलिए विपक्ष गठबंधन के गद्दे धुनता रहता था। आज परिदृश्य बदला हुआ है, कांग्रेस के पास ''हाथ'' है, मगर वह खाली है।

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    चुनावी चंदे के सवाल पर पार्टियां परेशान!

    चुनावी चंदे के सवाल पर पार्टियां परेशान!

    पहले बात आई कि चुनावों में सुधार होना चाहिए। ताकि कालेधन के इस्तेमाल पर रोक लग सके, ताकि बाहुबलियों का प्रभुत्व न बढ़ सके, ताकि जनता के लिए सचमुच सरोकार रखने वाले लोग चुनाव में जीतकर आ सकें। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत यूं तो कई बाते हैं, जैसे एक सीमा तय है कि इससे ऊपर खर्च न करें।

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    ऐसा ही रहा तो कांग्रेस सत्तानशीं होने से रही

    ऐसा ही रहा तो कांग्रेस सत्तानशीं होने से रही

    कांग्रेसी खेमे की कनात में बैठने वाले बिहार के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने विमुद्रीकरण को ''फ्राड'' कह दिया। अमूमन धारदार भदेस तरीके से अपने विरोधियों को चित्त करते आए लालू यादव तमाम आरोपों और अदालती फैसलों के बाद भी खड़े हैं। कांग्रेस को अवसन्न और अवसाद में देखकर उन्होंने विमुद्रीकरण पर हमला बोला। वे न तो गंभीर राजनेता हैं, न कोई उनसे गंभीरता की उम्मीद करता है।

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    कैशलेस समाज नहीं... क्राइमलेस सोसाइटी की जरूरत

    कैशलेस समाज नहीं... क्राइमलेस सोसाइटी की जरूरत

    एक जरूरी बात और मैं यहां कहना चाहता हूं कि 16 दिसंबर (निर्भया कांड) की घटना को बीते चार साल जरूर हो गये हैं और हमारे देश की सरकार ने माहौल को देखकर कानून तो जरूर बना दिए... पर क्या बलात्कार जैसे क्रूर अपराध के लिए कानून का बना देना हीं पर्याप्त हैं... नहीं... क्योंकि 16 दिसबंर की घटना के बाद से न जाने कितने मासूमों के साथ बलात्कार किया गया... कई महिलाओं को जिन्दा जलाया गया... इसलिए सबसे जरूरी और मूल सार है हमारे समाज की मानसिकता में बदलाव...

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    संशोधित : नोटबंदी के बाद से आयकर विभाग के 586 छापे, 2900 करोड़ जब्त

    संशोधित : नोटबंदी के बाद से आयकर विभाग के 586 छापे, 2900 करोड़ जब्त

    हजार और पांच सौ रुपये के नोट को 8 नवंबर की मध्य रात्रि से बंद करने की घोषणा के बाद लोगों को होने वाली परेशानियों से निजात दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50 दिन का वक्त मांगा था। लोगों को हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट बदलने के लिए 30 दिसंबर तक की मोहलत भी दी थी।

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    जिनके अपने मकान शीशे के होते हैं...!

    जिनके अपने मकान शीशे के होते हैं...!

    डायरी में लिखा है कि भारत के सबसे रसूखदार परिवार को 1.6 करोड़ यूरो यानी 115 करोड़ रुपए की घूस दी गई। ऐसा नहीं कि यह सिर्फ मिशेल की डायरी ही कह रही है। अगस्ता वेस्टलैण्ड की मूल कंपनी के सीइओ थे-न्यूगोन ओरसी। 2012 में जब हेलिकाप्टर सौदा चर्चा में आया तब इटली की अदालत में पेश आरोप पत्र में कहा गया था कि सोनिया के सलाहकारों को खरीदने की कोशिश हुई है।

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    राहुल की रुस्तमी या रुलाई...!

    राहुल की रुस्तमी या रुलाई...!

    विमुद्रीकरण पर मचे और मचाए गए हंगामे की अगुआई कांग्रेस कर रही है। सदन न चले, इस बात को जैसे सुनिश्चित कर लिया गया। पूरा शीतकालीन सत्र अध्यक्ष की असंदी के पास आकर चिल्लाने, अपनी जगह पर खड़े होकर बांहे चढ़ाने और चीखने, सिर्फ अपनी कही बात को सच और सही मानने और मनवाने के लिए कवायद करने वाले सांसदों की गवाही में बीत रहा है

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    अखिलेश के मंसूबे तो ठीक हैं मगर...!

    अखिलेश के मंसूबे तो ठीक हैं मगर...!

    यह वैसा ही नहीं है, जैसा नेहरू के कार्यकाल में आदिवासी इलाके में कुंए खोदने का काम करना। उस समय हुआ यूं कि कुंए खुदे, उनमें पानी भी आया, पानी मीठा भी था, लेकिन खबर आई कि आदिवासी आज भी प्यासे हैं। प्रशासन हिला-डुला और तपासा गया कि बात क्या है?

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    रोज खराब होता मानसिक स्वास्थ्य

    रोज खराब होता मानसिक स्वास्थ्य

    अकेले हिंदुस्तान में 19 करोड़ 90 लाख मरीज बीपी के हैं। चीन में करीब 22 करोड़ इसके मरीज बताए जाते हैं। मतलब यह कि सालाना करीब 7.5 लाख से ज्यादा लोग इस रोग से ग्रसित होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। स्वभाविक है कि संपूर्ण जीवनशैली के बदल जाने से रक्तचाप जैसी बीमारियों ने जकड़ लिया है।

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    हंगामा है क्यूं बरपा... ?

    हंगामा है क्यूं बरपा... ?

    राहुल जी को पता होना चाहिए कि पंडित नेहरू ने फ्रांसीसी लेखक आन्द्रे मालरो से बात करते हुए कहा था कि ''अब हम न्यायपूर्ण साधनों के जरिए एक न्यायपूर्ण समाज की रचना की शुरुआत करेंगे।'' वे किस तरफ इशारा कर रहे थे, उन साधनों की तरफ जिस तरह से गांधी के अंतिम आदमी की मदद हो सके।

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    केजरीवाल बंगला खाली कब कर रहे ?

    केजरीवाल बंगला खाली कब कर रहे ?

    आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर साथियों ने आग्रह किया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास जो बंगला है, उसे उन्हें खाली कर देना चाहिए। इसलिए कि उसके आसन्न बंगले में ही डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपना शरीर छोड़ा था। वे सभी चाहते हैं कि इस बंगले समेत एक बड़े परिसर में संविधान दर्शाते हुए आंबेडकर की स्मृति को अक्षुण्ण बनाया जाए। पहले यह निवास खाली था।

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    'घर' तलाक से तो बचेंगे नहीं

    'घर' तलाक से तो बचेंगे नहीं

    घर आपसी सहमति की स्थायी प्रतीत होती उस संधि का नाम है, जिसमें उतरकर दोनों समान विकास की संभावनाएं तलाशते हुए परिवार के लिए शांति और उत्सव, प्रगति और वैभव प्राप्त करते हैं। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। न हिंदुओं में, न मुसलमानों में, न किसी और में! मुसलमानों में तो यह अजीब सी स्थिति तक पहुंच गया है।

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    ''टाइम पर्सन ऑफ द इयर'' एक नौटंकी

    ''टाइम पर्सन ऑफ द इयर'' एक नौटंकी

    अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ''टाइम'' पत्रिका ने ''पर्सन ऑफ द इयर 2016'' चुना है। पत्रिका हर साल खबरों को प्रभावित करने वाले एक शख्स को चुनती है। दूसरे नंबर पर हिलेरी क्लिंटन को चुना गया और लगातार दो सर्वे जीतने वाले नरेंद्र मोदी को संपादकों के समूह ने इस दौड़ से बाहर कर दिया।

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    लोकतंत्र का ताकतवर ठपेरा नरेंद्र मोदी

    लोकतंत्र का ताकतवर ठपेरा नरेंद्र मोदी

    भारतीय लोकतंत्र में राजनीति को अपने अनुसार चलाने वाले राजनीतिज्ञ आजादी के पहले तो थे, लेकिन आजादी के बाद ऐसी शख्सियतों में यकायक कमी आ गई। लोकगीतों के आखेटकों से अलग लोकभाषा और लोकस्वर की चिंता में मोदी ने दशकों खर्च किए और अपने को साफ नजरिए का प्रतिस्थापित किया।

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    देशभक्ति का उकेरा हुआ विचार है राष्ट्रगान: रमेश ठाकुर

    देशभक्ति का उकेरा हुआ विचार है राष्ट्रगान: रमेश ठाकुर

    राष्ट्रगान महज मनोरंजन प्रयुक्त जुमला या गीत नहीं है। इसके गुनगुनाने मात्र से ही हमारे भीतर देशभक्ति का भाव जगता है। राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति जब हम सम्मान प्रदर्शित करते हैं तो इससे मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान झलकता है। 26 जनवरी, 15 अगस्त आदि विशेष दिनों तक ही इसे सीमित नहीं रखना चाहिए।

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