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बार-बार संघर्ष-विराम का उल्लंघन, कब सुधरेगा पाक

By Dainik Bhaskar Up | Publish Date: 1/28/2018 4:35:34 PM
बार-बार संघर्ष-विराम का उल्लंघन, कब सुधरेगा पाक

 जम्मू-कश्मीर में सीमा पर एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से बिना किसी उकसावे के संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया जा रहा है। इसी क्रम में 22 जनवरी को जम्मू के कनाचक में पाकिस्तान की ओर से संघर्ष-विराम का उल्लंघन कर की गई गोलीबारी में घायल एक महिला की रविवार को एक अस्पताल में मौत हो गई। इस महिला की मौत के साथ ही सीमा पार से गोलीबारी में मरने वाले लोगों की संख्या 13 पहुंच गई है। यह तब है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर में एलओसी, अंतरराष्ट्रीय सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर संघर्ष-विराम की संधि है। यह संधि नवंबर 2003 में हुई थी।

भारत, पाकिस्तान के साथ 3,323 किलोमीटर लंबी सीमा को साझा करता है, जिसमे जम्मू-कश्मीर में एलओसी के 740 किलोमीटर और अंतरराष्ट्रीय सीमा के 221 किलोमीटर आते हैं। जहां तक बात संघर्ष-विराम का उल्लंघन की है, तो आज पूरा विश्व विज्ञान, कृषि, उद्योग एवं अन्य क्षेत्रों में रात-दिन तरक्की कर रहा है, लेकिन कुछ मुस्लिम देश कट्टरवाद और जिहाद का मंसूबा पाले दुनिया में अशांति कायम करने पर तुले हैं। पाकिस्तान ऐसे ही देशों में अपना नाम सबसे ऊपर शुमार कराने पर उतारू है। असल में ऐसे लोग मानसिक रूप से बीमार हैं, जिनका इलाज होना जरूरी है। अगर समय रहते इनका इलाज नहीं हुआ, तो यह बीमारी लाइलाज हो जाएगी और फिर इसे खत्म कर पाना सबके लिए मुश्किल होगा। पाकिस्तान लगातार भारत में अशांति फैलाने के अपने उद्देश्य में लगा हुआ है। आखिर उसे कब सद्बुद्धि आएगी। घाटी में कुछ दिनों से जो शांति कायम है, पाकिस्तान और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई को यह पसंद नहीं आ रहा। इसी कारण सीमा पार की ओर से कुछ दिन से घुसपैठ में इज़ाफा हुआ है, लेकिन वे अपने मकसद में बिल्कुल कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, जिसकी खीझ वे संघर्षविराम का उल्लंघन कर के उतार रहे है। 

दरअसल, पाकिस्तान का जन्म ही नफरत के बीजों से हुआ है। वह आए दिन इसका परिचय भी देता रहता है। पाकिस्तान में आतंकी फैक्ट्री का कुकुरमुत्ते की तरह उगना भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए घातक बात है। हालांकि, पाकिस्तान अपनी करनी को भी भुगत रहा है, क्योंकि आए दिन उसके नागरिक भी आतंक की भेंट चढ़ रहे हैं। लेकिन, पाकिस्तान का यूं हमेशा फुफकारते रहना असहनीय भी होता जा रहा है। विश्व को एकजुटता दिखाते हुए आतंक फैलाने वालों के फन को कुचलना होगा। आज इस्लाम के बारे में मन में यह प्रश्न उठता है कि जिस इस्लाम को हम शांति का मजहब कहते हैं, वह इतना अशांत क्यों है? आज पूरी दुनिया इस्लामी आतंक से ग्रसित है। मुख्य रूप से इस्लामी देश ही इसका शिकार हो रहे हैं। इतना सब हो रहा है, पर इस्लाम के तथाकथित पैरोकार मौन हैं। जिस जिहाद के नाम पर मुसलमान आतंक फैला रहे हैं, उस जिहाद की सही व्याख्या करने की किसी ने ज़हमत क्यों नहीं उठाई? अगर देश-दुनिया में शांति लानी है, तो इसकी पहल खुद मुसलमानों को करनी होगी। उन्हें लोगों का दिल जीतना होगा और अपने कार्य से विश्वास दिलाना होगा, क्योंकि आचरण ही किसी को श्रेष्ठ बनाता है। यदि अलगावादियों की यह सोच है कि वे यहां आतंकियों को समर्थन देकर और उन्हें पाल-पोसकर कश्मीर को भारत से अलग करा देंगे, तो शायद यह उनकी बहुत ही बड़ी भूल है। यहां के पाकिस्तानपरस्त लोग अब तक सारे पैंतरे आजमा चुके हैं, लेकिन उनकी सभी चालें बेकार साबित होती हैं। कश्मीर में पनपते आतंक को पाकिस्तान की पूरी शह रहती है। सीमा पार से आने वाले आतंकियों को पाकिस्तान पूरी मदद मुहैया कराता है। वह हर बार संयुक्त राष्ट्र संघ में कश्मीर मामले को उठाकर अपनी फजीहत कराता है। जब उसकी वहां भी नहीं चलती, तो वह घाटी में दहशतगर्दों के सहारे आतंक फैलाता है। लेकिन, जो उसकी मंशा है, वह कभी कामयाब नहीं होने वाली।

 
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